World Breastfeeding Week 2026 : राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) में हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में स्तनपान से जुड़े महत्वपूर्ण संकेतकों में गिरावट सामने आने के बाद आज ट्राईसिटी के स्वास्थ्य विशेषज्ञ, नीति निर्माता और सरकारी व निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि एक मंच पर जुटेंगे।
विश्व स्तनपान सप्ताह-2026 के तहत आयोजित इस बैठक में इन चुनौतियों के कारणों और समाधान पर चर्चा होगी। साथ ही ट्राईसिटी में ह्यूमन मिल्क बैंक Human Milk Bank आधारित नेटवर्क विकसित करने की रणनीति बनाई जाएगी, ताकि जरूरतमंद नवजातों तक समय पर स्तनपान संबंधी सहायता और जरूरत पड़ने पर डोनर मिल्क (दूसरी माताओं द्वारा स्वेच्छा से दान किया गया मां का दूध) उपलब्ध कराया जा सके।
सबसे पहले समझिए, चिंता किस बात की है ?
मां का दूध नवजात के लिए सबसे सुरक्षित और संपूर्ण आहार माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ जन्म के पहले घंटे के भीतर बच्चे को मां का दूध पिलाने और पहले छह महीने तक केवल मां का दूध देने की सलाह देते हैं। लेकिन एनएफएचएस-6 के ताजा आंकड़े बताते हैं कि हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में इन दोनों संकेतकों में गिरावट आई है। यही वजह है कि विशेषज्ञ इसे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय मान रहे हैं।
क्या कहते हैं NFHS-6 के आंकड़े ?
जन्म के पहले घंटे में मां का दूध पिलाने की स्थिति
- भारत: 41.8% से बढ़कर 50.1%
- पंजाब: 53.1% से घटकर 39.6%
- हरियाणा: 41.6% से घटकर 36.7%
- चंडीगढ़: 63.7% से घटकर 43%
यानी जहां राष्ट्रीय स्तर पर इस संकेतक में सुधार हुआ है, वहीं हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में गिरावट दर्ज की गई है।
पहले छह महीने तक केवल मां का दूध
- भारत: 63.7% से घटकर 55.8%
- पंजाब: 55.5% से घटकर 51%
- हरियाणा: 49.5% से घटकर 44%
चंडीगढ़ के लिए इस संकेतक का अलग आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया है।
यह गिरावट चिंता की बात क्यों है?
जन्म के तुरंत बाद मां का जो पहला गाढ़ा पीला दूध निकलता है, उसे कोलोस्ट्रम कहा जाता है। यह बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं पहले छह महीने तक केवल मां का दूध मिलने से बच्चे को जरूरी पोषण मिलता है और संक्रमण का खतरा कम हो सकता है। इसलिए इन संकेतकों में गिरावट को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है।
आज की बैठक में क्या होगा?
बैठक में पीजीआईएमईआर, एआईएमएस मोहाली, स्वास्थ्य विभाग, आईसीडीएस, पोषण अभियान, बाल एवं नवजात रोग विशेषज्ञ, नर्सिंग अधिकारी तथा चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला के सरकारी व निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। चर्चा इस बात पर होगी कि अधिक से अधिक माताओं तक ब्रेस्टफीडिंग संबंधी सलाह कैसे पहुंचे, अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय कैसे बने और जरूरतमंद नवजातों तक डोनर मिल्क समय पर कैसे उपलब्ध कराया जाए।
Human Milk Bank नेटवर्क कैसे करेगा मदद?
आसान भाषा में समझें तो ट्राईसिटी में एक सेंट्रल Human Milk Bank को मुख्य केंद्र बनाया जाएगा। इससे सरकारी और निजी अस्पतालों को जोड़ा जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर किसी भी अस्पताल में भर्ती नवजात तक सुरक्षित डोनर मिल्क पहुंचाया जा सके।
इस व्यवस्था से-
- जरूरतमंद नवजातों तक समय पर डोनर मिल्क पहुंच सकेगा।
- नई माताओं को ब्रेस्टफीडिंग संबंधी काउंसिलिंग मिलेगी।
- अस्पतालों के बीच रेफरल सिस्टम बेहतर होगा।
- मां के दूध के दान को बढ़ावा मिलेगा।
- स्तनपान के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी।
पीजीआई और एआईएमएस मोहाली की क्या होगी भूमिका?
पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ में पहले से ह्यूमन मिल्क बैंक संचालित है, जहां जरूरतमंद नवजातों को डोनर मिल्क उपलब्ध कराया जाता है। वहीं एआईएमएस मोहाली में वर्ष 2024 में पंजाब का पहला कॉम्प्रिहेंसिव लैक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर (सीएलएमसी) और कॉम्प्रिहेंसिव ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू किया गया। प्रस्तावित नेटवर्क में इसी केंद्र को मुख्य हब के रूप में विकसित करने की योजना है।
इस नेटवर्क के जरिए ट्राईसिटी के सरकारी और निजी अस्पताल आपस में जुड़ेंगे और जरूरत के अनुसार एक-दूसरे की सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। इससे जरूरतमंद नवजातों तक समय पर डोनर मिल्क और ब्रेस्टफीडिंग सहायता पहुंचाना आसान होगा।
मोबाइल आउटरीच वैन कैसे करेगी मदद ?
इस पहल के तहत ह्यूमन मिल्क कलेक्शन मोबाइल आउटरीच वैन भी शुरू की जाएगी। यह अस्पतालों और समुदाय के बीच कड़ी का काम करेगी। इसके जरिए-
- डोनर मिल्क का संग्रह किया जाएगा।
- नई माताओं को ब्रेस्टफीडिंग संबंधी सलाह दी जाएगी।
- जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।
- दूर-दराज के स्वास्थ्य केंद्रों तक सेवाएं पहुंचाई जाएंगी।
- स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण देने में मदद मिलेगी।
बैठक से क्या उम्मीद है?
बैठक का उद्देश्य केवल आंकड़ों पर चर्चा करना नहीं है। इसमें चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला के सरकारी एवं निजी अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, ब्रेस्टफीडिंग सेवाओं का विस्तार करने, मां के दूध के दान को बढ़ावा देने और जरूरतमंद नवजातों तक समय पर सुरक्षित डोनर मिल्क पहुंचाने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
जानिए
- जन्म के पहले एक घंटे के भीतर मां का दूध पिलाना सबसे लाभदायक माना जाता है।
- पहले छह महीने तक बच्चे को केवल मां का दूध देने की सलाह दी जाती है।
- छह महीने बाद मां के दूध के साथ उम्र के अनुसार पूरक आहार शुरू किया जाता है।
एक नजर में
- हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में जन्म के पहले घंटे में मां का दूध पिलाने के आंकड़े घटे हैं।
- पहले छह महीने तक केवल मां का दूध देने की दर में भी गिरावट दर्ज हुई है।
- ट्राईसिटी में आज विशेषज्ञ समाधान और नई कार्ययोजना पर चर्चा करेंगे।
- पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ और एआईएमएस मोहाली दोनों इस व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
- लक्ष्य है कि हर जरूरतमंद नवजात तक समय पर ब्रेस्टफीडिंग सहायता और डोनर मिल्क पहुंच सके।
