Haryana News : न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) व्यवस्था में व्यापक सुधार या नई नीति की मांगों के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि फिलहाल मौजूदा व्यवस्था में किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं मानी जा रही है।
लोकसभा में हिसार से सांसद जयप्रकाश 'जेपी' के सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि वर्तमान एमएसपी प्रणाली प्रभावी ढंग से काम कर रही है और खरीद व्यवस्था लगातार मजबूत हुई है।
सरकार ने अपने दावे के समर्थन में खरीद और किसानों को किए गए भुगतान में उल्लेखनीय वृद्धि के आंकड़े भी पेश किए। जयप्रकाश ने एमएसपी व्यवस्था की प्रभावशीलता, सीमित फसल कवरेज, क्षेत्रीय असमानताओं और खरीद प्रणाली की समीक्षा का मुद्दा उठाया था। हालांकि सरकार ने अपने जवाब में किसी व्यापक समीक्षा, नई समिति या नीतिगत बदलाव का संकेत नहीं दिया। मंत्रालय ने कहा कि एमएसपी हर वर्ष कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की सिफारिशों और राज्यों के साथ परामर्श के आधार पर तय किया जाता है तथा मौजूदा व्यवस्था किसानों के हित में काम कर रही है।
खरीद और भुगतान बढ़ने का दावा
सरकार के अनुसार वर्ष 2023-24 में एमएसपी पर 1089 लाख मीट्रिक टन फसलों की खरीद हुई, जो 2025-26 (30 जून तक) बढ़कर 1276 लाख मीट्रिक टन हो गई। इसी अवधि में किसानों को एमएसपी के तहत किया गया भुगतान 2.63 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 3.77 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। सरकार ने इन आंकड़ों को मौजूदा व्यवस्था की प्रभावशीलता का प्रमाण बताया।
डिजिटल व्यवस्था पर भरोसा
कृषि मंत्रालय ने कहा कि खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए किसानों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष भुगतान, आधार और भूमि रिकॉर्ड को खरीद पोर्टलों से जोड़ने तथा जरूरत के अनुसार स्थायी और अस्थायी खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाने जैसे कदम उठाए गए हैं। इससे वास्तविक किसानों तक एमएसपी का लाभ सीधे पहुंचाने में मदद मिली है।
पुरानी स्टडी का भी दिया हवाला
सरकार ने अपने जवाब में नीति आयोग (तत्कालीन योजना आयोग) के वर्ष 2016 के अध्ययन का भी उल्लेख किया। मंत्रालय के अनुसार अध्ययन में शामिल 78 प्रतिशत किसानों ने माना था कि एमएसपी नीति ने उन्हें उन्नत बीज, उर्वरक और आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
