Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
चंबा: चुराह में 100 फीट गहरी खाई में गिरा भेड़पालक, साथियों ने पीठ पर उठाकर बचाई जान

चंबा: चुराह में 100 फीट गहरी खाई में गिरा भेड़पालक, साथियों ने पीठ पर उठाकर बचाई जान

चंबा: जिले के चुराह क्षेत्र में एक भेड़पालक के साथ हुए हादसे ने हर किसी को हैरान कर दिया।

करीब 100 फीट गहरी खाई में गिरने के बावजूद भेड़पालक की जान बच गई। हादसे के बाद उसके साथियों ने जिस साहस और इंसानियत का परिचय दिया, वह काबिले तारीफ है। घायल साथी को सड़क तक पहुंचाने के लिए उन्होंने उसे अपनी पीठ पर उठाया और कई किलोमीटर का कठिन सफर पैदल तय किया।

घटना की तस्वीरें चुराह क्षेत्र की बताई जा रही हैं। जानकारी के अनुसार भेड़पालकों का एक दल हर वर्ष की तरह इस बार भी लाहौल-स्पीति से अपनी भेड़-बकरियों को लेकर वापस अपने घर लौट रहा था। इसी दौरान दल जब तंगेड़ा नाले के समीप पहुंचा तो अचानक एक भेड़पालक का पैर फिसल गया।

पैर फिसलते ही उसका संतुलन बिगड़ गया और वह पहाड़ी से करीब 100 फीट नीचे गहरी खाई में जा गिरा। हादसे में भेड़पालक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद मौके पर मौजूद उसके साथियों में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन उन्होंने घबराने के बजाय तुरंत घायल साथी को बचाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए।

साथियों ने पीठ पर उठाकर तय किया कई किलोमीटर का सफर

हादसे की गंभीरता के बावजूद घायल को मौके से सड़क तक पहुंचाना आसान नहीं था। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र और रास्ते की कठिन परिस्थितियों के बीच साथियों ने अदम्य साहस दिखाते हुए घायल भेड़पालक को खाई से बाहर निकाला। सड़क तक पहुंचने के लिए कोई आसान रास्ता नहीं होने के कारण साथियों ने घायल को अपनी पीठ पर उठाया और कई किलोमीटर तक पैदल लेकर चले।

इस दौरान उन्होंने न केवल अपने साथी की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया, बल्कि कठिन पहाड़ी परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारी। काफी मशक्कत के बाद घायल भेड़पालक को चांजू पहुंचाया गया, जहां उसे प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद भूमि कंपनी की एंबुलेंस के माध्यम से घायल को बेहतर उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल चंबा भेजा गया।

मुश्किल वक्त में साथियों का हौसला बना जीवन की सबसे बड़ी ताकत

हादसा कितना गंभीर था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भेड़पालक करीब 100 फीट गहरी खाई में जा गिरा था। इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद भी उसका जीवित बचना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर कहावत "जाको राखे साइयां, मार सके ना कोई" को चरितार्थ कर दिया। वहीं, घायल भेड़पालक के साथियों ने जिस तरह अपनी जान की परवाह किए बिना उसे पीठ पर उठाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया, वह इंसानियत और आपसी भाईचारे की मिसाल है।

दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में किसी हादसे के बाद समय पर मदद मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस घटना में साथियों की तत्परता, हिम्मत और सूझबूझ ने घायल को समय पर उपचार तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। यह घटना यह संदेश भी देती है कि मुश्किल वक्त में अपनों का साथ, हौसला और इंसानियत किसी की जिंदगी बचाने की सबसे बड़ी ताकत बन सकते हैं।

Location: शिमला (शिमला)

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Dainiksaveratimes hindi