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मानसून में वापसी हैंडलूम के फैशन की

मानसून सीजन में खादी, लिनन, कॉटन और विभिन्न क्षेत्रीय बुनाई वाले हाथ से बने कपड़े युवाओं द्वारा खूब पसंद किये जा रहे हैं। खास बात, इनका आधुनिक कट्स डिजाइनों-रंगों के साथ नया अंदाज है।

जानकारों का मानना है कि हैंडलूम की वापसी केवल ट्रेंड नहीं बल्कि बदलती जीवनशैली और उपभोक्ता सोच का नतीजा है। लोग अब ऐसे कपड़े चाहते हैं जो आरामदायक, पर्यावरण अनुकूल हों और सांस्कृतिक पहचान व्यक्त करें।

बारिश की पहली फुहार के साथ ही फैशन की दुनिया में नये रंग और रुझान दिखायी देने लगते हैं। हमारे यहां हर मौसम अपने साथ पहनावे की नई मांग लेकर आता है। मानसून भी इसका अपवाद नहीं है। इस बार के मानसून के फैशन में बड़ा दिलचस्प बदलाव दिख रहा है -वह है हर तरफ हैंडलूम की मांग। हैंडलूम यानी हाथ से बुने कपड़ों की फैशन की दुनिया में फिर से जोरदार वापसी हो रही है। कभी केवल पारंपरिक और औपचारिक परिधानों तक सीमित माने जाने वाले हैंडलूम वस्त्र आज युवाओं की वार्डरोब में भी बड़ी प्रमुखता से सज रहे हैं। खादी, लिनन, कॉटन और विभिन्न क्षेत्रीय बुनाई वाले कपड़े और आधुनिक कट्स डिजाइनों-रंगों के साथ नये अंदाज में सामने आ रहे हैं। जानकारों का मानना है कि हैंडलूम की वापसी केवल ट्रेंडभर नहीं है बल्कि बदलती जीवनशैली और उपभोक्ता सोच का नतीजा है। लोग अब ऐसे कपड़े चाहते हैं जो आरामदायक हों, पर्यावरण के अनुकूल हों और उनकी सांस्कृतिक पहचान को भी व्यक्त करें।
इसलिए बढ़ रही है मांग
मानसून के मौसम में हैंडलूम की आखिर क्यों मांग बढ़ रही है? बरसात के मौसम में सिंथेटिक कपड़े, चिपचिपाहट और असहजता का कारण बन जाते हैं। जबकि कॉटन और लिनन जैसे हैंडलूम आधारित कपड़े नमी को बेहतर ढंग से सोखने के कारण सुकून देते हैं। ये हल्के होते हैं और लंबे समय तक पहनने पर भी आराम देते हैं। यही कारण है कि फैशन डिजाइनर इस मौसम में खास तौरपर हैंडलूम फैब्रिक को प्राथमिकता दे रहे हैं। अब इन कपड़ों से केवल साड़ी या कुर्ता नहीं बल्कि जैकेट, को-ऑर्ड सेट, ड्रेसेज, ट्राउजर, शर्ट और इंडो वेस्टर्न परिधान भी बनाये जा रहे हैं। इसलिए युवाओं का तेजी से इधर आकर्षण बढ़ा है।
सोशल मीडिया की भूमिका
सोशल मीडिया और फैशन इंफ्लूएंसर्स की भी इसमें बड़ी भूमिका है। आज के युवा ऐसे कपड़ों को पसंद कर रहे हैं, जिनमें फैशन के साथ कहानी भी हो। उन्हें जानकर अच्छा लगता है कि उनका परिधान किसी ग्रामीण बुनकर की मेहनत का नतीजा है। ऐसे में फैशन केवल दिखावे का माध्यम नहीं रह जाता बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का हिस्सा भी बन जाता है। इसलिए आज के युवा हैंडलूम खूब पसंद कर रहे हैं। क्योंकि उन्हें कपड़ों के साथ कुछ कहानियां भी पहननी हैं। यही कारण है कि हैंडलूम आज सस्टेनेबल फैशन की ओर कदम बढ़ा चुका है।
खादी की सादगी में फैशन
खादी जो कभी स्वतंत्रता आंदोलन की सादगी और देशी होने का प्रतीक थी, आज वही खादी फैशन का प्रतीक भी होती जा रही है। यही कारण है कि आज खादी रैंप से लेकर कार्पोरेट कार्यालयों तक हर जगह अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। डिजाइनर खादी को आधुनिक सिल्हूट्स, आकर्षक रंगों और समकालीन डिजाइनों के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं। परिणामस्वरूप खादी अब केवल कुर्तों तक सीमित नहीं है बल्कि ब्लेजर, ड्रेसेज, स्कर्ट और ट्रेंडी शर्ट्स में भी दिखायी दे रही है।
पर्यावरणीय जागरुकता
हैंडलूम की लोकप्रियता के पीछे एक बड़ा कारण पर्यावरणीय जागरुकता भी है। दुनियाभर में फैशन उद्योग पर प्रदूषण बढ़ाने के आरोप लगते रहे हैं, ऐसे में उपभोक्ता अब पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। हैंडलूम उत्पादन में अपेक्षाकृत कम ऊर्जा का उपयोग होता है और इसमें बड़े पैमाने पर मशीनों की जरूरत नहीं पड़ती। इससे कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है। यही कारण है कि सस्टेनेबल फैशन का यह महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी इससे सहारा मिलता है। जब कोई व्यक्ति हैंडलूम कपड़े खरीदता है, तो वह केवल एक कपड़ा नहीं खरीद रहा होता बल्कि देश के लाखों बुनकर परिवारों के जीवन को भी समर्थन दे रहा होता है। भारत का हैंडलूम उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए बदलती फैशन प्राथमिकताओं के कारण बुनकरों को नये अवसर मिल रहे हैं और शिल्प को संरक्षण भी मिल रहा है। मानसून 2026 में हैंडलूम फैशन में कुछ जबर्दस्त नवाचार भी देखने को मिल रहे हैं। मसलन पेस्टल रंगों, प्राकृतिक रंगों और सूक्ष्म प्रिंट्स का भी प्रभाव दिख रहा है। हल्का नीला, मिंट, ग्रीन, लैवेंडर, ऑफ व्हाइट और मिट्टी के रंग खासकर लोकप्रिय हैं।

इन बातों का रखें ध्यान
मानसून के मौसम में कॉटन और लिनन आधारित कपड़े चुनें, क्योंकि ये हल्के और पसीना सोखने वाले होते हैं। रंग भी इस मौसम में हल्के पहनना चाहिए और ढीले-ढाले परिधान बेहतर होते हैं। इस मौसम में खादी इसलिए भी बेहतर होती है, क्योंकि प्राकृतिक फैब्रिक होने के कारण ये जल्दी सूखती हैं। इसमें सरल और आरामदायक डिजाइन भी मौजूद हैं। लेकिन लंबे समय तक गीले कपड़े न पहनें। वहीं अत्यधिक नमी वाले स्थान पर कपड़ों को रखने से बचें। साथ ही इन पर तेज रसायनिक क्लीनर का उपयोग न करें। -प्र.अ.

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