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शब्द, रंग, संगीत और संवेदना का साझा प्रवाह

सिरी फोर्ट में ‘डायलॉग’ कार्यक्रम ने साहित्य, संगीत और चित्रकला का संगम प्रस्तुत किया, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह की पत्नी श्रीमती गुरुशरण कौर की उपस्थिति ने आयोजन को विशिष्ट बनाया।

वर्ष 1976 से निरंतर प्रवाहित सांस्कृतिक धारा 'डायलॉग' ने बीते दिनों सिरी फोर्ट स्थित 'एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स एंड लिटरेचर' के परिसर में साहित्य, संगीत और चित्रकला का एक जीवंत और यादगार समागम रचा। कार्यक्रम का महत्व तब और बढ़ गया जब पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह की पत्नी श्रीमती गुरुशरण कौर ने अपनी गरिमामय उपस्थिति से आयोजन को विशिष्ट आयाम दिया। 'एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स एंड लिटरेचर' का के कार्यक्रम 'डायलॉग' को इस बार डब्ल्यूबीएस फाउंडेशन का रचनात्मक साथ मिला और 26 अप्रैल की शाम एक विशेष गरिमा में ढल गई। यहां आयोजित सम्मान समारोह और काव्य गोष्ठी ने न केवल राजधानी के कला जगत को एक सूत्र में पिरोया, बल्कि संवाद और संवेदना की नई जमीन भी तैयार की।
विभूतियों का वंदन
पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह की पत्नी श्रीमती गुरुशरण कौर ने डब्ल्यूबीएस फाउंडेशन की ओर से पंजाबी साहित्य की मशहूर लेखिका पद्मश्री अजीत कौर और समकालीन चित्रकला की सशक्त हस्ताक्षर अर्पणा कौर को सम्मानित किया। यह सम्मान केवल उपलब्धियों का नहीं, बल्कि दीर्घकालिक साधना, संघर्ष और सृजन के प्रति आदर का प्रतीक बना। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए अर्पणा कौर ने सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका रीता देव को सम्मानित कर कला की विभिन्न धाराओं के बीच एक सुंदर सेतु निर्मित किया। यह पूरा क्षण उपस्थित जनों के लिए प्रेरणा और आत्मीयता से भरा रहा।
काव्य रस और वैचारिक प्रवाह
मशहूर शायर वसीम बरेलवी की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए डब्ल्यूबीएस फाउंडेशन के महासचिव नीरज जैन ने इस मंच को नई ऊर्जा और रचनात्मक दिशा दी है। उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से जीवन, समाज और समय की सूक्ष्म अनुभूतियों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया, जिससे श्रोता देर तक जुड़े रहे। कार्यक्रम का सधा संचालन और प्रभावी प्रस्तुति मशहूर लेखक, चित्रकार तथा वाइस प्रेसिडेंट, एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स एंड लिटरेचर देव प्रकाश चौधरी ने की। मंच पर कविता के विविध रंग खुलकर सामने आए। वरिष्ठ कवि और संस्कृतिकर्मी राजेंद्र शर्मा के रचनात्मक सहयोग इस कार्यक्रम की गरिमा और निखर कर सामने आई। ज्योतिकृष्ण वर्मा, वीरेश त्यागी, नीतू गुजराल, विप्लव सिंह और रेशमा खातून जैसे कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समकालीन जीवन के अनेक पक्षों को उजागर किया और श्रोताओं को विचार के साथ भाव की यात्रा पर ले गए।
सांस्कृतिक मेल मिलाप
दिल्ली के इस प्रतिष्ठित आयोजन में साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़ी अनेक जानी-मानी हस्तियों के साथ-साथ राजनीतिक क्षेत्र के चुनींदा राजनेताओं की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही। यह सहभागिता इस बात का संकेत है कि कला का संसार केवल सृजन तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों को आपस में जोड़ने का भी माध्यम है। एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स एंड लिटरेचर द्वारा नियमित आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम दशकों से संवाद, विचार और सृजन का एक सशक्त मंच बना हुआ है, जहां नई और पुरानी पीढ़ी के बीच सार्थक आदान-प्रदान होता है।
संवाद में बहती कला
निस्संदेह, ऐसे आयोजन इस सत्य को पुनः स्थापित करते हैं कि जब शब्द और रंग, संगीत और संवेदना एक साथ आते हैं, तो समाज में समझ का विस्तार होता है। सामाजिक व साहित्य की दूरियां स्वतः कम होने लगती हैं। डब्ल्यूबीएस फाउंडेशन का यह प्रयास कला और संस्कृति के क्षेत्र में जीवंतता का सार्थक प्रयास भी सिद्ध हो रहा है।
फीचर डेस्क

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