Haryana Assembly : हरियाणा में मीट की दुकान चलाने और स्लाटर हाउस संचालित करने वालों को अब नगर निगम या नगरपालिका से अलग ट्रेड लाइसेंस लेने की बाध्यता नहीं रहेगी। सरकार ने शहरी क्षेत्रों में लागू दोहरे लाइसेंस की व्यवस्था खत्म करने के लिए बृहस्पतिवार को विधानसभा में हरियाणा नगर निगम (संशोधन) विधेयक-2026 और हरियाणा नगरपालिका (संशोधन) विधेयक-2026 पेश किए।
इसके साथ ही मांस कारोबार के लिए स्थानीय निकायों और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के बीच लाइसेंसिंग की दोहरी प्रक्रिया खत्म करने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार ने यह कदम केंद्र के कैबिनेट सचिवालय के विनियमन प्रकोष्ठ की ओर से दोहरे लाइसेंस की जरूरत खत्म करने के निर्देशों के बाद उठाया है। राज्य मंत्रिमंडल ने 22 जून को इससे संबंधित अध्यादेश को मंजूरी दी थी और 26 जून को इसे प्रकाशित किया गया था। अब विधानसभा की मंजूरी के बाद इसे स्थायी कानूनी रूप दिया जाएगा।
एक कारोबार, दो लाइसेंस की बाध्यता हटेगी
मौजूदा व्यवस्था में मीट, मछली और पोल्ट्री से जुड़े कारोबार तथा मानव उपभोग के लिए मांस बेचने की जगह संचालित करने के लिए स्थानीय निकाय से लाइसेंस लेना जरूरी था। प्रस्तावित संशोधन में हरियाणा नगर निगम और नगरपालिका अधिनियम-1994 की धारा 329(1) को हटाने का प्रावधान किया गया है। इससे नगर निगमों और नगरपालिकाओं से अलग ट्रेड लाइसेंस लेने की जरूरत खत्म हो जाएगी। सरकार का तर्क है कि जब मांस और खाद्य कारोबार का नियमन पहले से ही खाद्य एवं औषधि प्रशासन तथा खाद्य सुरक्षा कानूनों के तहत हो रहा है तो उसी गतिविधि के लिए स्थानीय निकाय का अलग लाइसेंस बनाए रखने का औचित्य नहीं है।
खाद्य सुरक्षा की जांच से छूट नहीं
लाइसेंस की एक परत हटने का मतलब यह नहीं होगा कि मीट कारोबार पर सरकारी निगरानी खत्म हो जाएगी। दुकानदारों और स्लाटर हाउस संचालकों को खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य मानकों और खाद्य एवं औषधि प्रशासन से जुड़े जरूरी लाइसेंस व अनुमतियों का पालन करना होगा। निरीक्षण और खाद्य सुरक्षा संबंधी कार्रवाई भी मौजूदा नियमों के तहत जारी रहेगी। नई व्यवस्था से कारोबारियों के लिए अनुपालन आसान होगा और एक ही गतिविधि के लिए अलग-अलग विभागों से लाइसेंस लेने की प्रक्रिया कम होगी। विधानसभा में पेश किए गए दोनों विधेयकों पर चर्चा और मंजूरी के बाद संशोधित व्यवस्था लागू होगी।
चुलकाना धाम का प्रबंधन सरकार संभालेगी
पानीपत के चुलकाना धाम के प्रबंधन और संचालन को सरकारी नियंत्रण में लाने के लिए 'हरियाणा बाबा श्रीखाटू श्याम चुलकाना धाम श्राइन विधेयक-2026' विधानसभा में पेश किया गया। इसके तहत बाबा श्रीखाटू श्याम श्राइन बोर्ड बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री बोर्ड के चेयरमैन और स्थानीय निकाय मंत्री वाइस चेयरमैन होंगे। स्थानीय निकाय विभाग के प्रशासनिक सचिव पदेन सदस्य होंगे और सरकार सात सदस्यों को नामित करेगी, जिनमें दो महिलाएं होंगी। विधेयक में मंदिर और मंदिर निधि के प्रबंधन का अधिकार श्राइन बोर्ड को देने का प्रावधान है। कानून लागू होने के बाद पुजारियों के मौजूदा अधिकार समाप्त करने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। उनके दावों पर विचार के लिए सरकार ट्रिब्यूनल बना सकेगी, जो सुनवाई के बाद मुआवजे की सिफारिश करेगा। इससे पहले सरकार इस संबंध में अध्यादेश ला चुकी है।
1918 के कानून में अब 1925 का प्रावधान
हरियाणा न्यायालय (संशोधन) विधेयक-2026 के जरिए पंजाब न्यायालय अधिनियम-1918 में मौजूद पुराने कानूनी संदर्भ को बदला जाएगा। मौजूदा धारा 30 में भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम-1865 और वसीयत एवं प्रशासन अधिनियम-1881 का उल्लेख है। दोनों कानून बाद में भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम-1925 से निरस्त हो चुके हैं। अब इन पुराने संदर्भों की जगह भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम-1925 का उल्लेख किया जाएगा। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से राज्य सरकार को इस विसंगति की जानकारी दिए जाने के बाद संशोधन प्रस्तावित किया गया है।
