दिव्य हिमाचल ब्यूरो - शिमला
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि आने वाले समय में पुलिस विभाग में कई परिवर्तन किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह उच्च अधिकारियों के पदों को कम करने की सोच रहे हैं।
इतने सारे डीजीपी हैं, इतने सारे एडीजीपी हैं। काम एक ही है, इसलिए इसको लेकर उन्होंने गत सोमवार को नए मुख्य सचिव केके पंत और डीजीपी से भी बात की है। आईएएस, आईपीएस और आईएफएस कैडर में भी कमी की जा रही है। मुख्यमंत्री पुलिस में कार्यरत पूर्व सैनिकों के लिए मंगलवार को ओक ओवर में आयोजित एक समारोह के दौरान बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पहले ही आईएफएस के 117 पदों में से 86 पद कम कर दिए हैं। आईएएस ऑफिसर थोड़ी स्ट्रांग लॉबी रखते हैं, इसलिए उनके पद भी 153 से 147 किए हैं। उसको लेकर भी मैंने कहा है कि इतनी जरूरत नहीं है। छोटा सा प्रदेश है। बड़े पदों पर बहुत ज्यादा रेगुलेशंस इम्प्लीमेंट कर देते हैं, बहुत ज्यादा पोस्ट क्रिएट कर देते हैं, जबकि कार्य एक ही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस मैंडेट को हमने कई भागों में बांट दिया है।
कोरिलेटेड मैंडेट को भी कई भागों में बांट दिया गया है। सिर्फ पोस्ट क्रिएट करके अधिकारियों की फौज ज्यादा हो गई है। पुलिस में ठीक है, लेकिन कर्मचारियों की फौज कम हो गई है। सीएम ने कहा कि निचले स्तर पर ज्यादा भर्ती करेंगे, ज्यादा काम करेंगे। यह सब आपसी मेलजोल से होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा भारतीय सेना में अग्निवीर योजना लागू किए जाने से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सीमित हुए हैं। हमीरपुर, ऊना, कांगड़ा और बिलासपुर की पहचान हमेशा वीर जवानों की धरती के रूप में रही है। अग्निवीर योजना के कारण अनेक युवाओं के सपनों और आकांक्षाओं को ठेस पहुंची है, जिससे उनमें निराशा का माहौल है। सीएम ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और सामथ्र्य को अवसरों के अभाव में व्यर्थ नहीं जाने दिया जा सकता, इसलिए हिमाचल प्रदेश पुलिस में रोजगार के नए द्वार खोले जा रहे हैं। हाल ही में 1,000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी की गई है। 800 और पदों पर भर्ती की जा रही है। साथ ही 700 होमगार्ड जवानों की भर्ती भी की जाएगी। होमगार्ड भर्ती लगभग 15 वर्षों बाद होने जा रही है।
किसी प्रलोभन या दबाव में न आए पुलिस
मुख्यमंत्री ने पुलिस जवानों से कहा कि कुछ लोग प्रलोभन, दबाव या अपने प्रभाव का उपयोग कर हिमाचल प्रदेश पुलिस एवं भूतपूर्व सैनिकों की ईमानदारी को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं। ऐसे किसी भी प्रलोभन या दबाव के आगे न झुकें, न झांसे में आएं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 218 के तहत पहले कानूनी संरक्षण केवल वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को प्राप्त था, लेकिन राज्य सरकार ने अब कठिन और प्रतिकूल परिस्थितियों में कार्य करने वाले पुलिस कर्मियों तक भी यह संरक्षण विस्तारित कर दिया है। सरकार अनुचित दबाव डालने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करेगी। इस बारे में कानूनी प्रावधान सरकार ने किया है।

