रूस-यूक्रेन युद्ध की आग ने फतेहाबाद के गांव कुम्हारिया के एक और घर का चिराग बुझा दिया। युद्ध में जबरन धकेले गये गांव के युवक विजय पुनिया का कंकाल बन चुका शव बुधवार को घर लाया गया।
इससे 25 दिन पहले अंकित जांगड़ा का शव भी कंकाल रूप में गांव लाया गया था।
स्टडी वीजा पर रूस गये विजय और अंकित का पिछले साल 11 सितंबर के बाद अपने परिवार से संपर्क टूट गया था। आखिरी बार भेजे एक वीडियो में उन्होंने बताया था कि उन्हें जबरन यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर भेजा जा रहा है। उस वीडियो में उनकी आवाज में डर साफ झलक रहा था। उन्होंने मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन उसके बाद कभी कोई संदेश या संपर्क नहीं हो सका।
परिवारों ने हर दरवाजा खटखटाया, हर संभव कोशिश की, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। अब माना जा रहा है कि अंकित और विजय की मौत काफी समय पहले हो चुकी थी, उनके हड्डियों के ढांचे को उनके अपनों तक पहुंचने में महीनों लग गए।
विजय के परिवार को अनहोनी की आशंका तो उस दिन ही हो गई थी, जब रूसी दूतावास ने फरवरी 2026 में उनसे डीएनए सैंपल की रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन उसकी विधवा मां किसी चमत्कार की आशा लगाए बैठी थी। विजय के रिश्ते में चाचा चांदी राम पुनिया ने बताया कि मंगलवार शाम उनके पास दूतावास से फोन आया था कि विजय का शव दिल्ली लाया जा चुका है।
एक ही गांव के दो जवान बेटों की रूस-यूक्रेन युद्ध में मौत से कुम्हारिया ही नहीं, बल्कि पूरे फतेहाबाद जिले में शोक और आक्रोश है। गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा है और हर आंख नम है। लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर कब तक बेरोजगारी के चलते देश के युवा ऐसे खतरनाक जाल में फंसते रहेंगे और अपनी जान गंवाते रहेंगे।
परिवार आज भी उस आखिरी कॉल को याद कर कांप उठता है। विजय ने कहा था, 'मां, हमें आगे भेजा जा रहा है… यहां हालात ठीक नहीं…।' इसके बाद फोन बंद हो गया। विजय के परिवार में उसका भाई सुनील और विधवा मां है। दोनों भाइयों के हिस्से में मात्र सवा एकड़ जमीन से गुजारा ना होने के चलते, अपने परिवार की आर्थिक हालत सुधारने का सपना लेकर रूस गये विजय की अब यादें ही रह गई हैं।
