हेल्थ डेस्क, 07 अप्रैल 2026 (दून हॉराइज़न)। आयुर्वेद के खजाने में छिपी (Atibala Benefits) महज एक जंगली पौधा नहीं, बल्कि असाध्य रोगों को मात देने वाली एक महा-औषधि है।
सुनहरे-पीले फूलों वाले इस पौधे को 'कंघी' के नाम से भी जाना जाता है, जिसमें एंटी-डायबिटिक, एंटी-इंफ्लेमेटरी और लैक्साटिव गुण कूट-कूट कर भरे हैं।
अतिबला का वैज्ञानिक नाम Abutilon indicum है। आधुनिक शोध बताते हैं कि इसमें मौजूद फाइटोकेमिकल्स शरीर के भीतर फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं, जिससे लिवर और किडनी की कार्यक्षमता बढ़ती है।
पारंपरिक रूप से इस पौधे का हर हिस्सा-चाहे वह जड़ हो, छाल हो, बीज हो या पत्ते-दवा के रूप में इस्तेमाल होता है। यह कुष्ठ रोग, पीलिया, अल्सर, टीबी, और पैरालिसिस जैसी स्थितियों में भी सहायक सिद्ध हुआ है।
यूरिन इन्फेक्शन और पथरी में राहत
अतिबला की जड़ की छाल का पाउडर अगर चीनी के साथ लिया जाए, तो बार-बार पेशाब आने की समस्या खत्म हो जाती है।
मूत्र मार्ग में जलन (UTI) या संक्रमण होने पर इसके पत्तों का 40 मिलीलीटर काढ़ा सुबह-शाम लेने से चमत्कारिक लाभ मिलता है। यह गुर्दे की सफाई कर शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करता है।
पुरानी खांसी और सांस के रोगों का जड़ से इलाज
गीली खांसी से परेशान मरीजों के लिए अतिबला, कंटकारी, बृहती, वासा के पत्ते और अंगूर का मिश्रण जीवनदान जैसा है
। इन सबको बराबर मात्रा में लेकर बनाया गया काढ़ा (14-28 मिली) अगर 5 ग्राम शक्कर के साथ लिया जाए, तो फेफड़ों में जमा कफ बाहर निकल जाता है। यह ब्रोंकाइटिस और एलर्जी में भी उतना ही असरदार है।
बवासीर और पेट दर्द में अचूक उपाय
बवासीर (Piles) के दर्दनाक मवाद और सूजन को कम करने के लिए इसके पत्तों को उबालकर, उसमें ताड़ का गुड़ मिलाकर पीना चाहिए।
वहीं, अगर पित्त दोष के कारण पेट में भयंकर दर्द हो, तो अतिबला को पृश्नपर्णी, कटेरी, लाख और सोंठ के साथ दूध में मिलाकर लेने से तुरंत शांति मिलती है। दस्त के साथ खून आने की समस्या में इसके पत्तों को देसी घी के साथ लेना एक परीक्षित नुस्खा है।
मसूड़ों की समस्या और शारीरिक ताकत
अगर मसूड़े ढीले हो गए हैं या खून आता है, तो अतिबला के पत्तों के काढ़े से दिन में 4 बार कुल्ला करना मसूड़ों को लोहे जैसा मजबूत बना देता है।
इसके अलावा, जो लोग पुरानी कमजोरी या मांसपेशियों की शिथिलता से जूझ रहे हैं, उन्हें अतिबला के बीजों को पकाकर खाना चाहिए। यह शरीर में ओज बढ़ाता है और प्राकृतिक ‘स्ट्रेंथ बूस्टर’ की तरह काम करता है।
नोट: यद्यपि अतिबला अत्यंत गुणकारी है, परंतु किसी भी गंभीर बीमारी में इसके सेवन से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह अनिवार्य है।

