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नेत्र रोग विशेषज्ञ के पेशे में उज्ज्वल भविष्य

दि किसी विद्यार्थी में चिकित्सा क्षेत्र के प्रति रुचि और धैर्य है, तो नेत्र रोग विशेषज्ञ बनकर वह समाज सेवा के साथ-साथ एक सफल और सम्मानजनक कैरियर बना सकता है। नेत्र रोग विशेषज्ञ बनने के बाद रोजगार के अनेक अवसर उपलब्ध होते हैं।

वे सरकारी अस्पतालों, निजी अस्पतालों, नेत्र चिकित्सा केंद्रों और मेडिकल कॉलेजों में कार्य कर सकते हैं। इसके अलावा अपना क्लिनिक या अस्पताल भी शुरू कर सकते हैं।

मानव शरीर में आंखें सबसे महत्वपूर्ण इंद्रियों में से एक हैं। आंखों के माध्यम से ही हम इस सुंदर संसार को देख पाते हैं। यानी जगत की सुंदरता को हम तक पहुंचाने और उससे खुशी हासिल करने में हमारी आंखें ही माध्यम बनती हैं। इसलिए आंखों की देखभाल अत्यंत आवश्यक होती है। आंखों से जुड़ी बीमारियों के उपचार और दृष्टि सुधार के लिए प्रशिक्षित चिकित्सक को नेत्र रोग विशेषज्ञ (ऑप्थैल्मोलॉजिस्ट) कहा जाता है। यह ऐसा पेशा है जिसमें समाज सेवा के साथ-साथ एक उज्ज्वल और सम्मानजनक कैरियर भी प्राप्त किया जा सकता है। आजकल ऐसे नेत्र चिकित्सकों की कमी नहीं है जो नेत्र दान जैसे पावन संकल्प को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
प्रवेश के लिए आवश्यक शैक्षिक योग्यता
नेत्र रोग विशेषज्ञ बनने के लिए सबसे पहले विद्यार्थी को 12वीं कक्षा विज्ञान वर्ग (भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान) से उत्तीर्ण होना आवश्यक है। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) पास करके एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश लेना होता है। एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद नेत्र रोग के इलाज में विशेषज्ञता प्राप्त करने के लिए एमडी (ऑप्थैल्मोलॉजी ) या एमएस ऑप्थैल्मोलॉजी किया जाता है। कुछ छात्र डिप्लोमा इन ऑप्थैल्मोलॉजी का कोर्स भी करते हैं।
ऑप्थैल्मोलॉजी कोर्स की अवधि
नेत्र रोग विशेषज्ञ बनने की पूरी प्रक्रिया में लगभग 8 से 10 वर्ष का समय लग सकता है। बीमारियों की जटिलता को देखते हुए, आज का समय विशेषज्ञता का है, अतः नेत्र रोग विशेषज्ञ बनने हेतु एमएस या फिर एमडी करना अनिवार्य हो जाता है। एमबीबीएस पाठ्यक्रम की अवधि लगभग 5.5 वर्ष है (जिसमें एक वर्ष की इंटर्नशिप शामिल होती है)।
इसके बाद एमडी या एमएस (नेत्र रोग) की अवधि लगभग 3 वर्ष होती है। कुछ चिकित्सक आगे चलकर रेटिना, कॉर्निया या ग्लूकोमा जैसे विशेष क्षेत्रों में सुपर-स्पेशलाइजेशन भी करते हैं।
मेडिकल कॉलेजों की फीस और अन्य खर्च
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और पीजी पाठ्यक्रम की फीस अपेक्षाकृत कम होती है। सरकारी संस्थानों में एमबीबीएस की वार्षिक फीस लगभग 20,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक हो सकती है, जबकि निजी कॉलेजों में यह फीस कई लाख रुपये प्रति वर्ष तक हो सकती है। इसी प्रकार एमडी या एमएस पाठ्यक्रम की फीस भी सरकारी संस्थानों में कम और निजी संस्थानों में अधिक होती है। फीस आदि की अधिक, सटीक जानकारी संबंधित संस्थानों से ली जा सकती है।
प्रमुख सरकारी संस्थान
भारत में कई प्रतिष्ठित सरकारी संस्थान हैं जहां नेत्र रोग की उच्च स्तरीय शिक्षा और प्रशिक्षण मिलता है। इनमें प्रमुख हैं: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज या एम्स) , पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर), अरविंद आई केयर सिस्टम, डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंटर फॉर ऑप्थैलीमिक साइंसेज आदि। वहीं विभिन्न राज्य सरकारों के मेडिकल कॉलेजों में भी नेत्र रोग विशेषज्ञ बनने से संबंधित पढ़ाई करवाई जाती है। इन संस्थानों में प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को आधुनिक तकनीकों और उपकरणों के साथ काम करने का अवसर मिलता है।
रोजगार के अवसर
नेत्र रोग विशेषज्ञ बनने के बाद रोजगार के अनेक अवसर उपलब्ध होते हैं। वे सरकारी अस्पतालों, निजी अस्पतालों, नेत्र चिकित्सा केंद्रों और मेडिकल कॉलेजों में कार्य कर सकते हैं। इसके अलावा कई चिकित्सक अपना निजी क्लिनिक या नेत्र अस्पताल भी शुरू कर सकते हैं। शोध कार्य, चिकित्सा शिक्षण और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों के साथ काम करने के अवसर भी मिलते हैं।
वेतन और आय
नेत्र रोग विशेषज्ञों का वेतन अनुभव और कार्यस्थल के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। शुरुआती स्तर पर सरकारी अस्पताल या निजी संस्थान में कार्य करने वाले चिकित्सक को लगभग 60,000 से 1 लाख रुपये प्रतिमाह तक वेतन मिल सकता है। अनुभव बढ़ने के साथ यह वेतन 2 लाख रुपये मासिक से 5 लाख रुपये प्रतिमाह या उससे अधिक भी हो सकता है। निजी क्लिनिक चलाने वाले विशेषज्ञों की आय इससे भी अधिक हो सकती है , जो उनकी विशेषज्ञता पर निर्भर करती है।नेत्र रोग विशेषज्ञ का पेशा केवल एक कैरियर नहीं, बल्कि मानव सेवा का माध्यम भी है। दृष्टि खो चुके या आंखों की समस्या से पीड़ित लोगों को उपचार देकर उन्हें नई रोशनी देना अत्यंत संतोषजनक अनुभव होता है। यदि किसी विद्यार्थी में चिकित्सा क्षेत्र के प्रति रुचि, मेहनत और धैर्य है, तो नेत्र रोग विशेषज्ञ बनकर वह समाज सेवा के साथ-साथ एक सफल और प्रतिष्ठित कैरियर भी बना सकता है।

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