तेहरान, 04 अप्रैल 2026 (आरएनएस)। ईरान ने पश्चिम एशिया के जलते हालातों के बीच खुद को बड़ा खिलाड़ी साबित करने की पाकिस्तान की कोशिशों पर पानी फेर दिया है। तेहरान ने दो टूक कह दिया है कि वह पाकिस्तान में अमेरिकी नेतृत्व वाले किसी भी डेलीगेशन या प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात नहीं करेगा।
इस्लामाबाद ने खुद को अमेरिका और ईरान के बीच एक सेतु की तरह पेश करने की कोशिश की थी, लेकिन ईरान ने अमेरिकी मांगों को पूरी तरह अस्वीकार्य बताकर पाकिस्तान की उम्मीदों को करारा झटका दिया है।
तेहरान और इस्लामाबाद के बीच गहरे अविश्वास की खाई इस कूटनीतिक विफलता की सबसे बड़ी वजह बनकर उभरी है। सूत्रों की मानें तो पाकिस्तान ने यह दावा किया था कि वह दोनों देशों के बीच संवाद स्थापित करा सकता है, लेकिन ईरानी नेतृत्व ने पाकिस्तान की साख पर भरोसा करने के बजाय उसे वार्ता की मेज से बाहर रखना ही बेहतर समझा।
यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि अब ईरान कूटनीतिक रास्तों के लिए पाकिस्तान के बजाय कतर को तरजीह देने की योजना बना रहा है।
सीमाओं पर बारूद की गंध के बीच ईरानी सेना का ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस’ अब अगले और अधिक घातक चरण में प्रवेश कर गया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने आधिकारिक बयान जारी कर दावा किया है कि उसने अमेरिका-इजरायल गठबंधन के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की 93वीं लहर पूरी कर ली है।
ईरान का दावा है कि उसके ड्रोन्स और मिसाइलों ने इजरायल के कब्जे वाले इलाकों में स्थित सैन्य ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है, जिससे डिफेंस सिस्टम को भारी चुनौती मिली है।
जमीनी हालात पर नजर डालें तो पश्चिमी गैलिली, हाइफा, काफर कन्ना और क्रायोट जैसे इलाके इस वक्त ईरानी हमलों के मुख्य केंद्र बने हुए हैं। IRGC ने दावा किया है कि इन क्षेत्रों में न केवल इजरायली सैन्य जमावड़ों को ध्वस्त किया गया है, बल्कि उनके लॉजिस्टिक और युद्ध समर्थन केंद्रों को भी भारी नुकसान पहुँचाया है।
हालिया इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईरान अब साइबर वॉरफेयर और प्रॉक्सी नेटवर्क का इस्तेमाल कर इजरायल के इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है, जो कि मूल वायर रिपोर्ट में दी गई जानकारी से कहीं अधिक व्यापक है।
इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक बाजारों में भी खलबली मचा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान द्वारा मध्यस्थता ठुकराने और सीधे हमले तेज करने से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल की सप्लाई बाधित हो सकती है। यदि तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।
फिलहाल, ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक उसकी शर्तें नहीं मानी जातीं, वह पीछे हटने वाला नहीं है और पाकिस्तान जैसे देशों की दखलंदाजी उसे स्वीकार्य नहीं है।

