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वैज्ञानिकों को गैलापागोस के पास मिला अनोखा नीला ऑक्टोपस, आकार में महज गोल्फ बॉल के बराबर

वैज्ञानिकों को गैलापागोस के पास मिला अनोखा नीला ऑक्टोपस, आकार में महज गोल्फ बॉल के बराबर

प्रकृति को जिंतना ज्यादा हम समझते हैं उतना ही हमें अहसास होता है कि वह उससे कहीं ज्यादा अबूझ है। हर नई खोज के साथ यह अहसास और गहरा होता जाता है कि पृथ्वी पर जीवन के अनेक अध्याय अब भी अनपढ़े हैं।

कभी घने वर्षावनों में, कभी बर्फीले पहाड़ों के बीच और कभी महासागरों की अथाह गहराइयों में छिपे जीव हमें लगातार चौंकाते रहते हैं।

ऐसी ही एक खोज गैलापागोस के पास समुद्र की करीब 5,800 फीट गहराई में हुई है, जहां वैज्ञानिकों ने गोल्फ बॉल जितने आकार वाले एक दुर्लभ नीले ऑक्टोपस की पहचान की है। यह नन्हा जीव न केवल विज्ञान के लिए एक नई प्रजाति है, बल्कि इसने एक बार फिर याद दिलाया है कि महासागरों की अंधेरी दुनिया में अब भी अनगिनत रहस्य दफन हैं।

मशहूर वैज्ञानिक पत्रिका जूटैक्सा में छपे अध्ययन के अनुसार, इस नए जीव को वैज्ञानिकों ने 'माइक्रोएलेडोन गैलापागेन्सिस' नाम दिया है।

समुद्र की गहराई में दिखा नीले रंग का नन्हा जीव

इस ऑक्टोपस को पहली बार 2015 में एक गहरे समुद्री अभियान के दौरान देखा गया था। यह खोज 'ई/वी नॉटिलस' नाम के खोजी जहाज के एक अभियान के दौरान हुई। जब समुद्र की गहराइयों में घूम रहे रोबोटिक कैमरे के सामने अचानक यह नीला जीव सामने आया, तो कंट्रोल रूम में बैठे वैज्ञानिक अपनी खुशी नहीं रोक पाए।

ऑडियो रिकॉर्डिंग में उनकी आवाजें गूंज उठीं—"यह कितना छोटा है!", "अरे, यह तो नीला है!" गोल्फ बॉल जितने आकार वाले इस जीव को टीम ने सावधानी से एकत्र किया और इसके जैसे दो अन्य ऑक्टोपस के वीडियो भी रिकॉर्ड किए। इस खोज में चार्ल्स डार्विन फाउंडेशन और गैलापागोस नेशनल पार्क के वैज्ञानिक शामिल थे।

वैज्ञानिकों ने जांच के लिए इस ऑक्टोपस का एक नमूना सुरक्षित रख लिया। जब इसे गैलापागोस के 'चार्ल्स डार्विन रिसर्च स्टेशन' लाया गया, तो यह वहां मौजूद दर्जनों जीवों में सबसे अलग और अनोखी चमक लिए हुए था। वैज्ञानिकों को तुरंत एहसास हुआ कि यह कोई साधारण ऑक्टोपस नहीं है। इसकी बनावट और रंग-रूप ज्ञात प्रजातियों से अलग थे। शोध दल ने इसकी तस्वीरें अमेरिका के शिकागो स्थित फील्ड म्यूजियम की ऑक्टोपस विशेषज्ञ जेनेट वॉइट को भेजीं।

वॉइट ने कहा, "पहली नजर में ही मुझे लगा कि यह कुछ बेहद खास है। अपने पूरे करियर में मैंने ऐसा ऑक्टोपस कभी नहीं देखा था।"

सीटी स्कैन ने खोले अनदेखे रहस्य

लेकिन नई प्रजाति घोषित करने के लिए वैज्ञानिकों को इसके शरीर के कई हिस्सों की बारीकी से जांच करनी थी। समस्या यह थी कि उनके पास केवल एक ही नमूना था और उसे काटकर जांचना उसके लिए नुकसानदेह हो सकता था।

ऐसे में वैज्ञानिकों ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। फील्ड म्यूजियम की टीम ने माइक्रो-सीटी स्कैनिंग की मदद से ऑक्टोपस का थ्री डी मॉडल तैयार किया।

इस तकनीक में बिना जीव को काटे या नुकसान पहुंचाए हजारों एक्स-रे छवियों को जोड़कर शरीर के अंदरूनी अंगों और संरचनाओं का विस्तृत चित्र तैयार किया जाता है। स्कैन से वैज्ञानिकों को उसके मुंह, आंतरिक अंगों और अन्य महत्वपूर्ण संरचनाओं की स्पष्ट जानकारी मिली। इसके आधार पर पुष्टि हुई कि यह वास्तव में ऑक्टोपस की एक नई प्रजाति है।

जर्मनी के बॉन विश्वविद्यालय के शोधकर्ता अलेक्जेंडर जिग्लर के अनुसार, "इतने दुर्लभ नमूने में बिना किसी नुकसान के इतनी विस्तृत जानकारी मिलना बेहद असाधारण था।"

महासागर अब भी छिपाए हुए हैं अनगिनत रहस्य

नई प्रजाति की खोज केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह महासागरों की अब तक अनदेखी दुनिया की ओर भी इशारा करती है। जेनेट वॉइट, जिन्होंने ऑक्टोपस के विकासक्रम पर 40 वर्षों से अधिक समय तक काम किया है, उनका कहना है, "गहरे समुद्र में रहने वाले इन छोटे ऑक्टोपस को दुनिया में बहुत कम लोगों ने देखा है। मैं खुद को सौभाग्यशाली मानती हूं कि मुझे इनके साथ काम करने का मौका मिला।"

वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसी खोजें यह याद दिलाती हैं कि गैलापागोस के गहरे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का बड़ा हिस्सा आज भी अन्वेषण से अछूता है। हर नई प्रजाति हमें यह समझने में मदद करती है कि समुद्र की इस छिपी हुई दुनिया को संरक्षित करना क्यों जरूरी है।

बता दें कि गैलापागोस द्वीपसमूह पहले से ही अपने विशाल कछुओं और अनोखी समुद्री छिपकलियों के लिए दुनिया भर में मशहूर है, जो दुनिया में कहीं और नहीं पाए जाते। अब इस लिस्ट में यह नन्हा नीला ऑक्टोपस भी जुड़ गया है। यह नन्हा नीला ऑक्टोपस इस बात का जीवंत प्रमाण है कि महासागरों की अथाह और अंधेरी गहराइयों में आज भी अनगिनत रहस्य छिपे हैं, जिनसे मानवता का परिचय होना बाकी है।

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