जेपी इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी के राष्ट्रीय स्तरीय आयोजन में 100 से अधिक टीमों की भागीदारीदिव्य हिमाचल ब्यूरो-सोलन
जेपी इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (जेआईआईटी), विश टाउन कैंपस, सेक्टर-128, नोएडा में 'ड्रोन-ओ-वॉर 1.0' का भव्य शुभारंभ हुआ।
यह दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर का आयोजन ड्रोन तकनीक में नवाचार, अनुसंधान और कौशल विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है। आज के समय में जब मानवरहित हवाई प्रणाली (ड्रोन) रक्षा, निगरानी, लॉजिस्टिक्स और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में तेजी से बदलाव ला रही हैं, ऐसे में यह कार्यक्रम छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। इस आयोजन में देशभर के विभिन्न संस्थानों, विश्वविद्यालयों और स्कूलों की 100 से अधिक टीमों ने भाग लिया। उद्घाटन समारोह में उत्साह और तकनीकी जिज्ञासा का माहौल देखने को मिला। इस अवसर पर मुख्यातिथि लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चंद्र चैत (सेवानिवृत्त) उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में ड्रोन तकनीक की रक्षा क्षेत्र, रणनीतिक अभियानों और राष्ट्र निर्माण में बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम में डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) के वरिष्ठ वैज्ञानिकों सहित कई शिक्षाविद और विशेषज्ञ भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में जेआईआईटी नोएडा के प्रो-चांसलर प्रो. एस.सी. सक्सेना, प्रो. विकास सक्सेना, प्रो. शिखा मेहता और डा. विनय टिक्कीवाल सहित अन्य गणमान्य लोग शामिल हुए। इस प्रतियोगिता में लगभग 20 लाख रुपए तक के पुरस्कार रखे गए हैं, जिससे प्रतिभागियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
कार्यक्रम में कई प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं, जिनमें एफपीवी रेसिंग चैंपियनशिप, स्वायत्त ड्रोन मिशन, पेलोड डिलीवरी चैलेंज, डिजाइन एवं नवाचार प्रतियोगिता तथा सिमुलेशन आधारित चुनौतियां शामिल हैं। इसके साथ ही तकनीकी पैनल चर्चाओं का भी आयोजन किया गया। 'विकसित भारत को सशक्त बनाना ड्रोन तकनीक और कुशल कार्यबल विकास' विषय पर चर्चा में शिक्षा संस्थानों की भूमिका, पाठ्यक्रम सुधार और उद्योग-शिक्षा सहयोग पर जोर दिया गया। अन्य सत्र में ड्रोन तकनीक के भविष्य, स्वायत्त प्रणालियों, वास्तविक समय डेटा प्रसंस्करण, नियामक ढांचे और तकनीकी चुनौतियों पर विचार-विमर्श हुआ। तीसरे सत्र में रक्षा, आपदा प्रबंधन और बुनियादी ढांचे की निगरानी में ड्रोन की उपयोगिता पर प्रकाश डाला गया। इस कार्यक्रम को डीआरडीओ सहित कई उद्योग भागीदारों जैसे पीडीआरएल, रेवअप, होवररोबोटिक्स, मेंटोरेक्स और फोरफिडटर का सहयोग प्राप्त हुआ है। यह आयोजन शिक्षा और उद्योग के बीच बढ़ते सहयोग को भी दर्शाता है।

