एजेंसियां-बेंगलुरु
देश की ई-20 पॉलिसी पर अब सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि अब कई गाडिय़ों में इसका विपरीत असर देखने को मिला है। ई-20 पेट्रोल के इस्तेमाल से बड़े पैमाने पर गाडिय़ां खराब हो रही हैं, फ्यूल की क्षमता (माइलेज) कम हो रही है और मेंटेनेंस का खर्च बढ़ रहा है, जबकि इससे खुदरा ईंधन की कीमतें कम करने में भी कोई मदद नहीं मिल रही है।
सबसे ज्यादा दिक्कत बीएस-6 ईंजन के वाहनों में देखने को मिल रही है।
कई दोपहिया वाहन चालकों का कहना है कि ई-20 पेट्रोल से उनकी बाइक्स और स्कूटर मिसिंग कर रहे हैं। जब रेस दे रहे हैं, तो गाड़ी मिसिंग कर रही है। हालांकि यह दिक्कत ज्यादातर बीएस-6 ईंजन में ही आ रही है। इस समस्या को लेकर कई वाहन चालक एजेंसियों या मेकेनिक के पास पहुंच रहे हैं, लेकिन समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकल पार रहा है। लोगों का कहना है कि जब ई-20 पेट्रोल से ही इतनी दिक्कत आ रही है, तो जब इसका अगला वर्जन आएगा, तो गाडिय़ों का क्या हाल होगा।
क्या है ई-20 पेट्रोल
ई-20 पेट्रोल और इथेनॉल का एक मिश्रण है, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत सामान्य पेट्रोल होता है। इथेनॉल एक जैविक ईंधन है, जो मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य अनाजों से प्राप्त होता है। भारत सरकार ने कच्चे तेल के आयात को कम करने और प्रदूषण घटाने के लिए इसे देश भर में लागू किया है। ई-20 से पुरानी गाडिय़ों खासकर बीएस-4 और बीएस-6 फेज-1 वाहन जो इसके लिए डिज़ाइन नहीं किए गए हैं, में माइलेज में 10 प्रतिशत तक की कमी और इंजन या फ्यूल पंप से जुड़ी समस्याएं आ रही हैं।
कांग्रेस ने बताया बड़ा घोटाला
कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने शनिवार को केंद्र के 20 प्रतिशत इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (ई20) प्रोग्राम को एक बड़ा घोटाला करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे बड़े पैमाने पर गाडिय़ां खराब हो रही हैं, फ्यूल की क्षमता (माइलेज) कम हो रही है और मेंटेनेंस का खर्च बढ़ रहा है, जबकि इससे खुदरा ईंधन की कीमतें कम करने में भी कोई मदद नहीं मिली है। श्री हरिप्रसाद ने एक्स पर एक कड़े शब्दों वाले पोस्ट में दावा किया कि ई20 पेट्रोल के आने के बाद से गाडिय़ां खराब होने और माइलेज में भारी गिरावट की खबरें आ रही हैं, जिससे अनगिनत गाड़ी मालिक परेशान हैं और उन पर मेंटेनेंस का ज़्यादा बोझ पड़ रहा है।
अगर लोग ईंधन के लिए उतना ही या उससे ज़्यादा पैसा दे रहे हैं, जबकि उन्हें कम माइलेज मिल रहा है और मरम्मत का खर्च भी उठाना पड़ रहा है, तो गंभीर सवालों के जवाब मिलने चाहिए। यह एक घोटाला है। उन्होंने कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को पारदर्शिता, वैज्ञानिक सबूतों और ग्राहकों की उचित सुरक्षा के साथ लागू किया जाना चाहिए, न कि लाखों वाहन मालिकों के नुकसान की कीमत पर। श्री हरिप्रसाद ने केंद्र से यह भी आग्रह किया कि वह ई20 ईंधन के माइलेज, इंजन की क्षमता और रखरखाव के खर्च पर पडऩे वाले असर को लेकर वाहन मालिकों की बढ़ती चिंताओं का समाधान करे। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ़ से ज़्यादा जवाबदेही और स्पष्टता के बिना जनता का भरोसा बनाए नहीं रखा जा सकता।

