सरस्वती मंदिर के निकट नगर पालिका दो साल से पृथु द्वार का निर्माण कर रही है। वर्ष 2025 में गहरा गड्ढा खोद दिया था, परंतु निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया था। 6 महीने तक यह गड्ढा इसी तरह बना रहा।
भारी बरसात में इसमें पानी भरने लगा और निकट की दुकानों के लिए भी खतरा बन गया। आखिरकार पालिका अधिकारी जाग गए तथा वहां पर एक पिलर खड़ा कर दिया गया । पीलर लगाने के बाद पालिका अधिकारी फिर सो गये। वर्ष 2026 में द्वार के लिए फिर एक पिलर लगा दिया। पिलर लगाने के बाद पालिका उसे भी भूल गई।
हैरानी की बात है कि इन दोनों ही पिलरों पर ठेकेदारों ने इसकी मजबूती के लिए पानी का छिड़काव ही नहीं किया। इसकी तराई नहीं की गई। दिखावे के लिए बोरिया लगा दी। जिन्हें बंदरों ने फाड़ दिया। बारिश के चलते ही इन पर पानी बरसा। अब 10 दिन पहले फिर तीसरा पिलर बना दिया गया। यह पिलर भी बिना तराई है। इस पर आज तक ठेकेदार ने पानी का छिड़काव नहीं किया। अब यह पिलर भगवान भरोसे है। सोमवार को मेघ बरस ही गए। उल्लेखनीय है कि इसी तरह एक अन्य चौक पर ठेकेदार ने एक छतरी का निर्माण किया था परंतु लेंटर डालने के बाद उस पर तराई नहीं की गई। जिस कारण लेटर खोलते समय यह छतरी ही नीचे गिर गई। केवल सरिया ही लटका रहा। कमजोर पिलर का बना द्वार कितना समय रहेगा।यह भविष्य के गर्भ में है। वहीं पालिका के पूर्व उपप्रधान पूर्व पार्षद दीपक अत्री ने इस निर्माण पर आपत्ति उठाते हुए कहा कि इसमें घोर अनियमितताएं बरती गई है। आरसीएम का टेंडर था परंतु मिक्सर से इसे बनाया गया है। इतना ही नहीं उच्च गुणवत्ता के बजाये लोकल सरिया का प्रयोग किया गया है। जिस कारण यह पिलर कमजोर है। उन्होंने इसकी जांच की मांग की।
