नेशनल डेस्क: ईरान, अमेरिका और इज़रायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब आम लोगों की जेब पर भी पड़ने लगा है। अंतरराष्ट्रीय हालात बिगड़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका है।
अगर यही स्थिति जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में रोजमर्रा की चीजें जैसे साबुन, खाने का तेल, सोडा और अन्य जरूरी सामान महंगे हो सकते हैं।
महंगाई बढ़ने के पीछे क्या कारण हैं?
एक रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत बढ़ने और रुपये के कमजोर होने से कंपनियों की लागत लगातार बढ़ रही है, जब कंपनियों के लिए सामान बनाना महंगा हो जाता है, तो वे आमतौर पर इसका बोझ ग्राहकों पर डालती हैं। इसी वजह से FMCG कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं।
कब से बढ़ सकते हैं दाम?
अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) से कंपनियां अपने उत्पादों की कीमतों में करीब 3% से 4% तक बढ़ोतरी कर सकती हैं। हालांकि, अभी वित्त वर्ष 2026 की आखिरी तिमाही में इसका असर ज्यादा दिखाई नहीं देगा, क्योंकि कंपनियों के पास पहले से स्टॉक मौजूद है। लेकिन जैसे-जैसे यह स्टॉक खत्म होगा, नई महंगी लागत के साथ कीमतें बढ़नी शुरू हो जाएंगी।
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कंपनियों के पास कितना स्टॉक होता है?
रिपोर्ट में बताया गया है कि ज्यादातर कंपनियां 30 से 45 दिनों का कच्चा माल और तैयार सामान स्टॉक में रखती हैं। इसका मतलब है कि मौजूदा हालात का असर थोड़ी देरी से बाजार में दिखेगा।
रोजमर्रा की चीजें क्यों होंगी महंगी?
अधिकतर FMCG उत्पादों की पैकेजिंग प्लास्टिक में होती है, जो कच्चे तेल से बनती है। तेल महंगा होगा, तो पैकेजिंग भी महंगी होगी। ट्रांसपोर्ट यानी माल ढुलाई का खर्च बढ़ गया है, क्योंकि डीजल-पेट्रोल महंगे हो रहे हैं। समुद्री रास्तों से सामान लाने का खर्च भी बढ़ गया है, जिसमें जहाज का किराया और बीमा शामिल है। भारत खाने के तेल का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगाता है, इसलिए सप्लाई प्रभावित होने पर खाने का तेल भी महंगा हो सकता है।
आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
अगर कीमतें बढ़ती हैं, तो आम लोगों के लिए घर का खर्च चलाना मुश्किल हो सकता है। खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि उनकी आय सीमित होती है लेकिन खर्च बढ़ जाएगा।
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