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बेहतर शिक्षा की रैंकिंग में - Divya Himachal

Divya Himachal 4 months ago

राष्ट्रीय फलक पर शिक्षा के कारनामे जो भी हों, लेकिन हिमाचल ने परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स में छठे स्थान पर खुद को स्थापित किया है। यह गुणात्मक सुधार माना जा सकता है, जहां लर्निंग के हिसाब से बच्चों के शैक्षणिक स्तर का उत्थान हुआ है।

कहना न होगा कि स्कूली ढांचे में कई तरह के सुधार सामने आए हैं। शिक्षा के साथ समाज और प्रदेश अगर बेहतर हुआ है, तो यह साबित करता है कि स्कूलों में लैब टू लर्निंग तथा इंटरनेट से ज्ञान तक एक क्रांतिकारी उद्घोष हुआ है। हिमाचल जैसे पर्वतीय प्रदेश के लिए राष्ट्रीय रैंकिंग में उच्च स्तरीय साबित होने के मायने सरकार के योगदान के अलावा समाज की उत्कंठा से भी जाहिर होते हैं। यहां शिक्षा सिर्फ सरकारी स्कूल की छत नहीं, बल्कि समाज की निष्ठा तथा निजी योगदान से भी परिष्कृत होती है। इसलिए सरकारी दायित्व का स्कूली आचरण बेशक बढिय़ा नजर आ रहा है, लेकिन इसे प्रतिस्पर्धी व उज्ज्वल बनाया है जनता के विश्वास ने। एक राजनीतिक प्रतिस्पर्धा भी शिक्षा, स्वास्थ्य, सडक़ तथा बिजली -पानी की आपूर्ति को लेकर जनप्रतिनिधियों के बीच रही है और विधायक प्राथमिकताएं भी इस दिशा में सदा अग्रसर दिखाई देती हैं। हिमाचल में सरकारी स्कूलों के समक्ष निजी शिक्षण संस्थानों की अपनी खूबियां भी सामने आती हैं, तो मुकाबला परीक्षा परिणाम से शुरू होकर अब विभिन्न शिक्षा बोर्डों तक पहुंच गया है। आने वाले कुछ सालों में हिमाचल की शिक्षा को केवल स्कूल शिक्षा बोर्ड के ढांचे में ही नहीं परखा जाएगा, बल्कि सीबीएसई स्कूलों की शृंखला भी पहचानी व जानी जाएगी।

अभी जिस वजह से चंडीगढ़ इस मूल्यांकन में आगे दिखाई दे रहा है, उसके लिए वहां के स्कूलों का संचालन सीबीएसई बोर्ड के पैरामीटर के कारण है। इस परिपाटी में वर्तमान सुक्खू सरकार के उस फैसले का अवलोकन होना बाकी है, जब प्रदेश के डेढ़ सौ से ऊपर सरकारी स्कूल सीबीएसई पाठ्यक्रम को अंगीकार कर चुके होंगे। हिमाचल में शिक्षा का प्रसार जिन सीढिय़ों से चढ़ा है, वहां कमोबेश हर सरकार का योगदान रहा है। यह दीगर है कि अब छात्र संख्या के आधार पर कतरब्यौंत हो रही है। इससे छात्र-शिक्षक अनुपात, विषयों का अंबार और निजी स्कूलों के समकक्ष सरकारी संस्थानों का उद्धार होने जा रहा है। अभी हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के परीक्षा परिणाम सामने आए, तो इस कवायद में सरकारी क्षेत्र शिरोमणि बना है। परिणामों की फेहरिस्त में कई सरकारी स्कूलों की छत उत्तम घोषित हुई है, फिर भी शिक्षा में गुणवत्ता के अनेक मानदंड अभी पूरे नहीं हैं। शैक्षणिक माहौल का उत्थान केवल परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि छात्र जीवन को जिंदगी के हर पहलू से निपुणता से गुजरने का आत्मबोध है। शिक्षा से इतर विविध गतिविधियों के लिए भी अब हिमाचल तैयार हो रहा है या होना चाहिए। गीत-संगीत, खेल, आर्ट तथा वैज्ञानिक सोच के दायरे को बढ़ाने के लिए परिसर को और व्यावहारिक होना पड़ेगा। बहरहाल राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में हिमाचल की स्कूली रैंकिंग साबित कर रही है कि यहां न केवल मैदानी इलाकों, बल्कि कबाइली व दुरुह क्षेत्रों तक शिक्षा की लौ फैलाने में तमाम सरकारों ने अपनी प्राथमिकताओं के घोड़े चारों दिशाओं में दौड़ाए हैं।


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