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समुद्री कछुओं की रहस्यमयी यात्रा: पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से दिशा खोजने का नया खुलासा

समुद्री कछुओं की रहस्यमयी यात्रा: पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से दिशा खोजने का नया खुलासा

ई वैज्ञानिक रिसर्च में यह सामने आया है कि समुद्री कछुए समुद्र के हजारों किलोमीटर लंबे रास्ते में अपनी दिशा तय करने के लिए संभवतः पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करते हैं। यह अध्ययन हाल ही में साइंस एडवांसेज नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

शोध में यह समझने की कोशिश की गई है कि खुले समुद्र में, जहां कोई रास्ता या निशान नहीं होता, वहां ये कछुए कैसे सही दिशा में यात्रा करते हैं।

इस शोध में वैज्ञानिकों ने छह मादा हरे समुद्री कछुओं पर विशेष प्रकार के सैटेलाइट टैग लगाए। इन टैग्स की मदद से वैज्ञानिक यह जान पाए कि कछुए कहां जा रहे हैं और वे किस दिशा में अपना सिर करके तैर रहे हैं। यह तकनीक कई वर्षों के प्रयास के बाद विकसित की गई थी और इससे लगभग 100 मीटर तक सटीक स्थान और लगभग 10 डिग्री तक दिशा का अनुमान लगाया जा सकता है।

इन कछुओं ने लगभग एक महीने में करीब 1,600 किलोमीटर की दूरी तय की और वे हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से में आगे बढ़ते गए।

मुख्य खोज

शोध का सबसे बड़ा निष्कर्ष यह था कि कछुए केवल समुद्री धाराओं के साथ बहते नहीं रहे, बल्कि वे खुद अपनी दिशा तय कर रहे थे। उनके रास्ते सीधे और नियंत्रित दिखाई दिए, जिससे यह संकेत मिला कि वे किसी आंतरिक नेविगेशन प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि कछुए केवल पानी की धाराओं पर निर्भर होते, तो उनकी यात्रा बहुत अधिक बिखरी हुई और अनियमित होती। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वे लगातार सही दिशा में आगे बढ़ते रहे।

समुद्री धाराएं बनाम दिशा

समुद्र में बहुत शक्तिशाली धाराएं होती हैं, जो किसी भी जीव को आसानी से अपनी दिशा से भटका सकती हैं। लेकिन इस अध्ययन में पाया गया कि कछुए इन धाराओं के बावजूद अपनी यात्रा को नियंत्रित कर रहे थे। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिली कि कछुओं के पास संभवतः एक प्रकार की 'आंतरिक दिशा प्रणाली' होती है, जो उन्हें यह बताती है कि वे कहां हैं और उन्हें किस दिशा में जाना चाहिए।

दिशा बदलने की क्षमता

शोध में यह भी देखा गया कि कछुए अपनी दिशा अचानक नहीं बदलते थे। वे धीरे-धीरे कई घंटों में अपनी दिशा में छोटे-छोटे बदलाव करते थे और फिर नए रास्ते पर आगे बढ़ते थे।

यह व्यवहार इस बात का संकेत देता है कि वे केवल दिशा ही नहीं जानते, बल्कि अपनी स्थिति का भी अनुमान लगा सकते हैं। वैज्ञानिक इसे 'आंतरिक नक्शा और आंतरिक कंपास' जैसी प्रणाली मानते हैं। यानी कछुओं के पास एक ऐसा तंत्र है जो उन्हें यह समझने में मदद करता है कि वे कहां हैं और उन्हें किस दिशा में जाना है।

क्या कहते हैं वैज्ञानिकों?

शोध से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि खुले समुद्र में जहां कोई पहाड़, पेड़ या तट दिखाई नहीं देता, वहां दिशा पहचानना बहुत कठिन होता है। फिर भी समुद्री कछुए सही रास्ता खोज लेते हैं। उनका मानना है कि इसका सबसे मजबूत कारण पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र हो सकता है, जिसे कछुए एक प्राकृतिक कंपास की तरह उपयोग करते हैं।

कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि जब कछुए समुद्र तट के पास आते हैं, तब वे अन्य संकेतों जैसे किनारों की बनावट या पानी की गंध का भी उपयोग कर सकते हैं।

यह नया अध्ययन समुद्री जीवों की समझ को एक नई दिशा देता है। यह दिखाता है कि समुद्री कछुए केवल प्रवाह पर निर्भर जीव नहीं हैं, बल्कि वे जटिल और बुद्धिमान नेविगेशन प्रणाली का उपयोग करते हैं। लाखों वर्षों के विकास ने उन्हें ऐसा प्राकृतिक 'जीपीएस सिस्टम' दिया है, जो उन्हें विशाल और खुले महासागर में सही दिशा दिखाने में मदद करता है।

इस शोध से यह भी स्पष्ट होता है कि प्रकृति में मौजूद कई जीवों के पास ऐसी क्षमताएं हैं जिन्हें समझना अभी बाकी है। समुद्री कछुओं की यह यात्रा हमें यह सिखाती है कि प्रकृति में दिशा और जीवन का संतुलन कितना अद्भुत और रहस्यमय हो सकता है।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Down to Earth Hindi