विगत पचहत्तर वर्षों में चीन सरकार ने शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश के विकास में भारी खर्च किया है। विशेषकर बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक कार्यों पर अब तक चीन सरकार खरबों युआन यानी कई अरब अमेरिकी डॉलर ना सिर्फ खर्च कर चुकी है , बल्कि उसने निवेश भी किए।
इससे शीत्सांग की स्थिति पहले की तुलना में बहुत अच्छी हो गई है। चीन सरकार ने अपनी 14वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान 2021 से 2025 के बीच शीत्सांग में बुनियादी ढांचा विकास, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों की आजीविका को बढ़ावा देने के लिए 4 खरब से अधिक युआन का भारी निवेश किया। इससे शीत्सांग की स्थिति में काफी बदलाव दिखने लगा है। स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ा है और लोगों की जीवन प्रत्याशा में भी बढ़ोत्तरी हुई है।
शीत्सांग में सड़क और रेलवे नेटवर्क पर भी चीन ने भारी खर्च किया है। शीत्सांग में कई इलाके पूरे साल बर्फ से ढंके रहते हैं। इस भारी निवेश के चलते अब शीत्सांग के कई इलाकों में तेज गति से परिवहन संभव हो पाया है। एक आंकड़े के अनुसार, 1953 से 2023 के बीच सिर्फ शीत्सांग में राजमार्ग परिवहन के मद में ही चीन ने कुल 325 अरब युआन का निवेश किया। इसके अलावा, सछ्वान– शीत्सांग रेलवे जैसी बड़ी परियोजनाओं के लिए 3 खरब से अधिक युआन तक के निवेश की योजना बनाई गई है।
शीत्सांग में कई नदियां हैं। इसी वजह से इसे एशिया का वाटर टावर भी कहा जाता है। यहां की यारलुंग त्सांगपो मशहूर नदी हैं। इस पर दुनिया का सबसे बड़ा पनबिजली संयंत्र बनाने की शुरुआत की गई है, जिस पर चीन सरकार की ओर से 12 खरब डॉलर युआन से अधिक का निवेश किया जा रहा है। इस निवेश के बाद जहां चीन और शीत्सांग में बिजली की भारी आपूर्ति हो सकेगी, वहीं लोगों को काफी संख्या में रोजगार मिल सकेगा। इस बांध से रोके गए पानी का इस्तेमाल जहां कृषि और पेयजल के लिए होगा, वहीं कठिन स्थितियों में बाढ़ पर भी लगाम लगाई जा सकेगी। चीन के एक अखबार इकोनॉमिक डेली के अनुसार, चीन सरकार ने शीत्सांग में खनन और पर्यटन के अलावा, उच्च गुणवत्ता वाली कृषि और सौर ग्रीनहाउस स्थापित करने के लिए भी करोड़ों का निवेश किया है। ल्हासा और अन्य प्रमुख शहरों में आधुनिक अस्पताल, स्कूल, बिजली ग्रिड और 5G दूरसंचार नेटवर्क जैसी आधुनिक सुविधाएं स्थापित की गई हैं।
विकास के चलते शीत्सांग में 1959 की तुलना में सड़क नेटवर्क कई गुना बढ़कर एक लाख 20 हजार किलोमीटर से अधिक हो गया है। इसके अलावा, ‘ छिनहाई– शीत्सांग रेलवे‘ और अन्य हाई-स्पीड रेल मार्गों ने ल्हासा को चीन के प्रमुख शहरों से जोड़ा जा चुका है। छिनहाई- शीत्सांग रेलवे की रेल पटरियां दुनिया की सबसे ऊंची पटरियों में है। शीत्सांग में ल्हासा गोंगर एयरपोर्ट सहित कई आधुनिक हवाई अड्डों का निर्माण किया जा चुका है, इससे शीत्सांग की एयरकनेक्टिविटी भी पहले की तुलना में बेहतर हो गई है।
लगातार जारी निवेश की वजह से शीत्सांग की जीडीपी में भी तेज विकास दिख रहा है। शीत्सांग की अर्थव्यवस्था में कृषि से इतर आधुनिक उद्योगों और ‘तृतीयक उद्योगों‘, जिसमें सेवा क्षेत्र भी शामिल है, का भी बड़ा योगदान है। शीत्सांग की भूमि संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य की भूमि है। इसकी वजह से यहां के सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्व वाली जगहों का बड़ा आकर्षण है। इसके चलते यहाँ की आर्थिकी का मुख्य स्तंभ पर्यटन बन गया है। चीन सरकार के आंकड़ों के अऩुसार, शीत्सांग की जीडीपी में पर्यटन की हिस्सेदारी तकरीबन एक तिहाई है। इसकी वजह शीत्सांग आ रहे सैलानियों की संख्या में भारी उछाल है। शीत्सांग में हाल के दिनों में सैलानियों की संख्या में भारी उछाल आया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2023 में तिब्बत में कुल 55.17 मिलियन यानी 5.5 करोड़ से अधिक घरेलू और विदेशी पर्यटक आए। इनमें से अधिकांश पर्यटक चीन के घरेलू पर्यटक रहे। शीत्सांग को कई पवित्र झीलों, मसलन, यामद्रोक झील और नामत्सो झील के लिए भी जाना जाता है। यहां दुनिया भर के पर्यटकों को आना-जाना लगा रहता है। शीत्सांग के लाखों लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला जा चुका है। चीन सरकार के आंकड़ों के अनुसार, यहां स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ने की वजह से जीवन प्रत्याशा में जबरदस्त वृद्धि हुई है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— उमेश चतुर्वेदी)
