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भारत विश्व का सबसे बड़ा और सशक्त लोकतन्त्र: कुलदीप पठानियां

भारत विश्व का सबसे बड़ा और सशक्त लोकतन्त्र: कुलदीप पठानियां

शिमलाः आज राजकीय महाविद्यालय चुवाड़ी, जिला चम्बा, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला स्पाटू, जिला सोलन तथा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टुटीकण्डी, सेंट बीडस कॉलेज संजौली तथा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बलदया, जिला शिमला के लगभग 210 छात्र छात्राओं ने हि.प्र.

विधान सभा सचिवालय पहुँचकर कॉलिस चैम्बर के बाहर हि.प्र. विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां से मुलाकात की। इस अवसर पर विधान सभा अध्यक्ष ने उन्हें संसदीय प्रणाली, देश के अन्दर विद्यमान लोकतांत्रिक व्यवस्था, विधान सभा, लोक सभा तथा राज्य सभा की कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी दी। छात्र छात्राओं को अवगत करवाते हुए पठानियां ने कहा कि बड़े प्रदेशों में विधान परिषदों का भी प्रावधान है। हि.प्र. छोटा राज्य होने के नाते यहाँ पर विधान परिषद नहीं है।

पठानियां ने कहा कि लोक सभा तथा विधान सभा लोकतन्त्र के सबसे बड़े मन्दिर हैं। लोक सभा के लिए जब सांसद सदस्य चुनकर जाते हैं तो वे मिलकर लोक सभा का गठन करते हैं, जिस दल के पास बहुमत होता है वह केन्द्र में सरकार का गठन करता है। सबसे बड़ा दल जिनके पास सरकार बनाने का पर्याप्त बहुमत होता है सबसे पहले अपने नेता का चुनाव करता है तथा वह देश का प्रधानमंत्री बनता है। उसके बाद मंत्री परिषद का गठन होता है जबकि राज्य सभा के सदस्य का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से विधान सभा सदस्यों द्वारा किया जाता है। वर्तमान में लोक सभा सदस्यों की कुल संख्या 543 है जबकि राज्य सभा सदस्यों की कुल संख्या 245 हैं, जिसमें से 233 सदस्य भारत के राज्य तथा केन्द्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करते हैं जबकि 12 सदस्यों को भारत के राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किया जाता है। लोक सभा का कार्यकाल 5 वर्षों का होता है तथा राज्य सभा सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है। राज्य सभा उपरी सदन जबकि लोक सभा निचला सदन कहलाता है।

संवाद के दौरान सैंट बीडस कॉलेज की छात्राओं के साथ बातचीत करते हुए पठानियां ने कहा कि जहाँ आप खड़े हैं इस भवन को कौंसिल चैम्बर कहते हैं। इस भवन का निर्माण कार्य वर्ष 1920 में आरम्भ हुआ था तथा वर्ष 1925 में पूर्ण हुआ था। इसके निर्माण में 5 वर्ष लगे थे तथा इस पर 10 लाख रूपये खर्चा हुआ था। इसका निर्माण तत्कालीन ब्रिटिश सरकार द्वारा कौंसिल चैम्बर के रूप में किया गया था जिसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय असैम्बली के लिए एक समर्पित भवन था। हालांकि फ्रेडरिक व्हाईट राष्ट्रीय असैम्बली के पहले नोमिनेटिड स्पीकर थे लेकिन वर्ष 1925 में विठ्ठल भाई पटेल अपने ब्रिटिश प्रतिद्वन्द्वी को 2 मतों से पराजित कर राष्ट्रीय असैम्बली के इसी सदन में पहले निर्वाचित स्पीकर बने थे। यह भवन कई ऐतिहासिक घटनाओं का गवाह रहा है। महिलाओं को मत देने का अधिकार तथा भारत छोड़ो का प्रस्ताव भी इसी सदन में पारित किया गया था। सदन के अन्दर जिस आसन पर वह बैठते हैं यह कुर्सी भी वर्ष 1925 में वर्मीज सरकार द्वारा तत्कालीन बर्तानिया सरकार को उपहार स्वरूप भेंट की गई थी। पठानियां ने सभी छात्र-छात्राओं को सदन की कार्यवाही देखने के लिए आमंत्रित किया तथा अपनी हार्दिक शुभकामनाएं दी।

Location: शिमला (शिमला)

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