46 हजार टन गैस लदी अब तक सात ने पार किया खतरनाक समुद्री रास्ता, एक क्रूड ऑयल टैंकर भी निकला
युद्ध के बीच ट्रांसपोर्ट में सबसे सफल देशों में हिंदुस्तान शामिल
दिव्य हिमाचल ब्यूरो - नई दिल्ली
पश्चिम एशिया में शुरू हुए संघर्ष के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बड़ी चुनौती बन गई है। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद इस संकरे जलमार्ग से यातायात काफी कम हो गया था, लेकिन भारत ने कूटनीतिक प्रयासों और नौसेना की मदद से अपने झंडे वाले एक और जहाज को होर्मुज से गुजार लिया है। भारतीय जहाज ग्रीन संवी होर्मुज स्ट्रेट पार कर गया। जहाज में करीब 46,650 मीट्रिक टन गैस लदी है। यह होर्मुज पार करने वाला भारत का सातवां एलपीजी टैंकर है। यह संख्या किसी भी देश के लिए युद्ध शुरू होने के बाद सबसे अधिक में से एक है। इन जहाजों में एलपीजी कैरियर शिवालिक, नंदा देवी, पाइन गैस, जग वसंत, ग्रीन सान्वी, बीडब्ल्यू टायर, बीडब्ल्यू एल्म और क्रूड ऑयल टैंकर जग लाडकी शामिल हैं।
ये जहाज भारत के विभिन्न बंदरगाहों जैसे मुंद्रा, कांडला, मुंबई और न्यू मंगलौर की ओर जा रहे थे, जिनमें एलपीजी और क्रूड ऑयल जैसी ऊर्जा सामग्री लदी हुई थी। इन आठ भारतीय जहाजों ने कुल मिलाकर हजारों टन एलपीजी और क्रूड ऑयल की आपूर्ति सुनिश्चित की। उदाहरण के लिए शिवालिक और नंदा देवी ने करीब 92 हजार टन एलपीजी पहुंचाई, जबकि जग वसंत और पाइन गैस ने लगभग 92600 टन, बीडब्ल्यू टायर और बीडब्ल्यू एल्म ने 94,000 टन के आसपास एलपीजी कैरी की। जग लाडकी नामक टैंकर ने संयुक्त अरब अमीरात से लगभग 80,886 मीट्रिक टन क्रूड ऑयल लेकर मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचा। ये कार्गो भारत की घरेलू खपत के लिए बेहद जरूरी हैं, खासकर रसोई गैस और अन्य ऊर्जा जरूरतों के लिए। युद्ध के कारण कई अन्य भारतीय जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं, लेकिन इन आठ जहाजों के सफल ट्रांजिट से ऊर्जा आपूर्ति पर तत्काल दबाव कम हुआ है। भारत ने इन जहाजों की सुरक्षित निकासी के लिए दोहरी रणनीति अपनाई। भारत अब उन देशों में शामिल हो गया है, जिनके सबसे ज्यादा जहाजों ने युद्धग्रस्त होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया है।

