इंटरनेशनल डेस्क: भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। इसी बीच अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) की एक नई रिपोर्ट ने चर्चा बढ़ा दी है। रिपोर्ट में भारत को उन देशों की सूची में शामिल किया गया है, जिनके बारे में अमेरिकी एजेंसी का मानना है कि वहां कुछ व्यापारिक और आयात नियंत्रण से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं।
USTR ने जारी की जांच रिपोर्ट
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने सेक्शन 301 के तहत की गई कुल 60 जांचों के निष्कर्ष सार्वजनिक किए हैं। इन जांचों का उद्देश्य यह पता लगाना था कि विभिन्न देश कथित तौर पर जबरन मजदूरी (Forced Labor) से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए कितने प्रभावी कदम उठा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 54 देशों और अर्थव्यवस्थाओं की पहचान ऐसे क्षेत्रों के रूप में की गई है, जहां अमेरिकी एजेंसी को आयात नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था को लेकर चिंताएं नजर आई हैं। भारत भी इसी सूची में शामिल है।
USTR का कहना है कि कुछ देशों में ऐसे उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, जो कथित रूप से जबरन मजदूरी या श्रमिकों के शोषण से जुड़े हो सकते हैं। इन मामलों में निगरानी और कार्रवाई की व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह निष्कर्ष अमेरिकी आकलन और जांच के आधार पर तैयार किए गए हैं।
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अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव
रिपोर्ट के आधार पर USTR ने सुझाव दिया है कि प्रभावित देशों से अमेरिका आने वाले कुछ आयातित उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क (टैरिफ) लगाया जा सकता है। प्रस्ताव के अनुसार, ऐसे उत्पादों पर 10 प्रतिशत से 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो इससे संबंधित देशों के निर्यातकों पर असर पड़ सकता है।
भारत-अमेरिका व्यापार संबंध
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। दोनों देश व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के लिए कई मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि USTR की यह रिपोर्ट व्यापार वार्ता के दौरान एक महत्वपूर्ण विषय बन सकती है। हालांकि, अंतिम निर्णय दोनों देशों के बीच होने वाली आगे की बातचीत और नीतिगत फैसलों पर निर्भर करेगा।
भारतीय निर्यात पर पड़ सकता है असर
यदि अतिरिक्त टैरिफ लागू किए जाते हैं तो अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले कुछ भारतीय उत्पादों की लागत बढ़ सकती है। इससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव है और इसे लागू करने से पहले कई स्तरों पर समीक्षा और विचार-विमर्श किया जा सकता है। व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में भारत और अमेरिका के बीच इस मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के आर्थिक संबंध काफी मजबूत हैं और किसी भी नए व्यापारिक फैसले का असर दोनों पक्षों के कारोबार पर पड़ सकता है।
