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नेपाल में बाढ़ का कहर: 320 भारतीयों से संपर्क नहीं, MEA बोला- 100 भारतीय मूल के लोग भी लापता

ई दिल्ली: नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ के बाद हालात गंभीर बने हुए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को बताया कि नेपाल में बाढ़ से प्रभावित 320 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पा रहा है।

इसके अलावा करीब 100 भारतीय मूल के लोग भी ऐसे हैं, जिनसे संपर्क नहीं हो सका है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि भारत सरकार नेपाल में फंसे भारतीयों से संपर्क करने और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि लापता लोगों की अलग-अलग सूचियों का मिलान किया जा रहा है। इसलिए लापता लोगों का आंकड़ा आगे बदल सकता है।

21 भारतीय नागरिक दिल्ली पहुंचे

विदेश मंत्रालय ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाके से काठमांडू पहुंचे 21 भारतीय नागरिक शुक्रवार को दिल्ली पहुंच गए हैं। नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने काठमांडू में इन लोगों से मुलाकात कर उनका हाल जाना। जायसवाल ने इसे राहत की खबर बताते हुए कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाके से काठमांडू पहुंचे 21 भारतीय नागरिक अब सुरक्षित दिल्ली पहुंच चुके हैं।

63 भारतीयों को पहले ही बचाया गया

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, त्रिशूली वन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे 63 भारतीय नागरिकों को गुरुवार को बचा लिया गया था। इसके अलावा चीन की तरफ फंसे 96 और भारतीय नागरिक भी जमीन के रास्ते सुरक्षित नेपाल पहुंच गए हैं। अब भारत सरकार इन लोगों को नेपाल से सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश कर रही है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इन 96 लोगों की पूरी जानकारी की पुष्टि होने के बाद और जानकारी साझा की जाएगी।

320 भारतीयों से अभी संपर्क नहीं

रणधीर जायसवाल ने बताया कि फिलहाल 320 भारतीय नागरिक ऐसे हैं, जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है या जो लापता बताए जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि यह अंतिम आंकड़ा नहीं है। अलग-अलग सूचियों का मिलान किया जा रहा है और कई लोगों से संपर्क होने के बाद संख्या कम भी हो सकती है या नए मामलों की जानकारी मिलने पर बढ़ सकती है।

100 भारतीय मूल के लोग भी संपर्क से बाहर

विदेश मंत्रालय के अनुसार करीब 100 भारतीय मूल के लोग भी ऐसे हैं, जिनसे अभी संपर्क नहीं हो पाया है। ये लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे और इनके पास भारत के अलावा दूसरे देशों की नागरिकता है। भारत सरकार इन लोगों की जानकारी जुटाने और उनकी स्थिति का पता लगाने के लिए भी काम कर रही है।

24 घंटे काम कर रहे कंट्रोल रूम

विदेश मंत्रालय ने बताया कि नई दिल्ली में मंत्रालय का कंट्रोल ग्रुप 24 घंटे काम कर रहा है। इसके अलावा काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावासों में भी कंट्रोल ग्रुप सक्रिय हैं। इन टीमों का मुख्य काम प्रभावित भारतीय नागरिकों से संपर्क करना, उनकी स्थिति की जानकारी लेना और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है।

नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही

नेपाल के रसुवा जिले में 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी के इलाके में अचानक आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। बाढ़ के दौरान भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों में पानी, गाद और बड़े-बड़े पत्थरों का तेज बहाव आया, जिससे कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ।नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, आपदा के बाद 538 शव बरामद किए गए हैं, जबकि 977 लोग अभी भी लापता हैं। कम से कम 73 लोगों के घायल होने की भी जानकारी है। राहत और बचाव कार्यों के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है।

भारत-नेपाल के अधिकारी मिलकर कर रहे काम

बाढ़ के बाद भारत और नेपाल के अधिकारी राहत और बचाव अभियान में लगातार तालमेल कर रहे हैं। प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने, लापता लोगों की तलाश करने और भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिशें जारी हैं। इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावासों से नेपाल में चल रहे राहत और बचाव कार्यों को लेकर चर्चा की थी।

जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि भारतीय दूतावासों ने नेपाल में भारतीय नागरिकों की स्थिति और उनकी सुरक्षा को लेकर जानकारी दी है। विदेश मंत्रालय के संबंधित विभाग राहत सामग्री नेपाल भेजने की तैयारियों पर भी काम कर रहे हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि नेपाल में बाढ़ की स्थिति और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भारत सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है।

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