कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग, हरियाणा की निदेशक एवं विशेष सचिव प्रियंका सोनी, हरियाणा राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया तथा सदस्य सचिव मोनिका मलिक विशेष रूप से उपस्थित रहीं। सभी वक्ताओं ने अपने-अपने विषयों पर विस्तार से जानकारी देते हुए प्रतिभागियों को जागरूक किया।
मोरनी हिल्स-कानूनी प्रावधानों की दी जानकारी
कार्यक्रम में राष्ट्रीय महिला आयोग के कानूनी सलाहकार कमल एडवोकेट ने महिलाओं के कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न से संरक्षण संबंधी अधिनियम 2013 के प्रावधानों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह कानून महिलाओं को सुरक्षित कार्यस्थल प्रदान करने और शिकायतों के निवारण के लिए महत्वपूर्ण है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को इसके प्रभावी क्रियान्वयन के बारे में जानकारी दी गई।
साइबर अपराध से बचाव पर जोर
एसीपी सुरेंद्र सिंह ने साइबर अपराध के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए उससे बचाव के उपाय बताए। उन्होंने बताया कि हैकिंग, स्पैम ईमेल और फर्जी बैंक कॉल के जरिए अपराधी लोगों की निजी जानकारी हासिल कर आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को आगाह किया कि किसी भी स्थिति में बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी फोन, संदेश या इंटरनेट के माध्यम से साझा न करें।
कार्यशाला में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की अधिवक्ता दीपा सिंह ने पाॅक्सो अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कानून बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है और इसके तहत मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष न्यायालय स्थापित किए जाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पीड़ित की आयु का निर्धारण इस अधिनियम के तहत अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान हरियाणा राज्य महिला आयोग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।
