हाईकोर्ट के आदेश के बाद काम ठप, सफीदों-पानीपत परियोजना भी प्रभावित
सफीदों-जींद स्टेट हाईवे को चौड़ा करने की बहुप्रतीक्षित परियोजना एक बार फिर अटक गई है। करीब डेढ़ वर्ष से लंबित यह योजना अब पेड़ों के कटान पर हाई कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक के कारण ठप पड़ी है।
इसका असर सफीदों-पानीपत स्टेट हाईवे परियोजना पर भी पड़ रहा है। जानकारी अनुसार, हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने प्रदेशभर में पेड़ों के कटान पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है।
अगली सुनवाई 11 मई को निर्धारित है। यह मामला जीरकपुर-पंचकूला के 19.2 किलोमीटर लंबे 6-लेन बाईपास परियोजना से जुड़ा है, जिसमें करीब 5 हजार पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। इन पेड़ों के कटान पर कंपनसेटरी फॉरेस्ट के लिए पेड़ लगाने को वन विभाग को 17.57 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराई जानी थी जो इस एरिया में उपलब्ध नहीं कराई गई।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि इंडिया स्टेट ऑफ़ फारेस्ट रिपोर्ट-2023 के अनुसार हरियाणा में वन क्षेत्र मात्र 3.65 प्रतिशत है जो राष्ट्रीय औसत 21.71 प्रतिशत से काफी कम है, इसलिए बिना उचित प्रतिपूरक वनरोपण के पेड़ों की कटाई उचित नहीं है। इसी आधार पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। इस आदेश के चलते सफीदों-जींद हाईवे चौड़ीकरण का काम केवल उन हिस्सों तक सीमित रह गया है जहां पेड़ नहीं हैं। वहीं, सड़क किनारे पेड़ों वाले हिस्सों में निर्माण पूरी तरह रुका हुआ है।
इसी तरह सफीदों-पानीपत हाईवे पर भी काम प्रभावित हुआ है। इसके अलावा, सड़क के दायरे में आने वाले बिजली के खंभे, ट्रांसफार्मर और अन्य ढांचे भी अब तक नहीं हटाए गए हैं। विभागीय स्तर पर आवश्यक शुल्क जमा कर इन्हें हटाने की प्रक्रिया भी लंबित है, जिससे परियोजना में और देरी हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सड़क लंबे समय से खस्ताहाल है और चौड़ीकरण में देरी से परेशानी बढ़ रही है। अब सभी की नजर 11 मई की सुनवाई पर टिकी है।
