नग्गर में कला से शांति और सूकून का दिया संदेश, हरि दर्शन की प्रदर्शनी ने खींचा ध्यान
निजी संवाददाता-नग्गर
हिमालय केवल भूगोल नहीं, बल्कि चेतना का एक जीवित संसार है। इसी दर्शन को केंद्र में रखकर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार हरि दर्शन सांख्य की चित्र प्रदर्शनी हिमालय द सेक्रेड साइलेंस ऑफ स्पिरिचुअलिटी एंड पीस का पांच दिवसीय आयोजन इंटरनेशनल रोरिक मेमोरियल ट्रस्ट नग्गर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
यह इस श्रृंखला की 108 नियोजित वैश्विक प्रदर्शनियों का चौथा महत्वपूर्ण अध्याय था। यह प्रदर्शनी अंतरराष्ट्रीय रोरिक शांति समझौते की भावना को समर्पित थी। प्रदर्शनी का उद्घाटन के सहायक रूसी कला क्यूरेटर दमित्री सुर्गिन द्वारा किया गया। उन्होंने इस आयोजन को महान रूसी कलाकार निकोलस रोरिक की विरासत और आधुनिक भारतीय कला के बीच एक सेत बताया। लखनऊ की कला स्रोत आर्ट गैलरी के सहयोग से आयोजित इस शो ने रोरिक के संस्कृति के माध्यम से शांति के संदेश को एक नई समकालीन दृष्टि प्रदान की। प्रदर्शनी के संदर्भ में देश के प्रख्यात कलाविद व पुरातत्ववेत्ता पद्मश्री डा. यशोधर मठपाल ने अपने संदेश में कहा कि हरि दर्शन सांख्य प्रकृति को देखने का नजरिया बदलते हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि ये चित्र केवल पहाड़ नहीं हैं, बल्कि सांख्य दर्शन के सत्व, रज और तम गुणों का संतुलित प्रतिबिंब हैं, जहां मौन एक शक्तिशाली उपस्थिति बनकर उभरता है।
मूलत: मिर्जापुर उत्तर प्रदेश के रहने वाले और काशी हिंदू विश्वविद्यालय से शिक्षित हरि दर्शन सांख्य ने इन 108 कृतियों के निर्माण के लिए हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों केदारनाथ, रुद्रनाथ, तुंगनाथ, मणिमहेश में तीन वर्षों तक गहन प्रवास और शोध किया है। प्रदर्शनी में प्रदर्शित चित्रों में किन्नौर कैलाश, नीलकंठ पर्वत, ओम पर्वत और श्री खंड कैलाश जैसे शिखर केवल दृश्य नहीं, बल्कि प्रार्थना और आध्यात्मिक ऊर्जा के प्रतीक के रूप में दिखाई दिए। कलाकार हरि दर्शन सांख्य ने बताया कि मेरा उद्देश्य हिमालय के उस मौन को साझा करना है जो शांति का आधार है।लखनऊ, वाराणसी और सारनाथ के बाद यह चौथा पड़ाव मेरे लिए इसलिए विशेष है क्योंकि यहां की फिजाओं में निकोलस रोरिक की ऊर्जा रची-बसी है। नग्गर में मिली अपार सफलता और कला प्रेमियों की सराहना के बाद इस श्रृंखला की पांचवीं प्रदर्शनी लखनऊ में आयोजित होगी।
लखनऊ में भी जल्द सजेगी प्रदर्शनी
कलाकार हरि दर्शन सांख्य ने बताया कि मेरा उद्देश्य हिमालय के उस मौन को साझा करना है जो शांति का आधार है। लखनऊ, वाराणसी और सारनाथ के बाद यह चौथा पड़ाव मेरे लिए इसलिए विशेष है क्योंकि यहां की फिजाओं में निकोलस रोरिक की ऊर्जा रची-बसी है। नग्गर में मिली अपार सफलता और कला प्रेमियों की सराहना के बाद इस श्रृंखला की पांचवीं प्रदर्शनी शीघ्र ही लखनऊ की कला स्रोत आर्ट गैलरी में आयोजित की जाएगी।

