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सीजीटीएन सर्वेः चीनी जीडीपी 1400 खरब युआन से अधिक, अनिश्चित दुनिया में चीन सबसे बड़ी निश्चितता के रूप में उभरा

पूरे वर्ष के लिए चीन का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 1401.879 खरब युआन तक पहुंच गया, जो स्थिर कीमतों पर वर्ष 2024 की तुलना में 5 प्रतिशत की वृद्धि है। चीन की 2025 की आर्थिक 'रिपोर्ट' ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूती प्रदान की है, जो अभी भी मंदी के दौर से गुजर रही है।

लचीलापन आत्मविश्वास को मजबूत करता है, परिवर्तन अवसर लाता है, और चीन के उच्च-गुणवत्ता वाले विकास का “स्वर्ण तत्व” लगातार बढ़ रहा है।

चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) के अधीनस्थ चाइना ग्लोबल टेलीविज़न नेटवर्क (सीजीटीएन) द्वारा किए गए एक वैश्विक सर्वेक्षण के अनुसार, 82.6 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि चीन का उच्च-गुणवत्तापूर्ण आर्थिक विकास का दृष्टिकोण वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय कर रहा है।

वर्ष 2025 में, विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में, चीन के कुल आयात और निर्यात व्यापार का मूल्य 450 खरब युआन से अधिक हो गया, जो बढ़ते संरक्षणवाद और आर्थिक वैश्वीकरण में आई बाधाओं के बावजूद लगातार 9वें वर्ष वृद्धि दर्शाता है। सर्वेक्षण से पता चलता है कि 86.6 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि चीन का लगातार विस्तारित और उन्नत होता विशाल बाज़ार अन्य देशों के लिए विकास के अधिक अवसर प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, 83.6 प्रतिशत उत्तरदाता इस बात से सहमत हैं कि “15वीं पंचवर्षीय योजना” (2026-2030) में उच्च स्तरीय खुलेपन को बढ़ावा देने के उपाय निर्धारित किए गए हैं, जो एक बार फिर यह दर्शाता है कि चीन आर्थिक वैश्वीकरण का दृढ़ समर्थक और बहुपक्षवाद का अडिग रक्षक बना हुआ है।

हाल ही में, विश्व आर्थिक मंच ने “2026 वैश्विक जोखिम रिपोर्ट” जारी की, जिसमें कहा गया है कि वैश्विक भू-राजनीतिक और आर्थिक जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं। सर्वेक्षण में, 89.3 प्रतिशत उत्तरदाताओं के विचार में, “भू-आर्थिक टकराव” और “राष्ट्रों के बीच सशस्त्र संघर्ष” वर्तमान में विश्व अर्थव्यवस्था के सामने सबसे बड़ी अनिश्चितताएं और चुनौतियां हैं। यह उल्लेखनीय है कि चीन की आर्थिक उपलब्धियाँ वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, कई अर्थव्यवस्थाओं में सुस्त विकास और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा विश्व स्तर पर छेड़े गए व्यापार युद्धों के बीच हासिल की गई हैं।

सर्वेक्षण में 85.2 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि एकतरफावाद और संरक्षणवाद की प्रथाओं के विभिन्न रूप न केवल विश्व अर्थव्यवस्था की संरचनात्मक चुनौतियों का समाधान करने में विफल हैं, बल्कि वैश्विक आर्थिक सुधार की नींव को भी नष्ट करते हैं। वहीं, 93.2 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने टैरिफ को एक हथियार के रूप में बार-बार इस्तेमाल करने के लिए अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि यह अपने और वैश्विक आर्थिक विकास की संभावनाओं को कम करने वाला सबसे बड़ा “जोखिम का स्रोत” बन गया है। इसके अतिरिक्त, 85.9 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने माना कि “अमेरिका फर्स्ट” के सिद्धांत के तहत एकतरफा दादागिरी वाली कार्रवाइयाँ आर्थिक वैश्वीकरण को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं।

19 से 23 जनवरी तक, स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित हो रहे विश्व आर्थिक मंच के 2026 वार्षिक सम्मेलन का विषय “संवाद की भावना” रखा गया है, जिसमें देशों से संवाद के माध्यम से वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली संरचनात्मक चुनौतियों का समाधान करने का आह्वान किया गया है।

सर्वे में 83.4 प्रतिशत लोगों ने कहा कि व्यापार संरक्षणवाद और वैश्वीकरण विरोधी सोच का मुकाबला करने के लिए देशों को आपसी बातचीत और सहयोग बढ़ाना चाहिए। 84.1 प्रतिशत का मानना है कि ग्लोबल साउथ के देश अब बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था को मजबूत करने और ज्यादा न्यायपूर्ण वैश्वीकरण में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वहीं 96.3 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि देशों को व्यापार में विविधता और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाकर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना चाहिए।

यह सर्वे सीजीटीएन के अंग्रेजी, स्पेनिश, फ्रेंच, अरबी और रूसी प्लेटफार्म पर जारी किया गया था। 24 घंटे के भीतर 10,044 लोगों ने इसमें हिस्सा लेकर अपनी राय दी।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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