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राष्ट्रमंडल खेल-2030 में हरियाणा को सह-मेजबान बनाने की मांग तेज; कांग्रेस बोली - सबसे ज्यादा पदक, फिर भी मेजबानी नहीं

Commonwealth Games 2030 : राष्ट्रमंडल खेल-2030 की मेजबानी को लेकर हरियाणा में सियासत तेज हो गई है। लोकसभा परिसर में कांग्रेस सांसदों के विरोध प्रदर्शन के बाद अब पार्टी ने विधानसभा स्तर पर भी मोर्चा खोल दिया है।

बुधवार को चंडीगढ़ स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पांच वरिष्ठ विधायकों ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर केंद्र और राज्य सरकार पर हरियाणा की खेल उपलब्धियों की अनदेखी का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि देश को सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय पदक दिलाने वाले राज्य को राष्ट्रमंडल खेलों की सह-मेजबानी से दूर रखना खिलाड़ियों के साथ अन्याय है। प्रेस वार्ता में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं थानेसर विधायक अशोक अरोड़ा, नूंह विधायक आफताब अहमद, रोहतक विधायक भारत भूषण बत्रा, फतेहाबाद विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया तथा उकलाना विधायक नरेश सेलवाल मौजूद रहे।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेल गुजरात में आयोजित किए जा रहे हैं, लेकिन हरियाणा को सह-मेजबान तक नहीं बनाया गया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों में भारत को मिले पदकों में हरियाणा के खिलाड़ियों का योगदान सबसे अधिक रहा है।

प्रदेश के खिलाड़ी अब तक 100 से अधिक पदक जीत चुके हैं। ऐसे राज्य की अनदेखी न केवल खिलाड़ियों का मनोबल तोड़ने वाली है, बल्कि खेल संस्कृति के प्रति सरकार की उदासीनता भी दर्शाती है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से आग्रह किया कि हरियाणा को राष्ट्रमंडल खेलों का सह-मेजबान बनाया जाए ताकि प्रदेश की खेल विरासत के अनुरूप उसे सम्मान मिल सके।

सीएम के बयान पर कांग्रेस का पलटवार

कांग्रेस विधायकों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के उस बयान पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने खिलाड़ियों की उपलब्धियों का श्रेय मौजूदा सरकार की खेल नीति को दिया था। नेताओं ने कहा कि हरियाणा के खेल मॉडल की नींव पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में रखी गई थी। उन्होंने कहा कि ‘पदक लाओ, पद पाओ’ जैसी नीति, खिलाड़ियों के लिए आकर्षक कैश अवार्ड, सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता और बेहतर खेल सुविधाओं जैसी पहल कांग्रेस सरकार ने शुरू की थीं। इन्हीं फैसलों ने हरियाणा को देश की खेल राजधानी बनाया। मौजूदा सरकार को इन उपलब्धियों का श्रेय लेने के बजाय खेल ढांचे को और मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।

‘खेल सुविधाओं की हालत भी चिंता का विषय’

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार खेल अधोसंरचना को सुदृढ़ करने में विफल रही है। खिलाड़ियों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रहीं और प्रशिक्षण के दौरान सामने आईं कई घटनाएं सरकार के दावों की पोल खोलती हैं। उनका कहना था कि यदि सरकार वास्तव में खेलों के प्रति गंभीर होती तो राष्ट्रमंडल खेलों की सह-मेजबानी के लिए प्रभावी पैरवी करती।

अब एचकेआरएन पर आंदोलन

प्रेस वार्ता में कांग्रेस ने हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएन) को लेकर भी सरकार पर हमला बोला। नेताओं ने आरोप लगाया कि निगम के जरिए नियमित सरकारी नौकरियों की व्यवस्था कमजोर कर युवाओं को संविदा प्रणाली में धकेला जा रहा है। उन्होंने एचकेआरएन को समाप्त करने की मांग करते हुए 19 अगस्त को पंचकूला स्थित निगम कार्यालय के बाहर राज्यस्तरीय धरने का ऐलान किया। उन्होंने बताया कि धरने में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा, हरियाणा कांग्रेस प्रभारी संजय दत्त, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह सहित पार्टी के सांसद, विधायक और वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल होंगे। इसके बाद आंदोलन को जिला स्तर तक विस्तारित किया जाएगा।

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