लुधियाना: हलका दक्षिणी में आज भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की 62वीं पुण्यतिथि "पंडित नेहरू की भारत को देन" विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित कर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कृष्ण कुमार बावा, कोऑर्डिनेटर अखिल भारतीय कांग्रेस (ओ.बी.सी) एवं हिमाचल प्रदेश प्रभारी की सरपरस्ती में मनाई गई।
इस अवसर पर प्रो. सतीश शर्मा (पूर्व प्रमुख डी.ए.वी संस्थाएं), प्रदेश कांग्रेस के महासचिव गुरनाम सिंह कलेर, महिला कांग्रेस लुधियाना (देहाती) की अध्यक्ष किरनदीप ग्रेवाल, हरजीत कौर गरचा, उपाध्यक्ष सुशील मल्होत्रा, सुखविंदर सोहल, समाज सेविका मनजीत कौर सरोए, ओ.बी.सी प्रधान वरिंदर भल्ला, जिला प्रधान मास्टर हरिदेव बावा, अमित कुमार, कैप्टन मलकीत सिंह वालिया, बीरपाल सिंह आदि उपस्थित थे।
इस अवसर पर बावा और शर्मा ने कहा कि पंडित जवाहर लाल नेहरू का आदर्शवादी जीवन हमें जीवन के हर क्षेत्र में प्रेरणा देता है। उनका त्याग, सहनशीलता, देशभक्ति, धर्मनिरपेक्ष सोच और भारत को विश्व स्तर का देश बनाने की दूरदर्शी सोच ही उनकी शख्सियत को विश्व में अलग पहचान देती है। उनकी दूरदर्शी सोच की प्रशंसा विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा किया जाना तथा विरोधियों के प्रति उनका मित्रतापूर्ण व्यवहार सराहनीय था। उनकी लिखी किताबें, लेटर फ्रॉम फादर टू हिज डॉटर, "एन ऑटोबायोग्राफी", द डिस्कवरी ऑफ इंडिया, ग्लिम्पसेज ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री, हमें समाज में आगे बढ़ने का रास्ता दिखाती हैं।
उन्होंने भारत में उद्योग के क्षेत्र में भलाई, राउरकेला और दुर्गापुर जैसे बड़े उद्योग स्थापित किए, खेती के क्षेत्र में विश्वविद्यालय बनाए, शिक्षा के क्षेत्र में उच्च स्तरीय संस्थान स्थापित किए, मेडिकल क्षेत्र में पी.जी.आई और एम्स जैसे अस्पताल स्थापित किए तथा खेलों के क्षेत्र में भारत को विश्व स्तर पर सम्मानजनक स्थान दिलाया। भारत की एकता और अखंडता की मजबूती के लिए धर्मनिरपेक्ष सोच को बनाए रखते हुए सभी वर्गों को एक साथ रखना उनके व्यक्तित्व को निखारता है, जबकि आज के नेता समाज को बांटकर कुर्सियों पर कब्जा किए हुए हैं।

बच्चे उन्हें "चाचा नेहरू" कहकर पुकारते थे: बावा
इस अवसर पर बावा ने बताया कि वर्ष 1963 में जब जवाहरलाल नेहरू हलवारा एयरफोर्स स्टेशन से खुली जीप में रायकोट रोड होते हुए रकबा गांव के पास से गुजरे थे, तब सैकड़ों लोग सड़कों पर आकर उनका स्वागत कर रहे थे। बच्चे उन्हें "चाचा नेहरू" कहकर पुकारते थे। उस समय मेरी उम्र लगभग चार वर्ष थी और मुझे तथा हमारे गांव के विसाखा सिंह ग्रेवाल को नेहरू जी ने गोद में उठाया था। उन खुशी भरे पलों का एहसास आज भी होता है, जबकि आज के नेता बुलेटप्रूफ गाड़ियों में निकल जाते हैं।

नेहरू जी ने जैतो मोर्चे में गिरफ्तारी देकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया: कांग्रेस नेता
इस अवसर पर कांग्रेसी नेता ने बताया कि नेहरू जी ने जैतो मोर्चे में गिरफ्तारी देकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया और आजादी की लड़ाई में लंबा समय जेल में बिताया। जेल में लिखी गई उनकी पुत्री इंदिरा गांधी के नाम चिट्ठियां और पुस्तकें बाद में प्रकाशित हुईं। नेहरू जी ने इलाहाबाद स्थित आनंद भवन, जो उनका जन्म स्थान था, देश की जनता को समर्पित कर दिया। आज जरूरत है कि नेता त्याग, सच्चाई, सरलता, स्पष्टता और ईमानदारी का रास्ता अपनाते हुए महान शहीदों की कुर्बानियों को याद करें और भारत को महान देशभक्तों के सपनों का देश बनाएं।

ये रहे मौजूद
इस अवसर पर वीना रानी, परमजीत कौर, विजय लक्ष्मी, जसवीर सिंह, पलविंदर कौर, मनजीत कौर सरोए, परमजीत सिंह सरोए, गगनदीप कौर, ममता रानी, सुखविंदर कौर, गौरवी सरोए, गोबिंद रानी शर्मा, पवन शुक्ला, कृष्णा देवी, जसविंदर कौर, सुमन रानी, बलविंदर कौर, कमलजीत कौर, कुलवीर कौर, संतोष सिंह, सुखदेव सिंह, शिव कुमार, आकाश कुमार आदि उपस्थित थे।

