Punjab Govt Agriculture Plan : पंजाब में धान की फसल का सीजन आने वाला है और इसके साथ ही एक बार फिर ‘पराली’ की चर्चा शुरू हो गई है। लेकिन इस बार पंजाब सरकार ने कागजों पर नहीं, बल्कि बजट के भारी-भरकम आंकड़ों के साथ एक ठोस रणनीति तैयार की है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए 1,388 करोड़ रुपये के ‘एनुअल एग्रीकल्चर एक्शन प्लान’ को मंजूरी दी है।
इस पूरे प्लान की सबसे चौंकाने वाली और राहत भरी खबर यह है कि कुल बजट का लगभग 43 प्रतिशत हिस्सा, यानी 600 करोड़ रुपये, अकेले पराली प्रबंधन (Stubble Management) के लिए रखा गया है। सोमवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देकर केंद्र सरकार के पास भेज दिया गया है। कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां का कहना है कि यह निवेश पंजाब की हवा को साफ रखने और किसानों को जुर्माना-मुक्त खेती की ओर ले जाने का एक बड़ा जरिया बनेगा।
पराली पर ‘600 करोड़’ का प्रहार : क्या है सरकार का गेम प्लान ?
हर साल अक्टूबर-नवंबर में पंजाब के आसमान में धुएं की चादर छा जाती है। सरकार ने इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए 600 करोड़ रुपये का जो बजट रखा है, वह मुख्य रूप से ‘क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट’ (CRM) योजना पर खर्च होगा। इसे दो आसान तरीकों से समझा जा सकता है:
1. खेत के अंदर ही समाधान (In-Situ): सरकार किसानों को भारी सब्सिडी पर ‘सुपर सीडर’ और ‘स्मार्ट सीडर’ जैसी मशीनें दे रही है। ये मशीनें धान की कटाई के बाद बची हुई पराली को खेत में ही छोटे टुकड़ों में काटकर मिट्टी में मिला देती हैं। इससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है और किसानों को अगली फसल में खाद की कम जरूरत पड़ती है।
2. खेत से बाहर का समाधान (Ex-Situ): जो किसान पराली को खेत में नहीं रखना चाहते, उनके लिए ‘बेलर’ (Baler) मशीनों का प्रावधान बढ़ाया गया है। ये मशीनें पराली की गांठें बनाती हैं, जिन्हें बिजली बनाने वाले प्लांट या बायोगैस इकाइयों को बेचा जा सकता है। इससे किसान को पराली जलाने के बजाय उससे कमाई करने का मौका मिलेगा।
आंकड़ों की जुबानी: 53% की गिरावट ने दी नई उम्मीद
अगर आप सोच रहे हैं कि क्या इतने पैसे खर्च करने से बदलाव आएगा, तो पिछले साल के आंकड़े इसका सबूत हैं। साल 2025 में पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में 53 प्रतिशत की भारी कमी देखी गई थी।
2024 का आंकड़ा: 10,909 आगजनी की घटनाएं।
2025 का आंकड़ा: 5,114 आगजनी की घटनाएं।
सरकार का लक्ष्य इस साल इस आंकड़े को न्यूनतम स्तर पर लाना है। इसके लिए संगरूर, फिरोजपुर और बठिंडा जैसे संवेदनशील जिलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि जब मशीनें सस्ती और आसानी से उपलब्ध होंगी, तो किसान खुद-ब-खुद आग लगाने का रास्ता छोड़ देगा।
मशीनें कैसे मिलेंगी? कस्टम हायरिंग सेंटर का बड़ा रोल
एक आम किसान के लिए लाखों रुपये की मशीन खरीदना संभव नहीं है। इसीलिए सरकार ने 95 करोड़ रुपये कृषि मशीनीकरण (SMAM) के लिए अलग से रखे हैं। पंजाब के गांवों में ‘कस्टम हायरिंग सेंटर’ (CHC) का जाल बिछाया जा रहा है।
ये केंद्र सहकारी समितियों या किसान समूहों द्वारा चलाए जाएंगे, जहाँ से छोटे और सीमांत किसान मामूली किराए पर पराली प्रबंधन की मशीनें ले सकेंगे। इन केंद्रों को मशीनें खरीदने के लिए सरकार की ओर से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। इसका मतलब है कि मशीन की पहुंच अब केवल बड़े जमींदारों तक ही सीमित नहीं रहेगी।
पानी का संकट: ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ पर 33 करोड़ का दांव
पंजाब के सामने पराली के बाद दूसरा सबसे बड़ा संकट गिरता भूजल स्तर है। पंजाब के कई हिस्सों में पानी इतना नीचे चला गया है कि उसे ‘डार्क जोन’ घोषित कर दिया गया है। इस संकट से निपटने के लिए बजट में 33.33 करोड़ रुपये ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना के लिए रखे गए हैं।
इसके तहत ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) और स्प्रिंकलर सिस्टम को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, धान की सीधी बिजाई (DSR तकनीक) को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे सिंचाई के पानी में लगभग 20 प्रतिशत तक की बचत हो सकती है। सरकार का सीधा संदेश है कि “पानी बचाओ, पंजाब बचाओ।”
धान से दूरी : 50 करोड़ से बदलेंगे फसल का मिजाज
पंजाब को गेहूं-धान के अंतहीन चक्र से बाहर निकालने के लिए 50.30 करोड़ रुपये ‘फसल विविधीकरण’ (Crop Diversification) के लिए आवंटित किए गए हैं। सरकार चाहती है कि किसान उन फसलों की ओर मुड़ें जिनमें पानी कम लगे और कमाई ज्यादा हो।
मक्का और दालें : मक्का और दलहन की खेती के लिए किसानों को विशेष प्रोत्साहन राशि और बीज सहायता दी जाएगी।
कपास पर फोकस : मालवा क्षेत्र के किसानों के लिए 51.85 करोड़ रुपये बीज सुधार और कपास प्रदर्शन प्रोजेक्ट्स के लिए रखे गए हैं। कपास की अच्छी फसल से न केवल किसान को लाभ होगा, बल्कि पंजाब की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को भी मजबूती मिलेगी।
मिट्टी की सेहत और प्राकृतिक खेती: 8 करोड़ की पहल
रसायनों के अत्यधिक उपयोग ने पंजाब की मिट्टी को बीमार कर दिया है। इसे सुधारने के लिए 8.25 करोड़ रुपये ‘प्राकृतिक खेती’ (Natural Farming) के लिए प्रस्तावित किए गए हैं। सरकार छोटे-छोटे क्लस्टर बनाकर किसानों को बिना रसायन वाली खेती का प्रशिक्षण देगी। इसका उद्देश्य पंजाब को ‘कैंसर बेल्ट’ जैसी बदनामी से बाहर निकालकर शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक अनाज पैदा करने वाला राज्य बनाना है।
क्या यह प्लान गेमचेंजर साबित होगा ?
पंजाब सरकार का 1,388 करोड़ रुपये का यह कृषि प्लान सिर्फ बजट का आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह पंजाब की खेती के भविष्य का रोडमैप है। 600 करोड़ का पराली प्रबंधन बजट अगर सही समय पर जमीनी स्तर पर पहुंचता है, तो इस साल दिल्ली और चंडीगढ़ के लोगों को धुएं से काफी राहत मिल सकती है।
हालांकि, इस योजना की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सब्सिडी वाली मशीनें धान की कटाई शुरू होने से पहले किसानों के खेतों तक पहुंच पाती हैं या नहीं। यदि प्रशासन और किसान मिलकर काम करें, तो पंजाब ‘हरित क्रांति’ के बाद अब ‘स्वच्छ और सुरक्षित खेती’ की क्रांति का नेतृत्व कर सकता है।
