अमृतसर: पंजाब के वरिष्ठ अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को अमृतसर की अदालत से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने FIR नंबर 91 से जुड़े मामले में मजीठिया की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। उनके साथ शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के सदस्य एवं हलका जंडियाला के इंचार्ज जोध सिंह समरा तथा गांव हमजा के सरपंच जतिंदर सिंह साबा को भी जमानत प्रदान की गई।
सुनवाई के बाद अदालत ने सुनाया फैसला
जमानत याचिका पर हाल ही में अदालत में विस्तृत सुनवाई हुई थी। मजीठिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरशदीप सिंह क्लेर और दमनबीर सिंह सोबती ने पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को जमानत देने का आदेश जारी किया।
निकाय चुनाव के बाद दर्ज हुआ था मामला
यह पूरा विवाद 26 मई को हुए नगर निकाय चुनाव के दौरान सामने आया था। आरोप है कि चुनावी रंजिश के चलते मारपीट और आम आदमी पार्टी के एक कार्यकर्ता की सोने की चेन छीनने की घटना हुई। इस मामले में शिरोमणि अकाली दल के पोलिंग एजेंट जोबनप्रीत सिंह के खिलाफ मजीठा थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।
समर्थकों के साथ थाने पहुंचने का आरोप
पुलिस के अनुसार, 30 मई को जोबनप्रीत सिंह की गिरफ्तारी के बाद अगले दिन बिक्रम मजीठिया अपने समर्थकों के साथ मजीठा पुलिस स्टेशन पहुंचे। पुलिस का दावा है कि इस दौरान थाने में हंगामा किया गया, केस से जुड़े दस्तावेज फाड़े गए और हिरासत में मौजूद आरोपी को छुड़ाने की कोशिश की गई।
मजीठिया पर दर्ज हुई FIR-91
इन आरोपों के आधार पर 1 जून को मजीठिया और अन्य लोगों के खिलाफ FIR नंबर 91 दर्ज की गई। पुलिस ने गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित कीं, जबकि मजीठिया ने गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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हाईकोर्ट में भी पहुंचा था मामला
मजीठिया की ओर से दायर याचिका में पुलिस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताया गया था। हाईकोर्ट ने मामले में पंजाब के डीजीपी और अमृतसर ग्रामीण के एसएसपी से जवाब मांगा था। इसी दौरान मजीठिया के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया था। बाद की सुनवाई में राज्य सरकार ने विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
