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कम तौल, देरी और बहानेबाजी पर लगेगी लगाम; AI से बदलेगा 80 करोड़ लोगों का राशन सिस्टम

कम तौल, देरी और बहानेबाजी पर लगेगी लगाम; AI से बदलेगा 80 करोड़ लोगों का राशन सिस्टम

जागरण 1 month ago

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। देश के करीब 80 करोड़ लोगों को मिलने वाला राशन अब एआई यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से और ज्यादा पारदर्शी बनाया जाएगा।

सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में नई डिजिटल व्यवस्था लागू करने जा रही है, ताकि हर पात्र परिवार को सही मात्रा में और अच्छी गुणवत्ता का अनाज समय पर मिल सके।

नई व्यवस्था में अनाज की खरीद से लेकर गोदाम में भंडारण, ढुलाई और राशन की दुकान तक पूरे सिस्टम को डिजिटल निगरानी से जोड़ा जाएगा।

इससे कम तौल, देरी और बहानेबाजी जैसी शिकायतों पर रोक लगेगी। सभी चरणों की जानकारी आनलाइन दर्ज होगी, जिससे गड़बड़ी की गुंजाइश कम हो जाएगी और जिम्मेदारी तय करना आसान होगा।

'स्मार्ट पीडीएस' से खरीद से वितरण तक डिजिटल निगरानी

इस नई तकनीक का प्रदर्शन भारत मंडपम में आयोजित एआई समिट में किया गया है, जो 17 से 19 फरवरी तक आम लोगों के लिए खुला है।

सरकार का कहना है कि यह केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि राशन व्यवस्था को भरोसेमंद और आम आदमी के अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

इस पहल में व‌र्ल्ड फूड प्रोग्राम का सहयोग भी लिया जा रहा है।सरकार ने राशन प्रणाली को 'स्मार्ट पीडीएस' नाम के एकीकृत डिजिटल मंच से जोड़ा है। इसके जरिए राशन कार्ड का ब्योरा, अनाज का आवंटन, स्टाक की स्थिति, राज्यों तक भेजी गई खेप और दुकान पर वितरण सबकी निगरानी एआई से होगी।

इससे तुरंत पता चल सकेगा कि किस क्षेत्र में कितना अनाज चाहिए और कहां कमी है।ढुलाई व्यवस्था को सुधारने के लिए 'अन्न चक्र' प्रणाली लागू की जाएगी। यह उपलब्ध भंडार, जरूरत और रास्तों का विश्लेषण कर तय करेगी कि अनाज किस मार्ग से भेजा जाए। इससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी और अनाज जल्दी पहुंचेगा।

'अन्नपूर्णा मशीन' से सही मात्रा में अनाज मिलेगा

लाभार्थियों के लिए सबसे बड़ा बदलाव 'अन्नपूर्णा अनाज मशीन' होगी। यह स्वचालित मशीन पहचान को सत्यापित करने के बाद तय मात्रा में अनाज खुद देगी। इससे कम तौल या मनमानी की शिकायत खत्म होगी और लोगों को पूरा हक मिलेगा।

अनाज की गुणवत्ता जांच के लिए भी स्वचालित मशीन लगाई जाएगी, जो कुछ ही मिनटों में दाने की गुणवत्ता और नमी की जांच कर सकेगी। इससे किसानों को सही भुगतान मिलेगा और खराब अनाज गोदाम तक नहीं पहुंचेगा।

शिकायत दर्ज कराने के लिए 'आशा' नाम का बहुभाषी मंच तैयार किया गया है। वहीं स्कैन प्रणाली से सब्सिडी दावों की जांच तेजी से होगी, ताकि भुगतान में देरी न हो।

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