एंटरटेनमेंट डेस्क: किसी भी इंसान की ज़िंदगी में कॉलेज का पहला दिन सिर्फ एक नई शुरुआत नहीं होता, बल्कि खुद को नए सिरे से पहचानने का सफर भी होता है।
'ये फितूर तेरा' इसी एहसास को अपनी कहानी का आधार बनाता है, जहां एक छोटे शहर की लड़की सौम्या पहली बार अपने घर की सुरक्षित दुनिया से निकलकर एक को-एड कॉलेज की नई और अनजान दुनिया में कदम रखती है।
उसके लिए यह सिर्फ पढ़ाई की शुरुआत नहीं, बल्कि उन अनुभवों से गुजरने का मौका है, जिनसे वह अब तक दूर रही है।
सौम्या एक ऐसी लड़की है जो सपने तो बड़े देखती है, लेकिन दुनिया को लेकर उसके मन में कई सवाल और डर हैं। नए लोग, नए रिश्ते और कॉलेज की खुली सोच वाली दुनिया उसके लिए किसी नए अनुभव से कम नहीं है।
इसी बीच उसकी मुलाकात होती है जीत से, जो उसके बिल्कुल उलट है। जीत आत्मविश्वासी, बेपरवाह और अपनी शर्तों पर जीने वाला लड़का है। दोनों की सोच और व्यक्तित्व में जमीन-आसमान का फर्क है, लेकिन यही अंतर उनकी कहानी को खास बनाता है।
शो की सबसे बड़ी खासियत इसका कॉलेज वाला माहौल है, जो आज के युवाओं की यादों और भावनाओं से जुड़ता है। दोस्तों के साथ मस्ती, कैंटीन की बातें, पहली दोस्ती, पहली पसंद और वो छोटे-छोटे पल जो जिंदगी भर याद रहते हैं, ‘ये फितूर तेरा’ इन्हीं एहसासों को खूबसूरती से पेश करता है।

शो का म्यूज़िक भी इसकी कहानी का अहम हिस्सा बनकर सामने आता है। अमित त्रिवेदी का कंपोज़ किया हुआ ‘फील बनाते हैं’ इसी युवा ऊर्जा को सेलिब्रेट करता है। गाने की फ्रेश धुन, “चल ना रील बनाते हैं” जैसी कैची लाइन और कॉलेज वाली बेफिक्री इसे आज की जनरेशन से जोड़ती है।
इशान धवन ने जीत के किरदार में एक अलग तरह की इंटेंसिटी दिखाई है, जबकि देबचंद्रिमा सिंघा रॉय ने सौम्या की मासूमियत और झिझक को बेहद सहज तरीके से निभाया है। दोनों किरदारों के बीच का अंतर ही उनकी केमिस्ट्री को दिलचस्प बनाता है।
‘ये फितूर तेरा’ सिर्फ एक लव स्टोरी नहीं, बल्कि उस सफर की कहानी है जहां एक लड़की अपनी सीमाओं से बाहर निकलकर खुद को खोजने की कोशिश करती है। कॉलेज की नई दुनिया, पहली मोहब्बत और अनजान रिश्तों के बीच सौम्या और जीत की कहानी दर्शकों को आगे की यात्रा के लिए उत्सुक बनाती है।
रेटिंग: 3/5

