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ईद उल अजहा पर मौलाना मुमताज अहमद कासमी और सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने दिया भाईचारे का संदेश

ईद उल अजहा पर मौलाना मुमताज अहमद कासमी और सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने दिया भाईचारे का संदेश

नई दिल्ली। ईद उल अजहा (बकरीद) के अवसर पर प्रमुख धार्मिक नेताओं ने इंसानियत, त्याग, भाईचारे और शांति का संदेश दिया। मौलाना मुमताज अहमद कासमी ने कहा कि इस्लाम का सबसे बड़ा संदेश 'तौहीद' है, जबकि अजमेर शरीफ के सज्जादानशीन सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने भारत की साझा संस्कृति और सद्भाव की अपील की।

मौलाना मुमताज अहमद कासमी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "इस्लाम में सबसे बड़ा संदेश तौहीद का है, यानी अल्लाह को एक मानना और उसी की इबादत करना। हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भी यही शिक्षा दी कि अल्लाह एक है।"

मौलाना कासमी ने कुर्बानी की सच्ची व्याख्या करते हुए कहा, "ईद उल अजहा पर दी जाने वाली कुर्बानी केवल जानवरों तक सीमित नहीं है। असली कुर्बानी तो इंसान के अंदर त्याग और समर्पण की भावना पैदा करना है। हमें देश, प्रदेश और पूरी इंसानियत के लिए कुर्बानी देने वाला बनना चाहिए।"

उन्होंने लोगों से अपील की कि समाज में नफरत और दूरियों को खत्म करें और आपसी मेल-मोहब्बत और भाईचारे के साथ त्योहार मनाएं। ईद उल अजहा का सबसे बड़ा संदेश इंसानियत, एकता और प्रेम है।

अजमेर शरीफ के सज्जादानशीन और ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल के चेयरमैन सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने ईद-उल-अजहा की मुबारकबाद देते हुए कहा, "मैं पूरे देशवासियों को शुभकामनाएं देता हूं। भारत की असली ताकत इसी में है कि यहां सभी धर्मों के लोग एक-दूसरे के त्योहार मिलकर मनाते हैं।"

सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने पूरी दुनिया को ईद की मुबारकबाद देते हुए कहा कि सभी को जारी किए गए निर्देशों का पालन करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया, "ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे दूसरे नागरिकों की भावनाओं को ठेस पहुंचे। कुर्बानी केवल उन्हीं जानवरों की दी जानी चाहिए जिनकी अनुमति है।"

उन्होंने शांति, सद्भाव और दुनिया भर में चल रहे संघर्षों के खात्मे के लिए दुआ की। साथ ही लोगों से स्वच्छता बनाए रखते हुए भाईचारे के साथ त्योहार मनाने की अपील की।

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