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नेतन्याहू के 'भारत के समर्थन' वाले दावे पर कांग्रेस का पलटवार, जयराम रमेश बोले- पीएम मोदी की चुप्पी देश के मूल्यों के अनुरूप नहीं

नेतन्याहू के 'भारत के समर्थन' वाले दावे पर कांग्रेस का पलटवार, जयराम रमेश बोले- पीएम मोदी की चुप्पी देश के मूल्यों के अनुरूप नहीं

ई दिल्ली: इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू द्वारा भारत से समर्थन मिलने का दावा किए जाने के बाद देश में राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस बयान को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि नेतन्याहू का यह दावा सही नहीं है कि पूरा भारत इस्राइल के साथ खड़ा है। उनके अनुसार, भारत की जनता और देश की ऐतिहासिक विदेश नीति को किसी एक राजनीतिक रुख से नहीं जोड़ा जा सकता।

जयराम रमेश बोले- भारत की परंपरा शांति और न्याय की

सोमवार को सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में जयराम रमेश ने कहा कि इस्राइल की सैन्य कार्रवाइयों पर प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी भारत की सभ्यतागत विरासत और नैतिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान हमेशा शांति, न्याय और मानवीय मूल्यों का समर्थन करने वाले देश के रूप में रही है। ऐसे में मौजूदा पश्चिम एशिया संकट पर सरकार का रुख कई सवाल खड़े करता है।

'भारत का समर्थन' वाला दावा बताया गलत

कांग्रेस नेता ने कहा कि नेतन्याहू का यह कहना कि भारत इस्राइल के साथ खड़ा है, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भले ही प्रधानमंत्री मोदी का झुकाव इस्राइल की ओर दिखाई देता हो, लेकिन देश के करोड़ों नागरिक गाजा में जारी हिंसा, फलस्तीनी नागरिकों के विस्थापन, ईरान पर हमलों और दक्षिणी लेबनान में इस्राइली सैन्य अभियानों को लेकर चिंता व्यक्त करते हैं। रमेश के अनुसार, इन घटनाओं को केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं बल्कि मानवता से जुड़े गंभीर मुद्दों के रूप में देखा जाना चाहिए।

नेतन्याहू पर भी साधा निशाना

जयराम रमेश ने अपने बयान में बेंजमिन नेतन्याहू की अंतरराष्ट्रीय छवि पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नेतन्याहू कई देशों में आलोचना का सामना कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ते दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि अमेरिका के भीतर भी उनके नेतृत्व और नीतियों को लेकर असंतोष देखने को मिल रहा है। ऐसे में उनके समर्थन को किसी उपलब्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

क्या कहा था नेतन्याहू ने?

दरअसल, बेंजमिन नेतन्याहू ने एक अमेरिकी समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा था कि इस्राइल को केवल अमेरिका का ही नहीं, बल्कि भारत जैसे महत्वपूर्ण देशों का भी समर्थन प्राप्त है। उन्होंने भारत को 1.4 अरब आबादी वाला बड़ा लोकतांत्रिक देश बताते हुए कहा कि वहां से उन्हें व्यापक समर्थन मिलता है। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, विशेषकर फेसबुक पर, उन्हें भारत से बड़ी संख्या में समर्थन संदेश प्राप्त होते हैं।

जेडी वेंस की टिप्पणी के बाद आया था जवाब

नेतन्याहू की यह टिप्पणी अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के हालिया बयान के बाद सामने आई। पिछले महीने वेंस ने कहा था कि यदि इस्राइल अमेरिकी नीतियों की आलोचना करता है, तो उसे यह ध्यान रखना चाहिए कि अमेरिका उसका सबसे बड़ा और प्रभावशाली सहयोगी है। इसी संदर्भ में नेतन्याहू ने अपने साक्षात्कार में अमेरिका के अलावा भारत सहित अन्य देशों के समर्थन का उल्लेख किया था।

विदेश नीति को लेकर बढ़ी राजनीतिक बहस

नेतन्याहू के बयान के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार की विदेश नीति और पश्चिम एशिया संकट पर भारत के रुख को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि भारत की पारंपरिक विदेश नीति संतुलित और बहुपक्षीय रही है, इसलिए किसी एक पक्ष के समर्थन का संदेश नहीं जाना चाहिए। वहीं, इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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