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मध्य पूर्व संकट के बीच चीन के विकास का "सुरक्षा लाभांश"दुनिया के सामने

इंटरनेशनल डेस्क: 2026 की शुरुआत में हुए घटनाक्रमों के आधार पर, मध्य पूर्व में जारी अस्थिरता ने वास्तव में क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और चीन के औद्योगिक और आर्थिक मॉडल द्वारा प्रदान की गई सापेक्ष स्थिरता के बीच एक अंतर को उजागर किया है।

क्षेत्र में जारी संघर्ष ने न केवल वहां की शांति और स्थिरता को प्रभावित किया है, बल्कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

तेल आपूर्ति मार्गों पर खतरा, समुद्री व्यापार में बाधाएं और बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि भविष्य की स्थिरता किस मॉडल में निहित है। इसी संदर्भ में चीन के विकास मॉडल से मिलने वाला "सुरक्षा लाभांश" आज वैश्विक चर्चा का विषय बन गया है। जहां एक ओर मध्य पूर्व में अस्थिरता के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो रही है, वहीं चीन की औद्योगिक और आपूर्ति शृंखलाएं न केवल मजबूत बनी हुई हैं, बल्कि वैश्विक विनिर्माण में उसकी स्थिति और भी अधिक सुदृढ़ हुई है।

चीन के कारखाने और उत्पादन केंद्र सुचारू रूप से कार्य कर रहे हैं, जिससे दुनिया को भरोसा मिलता है कि एक बड़ी अर्थव्यवस्था स्थिरता बनाए रख सकती है। मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ने के साथ ही दुनिया ने देखा कि युद्ध और अस्थिरता किस प्रकार आर्थिक प्रगति को पीछे धकेल सकती है। कई देशों के शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव बना। इसके विपरीत, चीन ने अपने मजबूत औद्योगिक ढांचे, स्थिर नीतियों और दीर्घकालिक विकास रणनीति के कारण वैश्विक निवेशकों का विश्वास बनाए रखा है।

चीन आज भी दुनिया का सबसे बड़ा विनिर्माण केंद्र बना हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, मशीनरी, सेमीकंडक्टर उपकरण और उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन में उसकी मजबूत पकड़ है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अस्थिरता के बावजूद चीन की औद्योगिक और सप्लाई चेन प्रणाली ने अपनी मजबूती साबित की है। यही कारण है कि दुनिया के कई देश आज भी चीन को विश्वसनीय उत्पादन साझेदार के रूप में देखते हैं।

झटकों से बचाव: चीन की व्यापक औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाएं, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) और नई ऊर्जा के क्षेत्र में, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों से मजबूत बचाव प्रदर्शित करती हैं। विश्वसनीय लॉजिस्टिक्स: जहां एक ओर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे समुद्री मार्गों को जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं चीन द्वारा भूमि-आधारित लॉजिस्टिक्स, जैसे कि चीन-यूरोप रेलवे एक्सप्रेस में किया गया निवेश, एक वैकल्पिक, विश्वसनीय व्यापार मार्ग प्रदान करता है, जिससे वैश्विक लॉजिस्टिक्स दबाव कम होता है। औद्योगिक उत्पादन: वैश्विक मुद्रास्फीति के दबाव के बावजूद, चीन ने 2026 की शुरुआत में औद्योगिक लाभ में मजबूत वृद्धि दर्ज की, जो निरंतर उत्पादन क्षमता का संकेत देती है।

स्वच्छ ऊर्जा में तकनीकी लाभ: चीन के तीन प्रमुख उद्योग इलेक्ट्रिक वाहन, लिथियम बैटरी और सौर ऊर्जा वैश्विक आर्थिक प्रभाव के मुख्य स्तंभ बन रहे हैं, जो विकास के इंजन और ऊर्जा सुरक्षा के साधन दोनों के रूप में कार्य करते हैं। वैश्विक प्रभुत्व: चीन के पास वैश्विक सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता का 80% से अधिक हिस्सा है और उसने 2026 तक अपने ऊर्जा मिश्रण में गैर-जीवाश्म स्रोतों का 63% हिस्सा शामिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। हरित प्रौद्योगिकी निर्यात: इन प्रौद्योगिकियों का निर्यात करके, विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के देशों में, चीन दीर्घकालिक अवसंरचनात्मक निर्भरता का निर्माण कर रहा है जो पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता का एक विकल्प प्रदान करती है।

आरएमबी के अंतर्राष्ट्रीयकरण में तेजी: मध्य पूर्व संघर्ष ने व्यापार निपटान में अमेरिकी डॉलर के विकल्पों की खोज को तेज कर दिया है, जिससे आरएमबी को महत्वपूर्ण लाभ हुआ है। उपयोग में वृद्धि: 2026 की शुरुआत में आरएमबी मूल्य के हिसाब से वैश्विक भुगतानों के लिए 5वीं सबसे सक्रिय मुद्रा बन गई। सीआईपीएस का उपयोग: क्रॉस-बॉर्डर इंटरबैंक पेमेंट सिस्टम (सीआईपीएस) को तेजी से एक समानांतर निपटान आधार के रूप में देखा जा रहा है, जिससे मध्य पूर्व और विश्व स्तर पर आरएमबी को अपनाने में वृद्धि हो रही है।

वैश्विक/क्षेत्रीय प्रभाव में बदलाव: “सुरक्षा लाभांश” राजनीतिक भी है, क्योंकि चीन को पश्चिमी हस्तक्षेप के विपरीत, कूटनीतिक समाधानों की वकालत करने वाले एक “ईमानदार मध्यस्थ” के रूप में देखा जाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चीन की वैश्विक और क्षेत्रीय भूमिका को अब व्यापक मान्यता मिल रही है। चाहे वैश्विक व्यापार हो, जलवायु परिवर्तन का मुद्दा हो या अंतरराष्ट्रीय शांति प्रयास चीन की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है।

मध्य पूर्व संकट के दौरान चीन ने हमेशा संवाद, युद्धविराम और शांतिपूर्ण समाधान की वकालत की है, जिसने उसे एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया है। यह सब चीन की वैश्विक और क्षेत्रीय भूमिका को नई पहचान दे रहा है। मध्य पूर्व संकट के बीच, चीन ने तटस्थता और कूटनीति के माध्यम से जो रुख अपनाया है, उससे उसकी बढ़ती शक्ति और प्रभाव का अंदाजा होता है। अब दुनिया यह मानने लगी है कि चीन का विकास केवल उसके लिए नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए स्थिरता और सुरक्षा का एक मॉडल प्रस्तुत करता है।

2026 की शुरुआत तक, मध्य पूर्व में अस्थिरता एक ऐसे परीक्षण के रूप में काम करती है जो चीन की आर्थिक और विनिर्माण क्षमता को उजागर करती है। स्थिर आपूर्ति श्रृंखलाओं, हरित प्रौद्योगिकी समाधानों और एक वैकल्पिक भुगतान मुद्रा की पेशकश करके, चीन अपनी औद्योगिक शक्ति को क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव में वृद्धि के रूप में सफलतापूर्वक परिवर्तित कर रहा है। मध्य पूर्व की आग ने भले ही दुनिया को झुलसा दिया हो, लेकिन इसने चीन के विकास मॉडल की मजबूती और उसके "सुरक्षा लाभांश" को भी उजागर किया है। चीन आज सिर्फ एक आर्थिक महाशक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता का एक स्तंभ बनता दिख रहा है।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक—देवेंद्र सिंह)

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