अमृतसर: श्री दुर्ग्याणा कमेटी की अध्यक्ष प्रो. लक्ष्मीकांता चावला ने मंदिर के प्रमुख पुजारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता करते हुए धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ समाज में जागरूकता और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
बैठक में श्रद्धालुओं के मार्गदर्शन तथा समाज में व्याप्त कुछ परंपराओं और मान्यताओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए प्रो. चावला ने पुजारियों से अपील की कि वे नई पीढ़ी को धर्म और संस्कृति से जोड़ने का कार्य करें, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि समाज अंधविश्वासों से दूर रहे। उन्होंने कहा कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान ही नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देने का भी केंद्र है। इसलिए पुजारियों की जिम्मेदारी है कि वे श्रद्धालुओं को धर्म के वास्तविक स्वरूप से परिचित कराएं और उन्हें विवेकपूर्ण सोच अपनाने के लिए प्रेरित करें।
उन्होंने बैठक में एक महत्वपूर्ण विषय उठाते हुए कहा कि कई श्रद्धालु किसी मनोकामना पूरी होने या विशेष धार्मिक मान्यता के तहत “लंगूर” बनने के बाद अपने पहने हुए वस्त्र मंदिर में चढ़ा जाते हैं। प्रो. चावला ने सुझाव दिया कि यदि श्रद्धालु चाहें तो इन वस्त्रों को मंदिर में चढ़ाने के बजाय अपने घर में स्मृति के रूप में सुरक्षित रख सकते हैं। उन्होंने पुजारियों से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने और उचित निर्णय लेकर श्रद्धालुओं को सकारात्मक संदेश देने का आग्रह किया।
बैठक में महिलाओं से जुड़ी एक प्रचलित मान्यता पर भी चर्चा हुई। प्रो. चावला ने कहा कि कुछ स्थानों पर महिलाओं को यह कह दिया जाता है कि वे दाहिने हाथ में मौली (रक्षासूत्र) न बांधें। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी मान्यताओं का कोई धार्मिक आधार नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मां दुर्गा स्वयं अपने दाहिने हाथ से राक्षसों का संहार करती हैं। ऐसे में महिलाओं को दाहिने हाथ में मौली न बांधने जैसी बातों को बढ़ावा देना उचित नहीं है।
बैठक में उपस्थित पुजारियों ने सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया। इस दौरान यह भी सहमति बनी कि श्रद्धालुओं तक धर्म के सही संदेश पहुंचाने, सामाजिक जागरूकता बढ़ाने तथा अंधविश्वासों को समाप्त करने के लिए कार्य करेंगे।
