Sawan Mass 2026: आज से श्रावण मास आरंभ हो गया है।शिव पुराण के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकला विष पीने से भगवान शिव का कंठ नीला पड़ा और उनका पूरा शरीर गर्म हो गया था। देवताओं ने उन्हें ठंडा रखने के लिए लगातार जल अर्पित किया।
तभी से माना जाता है कि जल चढ़ाने से शिव जी का क्रोध शांत होता है और वो जल्दी प्रसन्न होते हैं।
मान्यता है कि श्रावण में ही माता पार्वती ने शिव को पाने के लिए कठोर तप किया था। इस महीने में की गई पूजा का फल 100 गुना मिलता है। इसीलिए इसे “शिव का प्रिय मास” कहा जाता है। शिवलिंग पर जल चढ़ाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और पापों का नाश होता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रावण के सोमवार को जल, बेलपत्र व दूध चढ़ाने से मनोकामना पूरी होती है। कुंवारी लड़कियां अच्छे वर के लिए और विवाहित लोग सुखी दांपत्य के लिए ये व्रत करते हैं।
यमुनानगर के सरोजिनी कालोनी स्थित दयालु जी मंदिर में सुबह 4:00 बजे से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो चुका है। श्रद्धालु विधिवत रूप से शिव की पूजा अर्चना करके शिवलिंग पर जल अभिषेक कर रहे हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि शिव सबसे जल्दी प्रसन्न होते हैं, उनकी पूजा अर्चना करने से सभी संकट दूर होते हैं सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

मंदिर के पुजारी पंडित केशव शर्मा ने श्रावण मास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा की श्रद्धालु आज से अपने-अपने स्थान से गंगोत्री, गोमुख, हरिद्वार ,ऋषिकेश जाकर जल लाते हैं जो 11 अगस्त को शिवरात्रि पर शिवलिंग पर चढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस माह के दौरान कावड़ लाने का विशेष महत्व है। हालांकि यह प्रथा रावण ने सबसे पहले शुरू की थी और उसके बाद से श्रद्धालु साधनों को छोड़कर पैदल जाकर शरीर को कष्ट देकर जल लाते हैं और शिवरात्रि पर जल अभिषेक करते हैं, इसका विशेष महत्व भी बताया गया है।
पंडित केशव शर्मा का कहना है कि प्राचीन समय में इस माह में यात्रा करने पर निषेध था। क्योंकि इस दौरान मानसून होता है, अत्यधिक वर्षा होती है, नदी नाले उफान पर आ जाते हैं, जिसके चलते श्रद्धालुओं को दिक्कत आ सकती है, लेकिन अब समय बदल चुका है ।नदियों नहरों पर पुलों का निर्माण हो चुका है, आने-जाने के रास्ते सुगम हो गए हैं, इसलिए इस विशेष मास में लोग साधन होते हुए भी अपने शरीर को कष्ट देते हुए पैदल, दंडवत करते हुए कावड़ लाते हैं। शिव भोले इससे बहुत प्रसन्न होते हैं और जल्दी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। मंदिर के पुजारी पंडित संपूर्णानंद ने कहा कि भगवान शिव सबसे जल्दी प्रसन्न होते हैं, मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं, उनकी पूजा अर्चना करने से मानसिक आत्मिक शांति मिलती है।
