नई दिल्ली। कल यानी कि रविवार 31 मई को भारतीय सिने प्रेमियों ने एक और सितारा खो दिया। लता दी के बाद इनका जाना फिल्म जगत और संगीत प्रेमियों के लिए भारी क्षति है। 'आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे' और 'तुमने पुकारा और हम चले आए' जैसे अनगिनत सदाबहार गानों को जादुई आवाज देने वाली पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर हमेशा के लिए शांत हो गई, लेकिन उनके गाए गीत हमेशा गूंजते रहेंगे।
कुछ दिनों से सुन रहीं थीं अपने ही गीत
सुमन कल्याण 89 वर्ष की थीं और पिछले कुछ समय से बीमारियों से जूझ रही थीं। 1960 और 70 के दशक में लता मंगेशकर के दौर में संगीत जगत में अपनी एक अलग और अमिट पहचान बनाने वाली सुमन ने हिंदी के अलावा मराठी, बंगाली और कन्नड़ सहित कई भाषाओं में सैकड़ों यादगार गीत गाए। गायिका पर प्रशंसित मराठी जीवनी ‘सुमन सुगंध’ लिखने वाली मंगला खाडिलकर ने PTI को बताया कि सुमन जी का निधन रात करीब आठ बजे लोखंडवाला स्थित उनके घर पर हुआ। उनका निधन शांतिपूर्ण रहा। पिछले कुछ दिनों से वह अपने ही गाने सुन रही थीं।
ना-ना करते प्यार तुम्ही से… से पाई लोकप्रियता
कल्याणपुर ने 1960 और 1970 के दशक के बीच अपनी सुरीली आवाज़ से काफी लोकप्रियता हासिल की। उन्होंने उस समय की शीर्ष गायिका लता मंगेशकर के साथ-साथ अपनी एक खास जगह बनाई। कल्याणपुर के कुछ लोकप्रिय गाने हैं आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे, ना ना करते प्यार तुम्हीं से, तुमने पुकारा और हम चले आए और कई अन्य। उन्होंने हिंदी, मराठी, असमिया, कन्नड़, बंगाली, उड़िया और अन्य सहित कई भाषाओं में गाने गाए।
लता मंगेशकर मानती थी करीबी दोस्त
उन्होंने भक्ति गीत, गज़लें और ठुमरियां भी गाईं। हालांकि कई लोग उनकी आवाज़ की तुलना दिग्गज गायिका लता मंगेशकर से करते थे, लेकिन कल्याणपुर ने हमेशा इस तुलना को खारिज किया। PTI को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने मंगेशकर को एक करीबी दोस्त बताया। उस समय कहा था कि हर कोई उनके गानों को पसंद करता था, और वह अमर रहेंगी। हमने फिल्म ‘चांद’ के लिए एक साथ एक युगल गीत रिकॉर्ड किया था। जब भी मैं उनसे मिलती थी, तो ऐसा लगता था जैसे मैं किसी करीबी दोस्त से मिल रही हूं। मेरा मानना है कि उन्हें भी ऐसा ही महसूस होता था। कल्याणपुर का अंतिम संस्कार सोमवार को सुबह करीब 11.30 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच पवन हंस श्मशान घाट पर किया जाएगा। गायिका के परिवार में उनकी बेटी चारू हैं।
ये पांच गाने उनके सबसे प्रसिद्ध एकल प्रदर्शनों में से एक हैं, कल्याणपुर की संगीत यात्रा उनसे कहीं आगे तक फैली है। उन्होंने बात एक रात की से ना तुम हमीं जानो, शगुन से बुझा दिए हैं खुद अपने हाथों, रेशम की डोरी से बहना ने भाई की कलाई से प्यार बांधा है, दगाबाजी पिया तेरे दिल में है, दिल गम से जल रहा है और फूलों का गजरा ये सोलह सिंगार हो जैसे अविस्मरणीय ट्रैक में भी अपनी आवाज दी।
1. यूं ही दिल ने चाहा था (दिल ही तो है, 1963)
रोशन की कंपोजिंग और साहिर लुधियानवी का लिखा यह गीत सुमन कल्याणपुर की मधुर गायकी के बेहतरीन गीतों में से एक है। इसकी लय कोमल और रोमांटिक है, जो उनकी आवाज को खूबसूरती से निखारती है। दशकों बाद भी, यह गीत क्लासिक हिंदी फिल्म संगीत प्रेमियों के दिलों में बसा हुआ है।
2. मेरे मेहबूब ना जा (नूरमहल, 1965)
जानी बाबू कव्वाल द्वारा बनाया गए इस गाने में कल्याणपुर की आवाज में तड़प और दिल टूटने के दर्द को सहजता से व्यक्त करने की क्षमता झलकती है। यह गाना अपने इमोशल बोल और गायक की इमोशनल पेशकश से फेमस हुआ था।
3. शराबी शराबी ये सावन का मौसम (नूरजहाँ, 1967)
रोशन की एक और यादगार कंपोजिंग, इस गाने ने मधुर धुन और साहिर लुधियानवी के शब्दों के जरिए मानसून के मौसम की सुंदरता को बखूबी कैद किया। सुमन की मधुर आवाज ने गीत को यादगार बना दिया।
4. अपने पिया की मैं तो बनी रे जोगनिया (कन कण में भगवान, 1965)
शिवराम का कंपोजिंग गीत, भक्ति और अर्ध-शास्त्रीय संगीत पर कल्याणपुर की महारत को पेश करता है। उनकी आवाज में भक्ति और कोमलता दोनों समाहित हैं, जो इस गीत को उनके विशाल संगीत संग्रह में एक विशिष्ट स्थान दिलाती है।
5. छोड़ो छोड़ो मोरी बइयां (मियां बीवी राजी, 1960)
एसडी बर्मन के कंपोजिंग में यह गीत सुमन कल्याणपुर की सादगी और आकर्षण को दर्शाता है, जिसने उन्हें इतना लोकप्रिय गायिका बनाया। उनकी सहज गायन शैली और शास्त्रीय संगीत की गहरी समझ इस रचना को और भी उत्कृष्ट बनाती है और इसे आज भी यादगार बनाए रखती है।
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