जालंधर के स्टार अस्पताल के सीनियर सर्जन डा. आहलूवालिया बोले, चीर-फाड़ से मिलेगी निजात
अगर आप बवासीर, फिस्टुला, फिशर या वेरीकोज वेन्स से परेशान हैं, तो आपके लिए यह एक बहुत बड़ी खबर है कि अब इन बीमारियों का इलाज लेजर द्वारा किया जा सकता है। यह जानकारी 'स्टार अस्पताल' जालंधर के सीनियर सर्जन डा. जसमीत सिंह आहलूवालिया ने दी। उन्होंने बताया कि लेजर की मदद से अब लोग बिना चीरे के ये आपरेशन करवा सकते हैं। लेजर से खून भी बहुत कम रहता है और आपरेशन के बाद दर्द भी बहुत कम होता है। जहां पहले आपरेशन के बाद बहुत दिन घाव भरने में लग जाते थे, अब वही घाव बहुत जल्दी ठीक हो जाते हैं और आप अपने कारोबार पर तुरंत ही लौट सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बवासीर तथा फिस्टुला की पुरानी सर्जरी से ठीक होने में चार से आठ हफ्ते तक लग जाते थे, लेकिन अब लेजर की टेक्नीक से घाव न के बराबर होने की वजह से आप अगले ही रोज अपने काम पर जा सकते हैं। इसी तरह वेरीकोज वेन्स में पहले पूरी फूली हुईं नसें शरीर से निकालनी पड़ती थीं, लेकिन अब लेजर की मदद से उन नसों को अंदर ही जलाकर ठीक कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि अगर जो लोग इन बीमारियों से पीडि़त हैं और अब तक आपरेशन के डर से सर्जरी नहीं करवा रहे थे, तो अब वे बिना डर के ये आपरेशन करवा सकते हैं और एक नए जीवन की शुरुआत कर सकते हैं। श्री आहलूवालिया ने बताया कि बहुत सारे बवासीर के मरीज सालों आपरेशन नहीं करवाते और धीरे-धीरे उनके शरीर में खून की कमी होने लगती है। खून की कमी से पूरे शरीर में कमजोरी आ जाती है। फिस्टुला का आपरेशन समय से न करवाने से फिस्टुला और भी जटिल हो जाता है और उसका आपरेशन उतना ही मुश्किल होता जाता है। आपरेशन के बाद फिर फिस्टुला दोबारा होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
इसी तरह वेरीकोस वेन्स धीर-धीरे बढ़ती जाती हैं और उनका उपचार और कठिन होता जाता है। समय रहते इन नसों का इलाज न करवाने से पैर के निचले हिस्से में जख्म बन सकता है और इन नसों के फटने की वजह से भीषण खून की कमी भी हो सकती है। इसीलिए इन बीमारियों के इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए।
