जालंधर। पश्चिम बंगाल ममता दीदी की सरकार जाती नजर आ रही है। भाजपा को मिल रहे बहुमत ने इन अटकलों पर भी जोर दिया है कि अगले मुख्यमंत्री कौन होगा। इस चर्चा का अंत काफी हद तक शुभेंदु अधिकारी पर आकर होता है।
अभी ये लंबी बहस का विषय है, लेकिन आईये नजर डालते हैं इसके पीछे बन रहे समीकरणों पर।
बंगाल में बड़ा हिंदुत्व चेहरा
यहां ये बात अहम है कि शुभेंदु अधिकारी कुछ ही वर्षों में बड़ा हिंदुत्व चेहरा और सनातन धर्म के रक्षक के नाम पर उभरे हैं। वे समय समय पर ममता सरकार को घेरते भी रहे हैं। इसके अलावा इनकी खासियत ये भी है कि किसी समय में ये ममता दीदी के बहुत विश्वसनीय व्यक्ति थे। ममता से अलग होने के बाद से वे भारतीय जनता पार्टी के बड़े चेहरे के रूप में उभरकर सामने आए।
ममता और अभिषेक पर सीधा प्रहार
शुभेंदु अधिकारी इकलौते ऐसे नेता हैं, जो ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी पर सबसे तीखे और सीधे हमले करते रहे हैं। भ्रष्टाचार, सिंडिकेट राज और भाई-भतीजावाद के खिलाफ उनकी आवाज ने जमीन पर भाजपा कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने का काम किया है। इसलिए ये माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी उन्हें इस काम के ईनाम के रूप में सत्ता सौंप दे।
ममता से दूरी अमित शाह से नजदीकी
चुनाव प्रचार 2026 के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और शुभेंदु अधिकारी की केमिस्ट्री ने बहुत कुछ साफ कर दिया है। शुभेंदु ने कभी ममता बनर्जी को अपना गुरु माना था, लेकिन अब उनके राजनीतिक मार्गदर्शक अमित शाह बन चुके हैं। शाह के साथ मंच साझा करने से लेकर रणनीति बनाने तक, शुभेंदु हर जगह फ्रंट फुट पर नजर आये।
जमीनी स्तर पर पकड़ और संगठन पर नियंत्रण
शुभेंदु अधिकारी न केवल एक फायरब्रांड नेता हैं, बल्कि वे एक कुशल संगठनकर्ता भी हैं। मेदिनीपुर से लेकर उत्तर बंगाल तक, पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में उनकी भूमिका अहम रही है। भाजपा आलाकमान ने अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी नाम का ऐलान नहीं किया है. पार्टी के भीतर दिलीप घोष जैसे अन्य दिग्गज भी हैं, लेकिन मौजूदा माहौल और अमित शाह के संकेतों को देखें, तो शुभेंदु अधिकारी का पलड़ा सबसे भारी दिख रहा है। अमित शाह ने चुनाव के दौरान बार-बार एक ही बात दोहरायी- बंगाल का मुख्यमंत्री बंगाल का कोई धरती पुत्र ही बनेगा।
