एक डाक्टर पर 50 हजार मरीज, टांडा के कार्डियोलॉजी विभाग की सांसें फूलीं
स्टाफ रिपोर्टर- टीएमसी
डा. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा महाविद्यालय टांडा अस्पताल के कार्डियोलॉजी ह्रदय रोग विभाग की मुश्किलें दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं।
एक तरफ डाक्टरों की कमी दूसरी तरफ मरीजों की बढ़ती संख्या सिरदर्दी का सबब बनती जा रही हैं। इमर्जेंसी में आने वाले गंभीर मरीजों को आईसीयू में ही दम तोडऩे को मजबूर होना पड़ रहा है, न तो उचित समय पर एंजीयोग्राफी हो पा रही है और न कोई स्टंट की व्यवस्था हो पा रही है। केवल मात्र कार्डियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष एचओडी डा. मुकुल भटनागर के कंधों पर सारा का सारा बोझ है वह ओपीडी के मरीजों को संभालने के साथ साथ कैथ लैब में एंजियोग्राफी या स्टनिंग सहित अन्य टेस्टों को भी कर रहे हैं। डाक्टरों की कमी के चलते मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों का रुख करने को मजबूर होना पड़ रहा है। डाक्टरों की कमी के साथ साथ इसका एक अन्य कारण हर वर्ष हार्ट के मरीजों की जनसंख्या में हो रही बढ़ोतरी भी है। बात पिछले कुछ वर्षों की करें तो टांडा मेडीकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी ह्रदय विभाग ने 2016 से कार्य करना शुरू किया था और सीनियर तथा एसआर डॉक्टरों की संख्या भी 10 से 12 थी वर्ष 2016 में ओपीडी में 9236 मरीज ए आईपीडी में 8 मरीज दर्ज हुए तथा 3250 ईको के टैस्ट किए गए। वर्ष 2017 में ओपीडी में 10690 मरीज, आईपीडी में 1237 मरीज तथा 3919 ईको के टेस्ट किए गए। वर्ष 2018 में ओपीडी में 12330 मरीज, आईपीडी में 1980 मरीज तथा 4873 ईको के टेस्ट किए गए। वर्ष 2019 में ओपीडी में 20694 मरीज, आईपीडी में 2906 मरीज मरीज दर्ज हुए तथा 4601 ईको के टेस्ट किए गए। वर्ष 2020 में ओपीडी में 8695 मरीज ए आईपीडी में 932 मरीज पहुंचे तथा 1836 ईको के टेस्ट किए गए।
वर्ष 2021 में ओपीडी में 14602 मरीज, आईपीडी में 1754 मरीज पहुंचे तथा 4183 ईको के टेस्ट किए गए। वर्ष 2022 में ओपीडी में 22787 मरीज, आईपीडी में 2760 मरीज मरीज दर्ज हुए तथा 7071 ईको के टेस्ट किए गए। वर्ष 2023 में ओपीडी में 23585 मरीज, आईपीडी में 3176 मरीज इलाज के पहुंचे तथा 11457 ईको के टेस्ट किए गए। वर्ष 2024 में ओपीडी में 37612 मरीज, आईपीडी में 3697 मरीज तथा 13294 ईको के टेस्ट किए गए। वर्ष 2025 से 2026 अप्रैल 30 तक में ओपीडी में 52186 मरीज, आईपीडी में 5528 मरीज अपना इलाज करवा चुके हैं तथा 14197 ईको के टेस्ट किए गए तथा मरीजों को चेक किया गया इसके साथ अन्य कई टेस्ट एंजियोग्राफी तथा स्टनिंग की गई। इन वर्षों में दिन-प्रतिदिन हार्ट के मरीजों में बढ़ोतरी हुई है और डाक्टरों की संख्या घटते घटते 12 से केवल एक रह गई है। प्रदेश के दूसरे बड़े अस्पताल में हार्ट रोग के रोगियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए टीएमसी में रोगियों के उपचार के लिए 2016 में कैथ लैब की शुरुआत हुई थी तथा यहां अति आधुनिक मशीनों को लगाया गया था। यहां लगी मशीनें अब लगभग 10 साल पूर्ण कर चुकी हैं और कुछ समय बाद यह भी अपनी समय अवधि पूर्ण कर लेगी। प्रदेश के दूसरे बड़े टांडा अस्पताल में 45 विधानसभाओं के छह जिलों चंबा मंडी ऊना हमीरपुर कुल्लू और 16 लाख से अधिक की आबादी वाले सबसे बड़े जिला कांगड़ा से मरीज उपचार के लिए पहुंचे हैं।

