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नीना मल्होत्रा पहुंची सूरीनाम दूतावास, पूर्व राष्ट्रपति संतोखी के निधन पर किया शोक व्यक्त

नीना मल्होत्रा पहुंची सूरीनाम दूतावास, पूर्व राष्ट्रपति संतोखी के निधन पर किया शोक व्यक्त

ई दिल्ली। विदेश मंत्रालय की सचिव (दक्षिण) डॉ. नीना मल्होत्रा ने सूरीनाम के दूतावास का दौरा कर वहां रखी गई शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए और पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोखी के निधन पर भारत की ओर से गहरा शोक व्यक्त किया।

डॉ. मल्होत्रा ने भारत के लोगों और सरकार की ओर से अपनी संवेदनाएं प्रकट करते हुए दिवंगत नेता के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की।

संतोखी के निधन को सूरीनाम के लिए एक बड़ी क्षति बताया जा रहा है। उनके कार्यकाल में देश ने कई महत्वपूर्ण नीतिगत पहलें देखीं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने सूरीनाम की पहचान को मजबूत किया। भारत और सूरीनाम के बीच द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने में भी उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है।

लघु भारत कहे जाने वाले दक्षिण अमेरिका के टापू देश सूरीनाम के भोजपुरी भाषी संतोखी का 30 मार्च को निधन हो गया था। वह 67 वर्ष के थे। संतोखी को भारतीय जड़ों से गहरा लगाव था और वैश्विक स्तर पर इसी के बूते अपनी पहचान बनाए रखी थी।

उनके कार्यकाल में भारत-सूरीनाम संबंध सांस्कृतिक, आर्थिक और कूटनीतिक रूप से मजबूत हुए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की सूरीनाम यात्रा और संतोखी की भारत यात्रा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात इसका प्रमाण है। उनके निधन पर प्रधानमंत्री मोदी ने भी शोक व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री ने कहा, "मुझे उनके साथ हुई कई मुलाकातें अच्छी तरह याद हैं। सूरीनाम के लिए उनकी बिना थके सेवा और भारत-सूरीनाम के संबंधों को मजबूत करने की उनकी कोशिशें हमारी बातचीत में साफ दिखती थीं। उन्हें भारतीय संस्कृति से खास लगाव था। जब उन्होंने संस्कृत में शपथ ली तो उन्होंने कई लोगों का दिल जीत लिया।"

पीएम मोदी ने सूरीनाम वासियों के प्रति संवेदना जताते हुए कहा, "इस दुख की घड़ी में मैं उनके परिवार और सूरीनाम के लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं।" प्रधानमंत्री ने दिवंगत नेता के साथ अपनी पिछली मुलाकातों की तस्वीरें भी शेयर कीं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सूरीनाम के पूर्व राष्ट्रपति का सोमवार को अचानक निधन हो गया। देश की वर्तमान राष्ट्रपति जेनिफर सिमंस ने 67 वर्ष के संतोखी के निधन की पुष्टि की। संतोखी 2020 से 2025 तक राष्ट्रपति के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे। वह प्रोग्रेसिव रिफॉर्म पार्टी के नेता भी थे और इससे पहले देश में न्यायिक मंत्री का पद संभाल चुके थे।

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