भारत और दुनिया की बड़ी खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं. इस लाइव ब्लॉग को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं, ताकि ताजा खबरें आप तक पहुंचा सकें.- ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए अपनी शर्तें बताईं - ट्रंप का दावा, डील के लिए मिन्नत कर रहा है ईरान - रूसी अदालत ने ऑस्कर विजेता डॉक्यूमेंट्री 'मिस्टर नोबडी अगेंस्ट पुतिन' पर बैन लगाया - आईओसी ने महिला श्रेणी में ट्रांसजेंडर महिलाओं के हिस्सा लेने पर पाबंदी लगाई - यूरोप के जलवायु लक्ष्यों पर भी मंडरा रहा है ईरान युद्ध का खतरा - दुनियाभर में मौजूद हैं करीब 10,000 परमाणु हथियार - इन्वेस्टमेंट ऐप्स को वेरिफाइड बैज देगा गूगल, देखकर ही लगाएं पैसा - विपक्ष ने कहा- जनता एलपीजी के लिए परेशान, सरकार बोली- कोई कमी नहीं - चीनी विदेश मंत्री बोले, भारत और चीन एक दूसरे के लिए खतरा नहीं - कोर्ट में दोबारा पेश किए जाएंगे निकोलस मादुरो, अमेरिका ले जाने के बाद से दूसरी पेशी - उत्तर कोरिया पहुंचे बेलारूस के राष्ट्रपति, किम जोंग के साथ की दोस्ती की संधि - होटल और रेस्तरां ने एलपीजी चार्ज लगाया, तो हो सकती है कार्रवाई - यूक्रेन के ड्रोन हमलों में रूस के अहम पेट्रोलियम निर्यात केंद्र को नुकसान - नेपाल के पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश रूसी अदालत ने ऑस्कर विजेता डॉक्यूमेंट्री 'मिस्टर नोबडी अगेंस्ट पुतिन' को बैन किया रूस की एक अदालत ने फिल्ममेकर पावेल तुलानकिन की ऑस्कर विजेता डॉक्यूमेंट्री 'मिस्टर नोबडी अगेंस्ट पुतिन' पर बैन लगा दिया है.
यह फिल्म रूस में कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों पर उपलब्ध है. सरकारी वकीलों ने कोर्ट में दलील दी थी कि फिल्म, रूसी नेतृत्व और यूक्रेन युद्ध की एक नकारात्मक छवि को बढ़ावा देती है. पावेल एक टीचर और वीडियो कॉर्डिनेटर हैं. उन्होंने स्कूल में देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रमों को फिल्माया था और छात्रों का इंटरव्यू किया था.
फिर उन्होंने अपनी डॉक्यूमेंट्री में दिखाया कि किस तरह बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी मैं सैन्यीकरण बढ़ रहा है. उन्होंने यूक्रेन युद्ध के बाद आए सामाजिक बदलावों को भी कैमरे में कैद किया. वह फुटेज के साथ रूस से भाग आए. उसी फुटेज को एडिट करके डॉक्यूमेंट्री बनाई गई. इस फिल्म और पावेल, दोनों की रूस में काफी निंदा हुई. इसे रूस विरोधी पश्चिमी दुष्प्रचार भी बताया गया.
आईओसी ने महिला श्रेणी में ट्रांसजेंडर महिलाओं के हिस्सा लेने पर पाबंदी लगाई इंटरनेशनल ओलंपिक कमिटी (आईओसी) ने ट्रांसजेंडर महिलाओं के 'फीमेल कैटेगरी' में प्रतिस्पर्धा करने पर बैन लगा दिया है. आईओसी ने बताया कि उसने महिला श्रेणी में हिस्सा लेने की पात्रता पर नए नियम बनाए हैं. नए नियमों को आईओसी के कार्यकारी बोर्ड ने मंजूरी दे दी है. ये नियम पहले हो चुके मुकाबलों पर लागू नहीं होंगे.
इन्हें 2028 में हो रहे लॉस एंजेलिस ओलंपिक से लागू किया जाएगा. महिला की परिभाषा पर ऑस्ट्रेलिया की अदालत का बड़ा फैसला महिला श्रेणी में भाग लेने वाले सभी एथलीटों को एसआरवाई जीन स्क्रीनिंग टेस्ट करवाना होगा. यह जांच केवल एक बार करवानी होगी. यह बायोलॉजिकल सेक्स निर्धारित करने की एक जांच है.
'वर्ल्ड एथलेटिक्स काउंसिल' ने भी पिछले साल से महिला श्रेणी में हिस्सा लेने के लिए एसआरवाई जीन टेस्ट को अनिवार्य कर दिया था. आईओसी ने कहा है कि नए नियम "महिला श्रेणी में निष्पक्षता, सुरक्षा और ईमानदारी" सुनिश्चित करेंगे. जर्मनी में लैंगिक पहचान बदलने वाले नए कानून पर छिड़ी बहस इस संबंध में जारी अपने बयान में आईओसी ने कहा, "ओलंपिक खेलों या आईओसी के किसी और इवेंट में किसी भी महिला श्रेणी के लिए पात्रता, व्यक्तिगत और टीम खेलों समेत, अब बायोलॉजिकल महिलाओं के लिए सीमित है जो एक बार करवाए जाने वाले एसआरवाई जीन स्क्रीनिंग पर आधारित होगा." यह जांच लार, गाल में भीतर की ओर से लिए गए स्वॉब और खून के नूमने से होगी. आईओसी की अध्यक्ष क्रिस्टी कोवेंट्री ने कहा, "हमने जिस नीति की घोषणा की है, वह विज्ञान पर आधारित है और इसे मेडिकल विशेषज्ञों के नेतृत्व में तैयार किया गया है." भारत के पास 60 दिनों के लिए तेल भंडार मौजूद: केंद्र सरकार भारत सरकार ने गुरुवार, 26 मार्च को बयान जारी कर कहा है कि देश के पास 60 दिनों के लिए कच्चे तेल का भंडार मौजूद है.
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा, “भारत की कुल भंडार क्षमता 74 दिनों की है और पश्चिम एशिया संकट के 27वें दिन भी वास्तविक भंडार लगभग 60 दिनों का है.” बयान में कहा गया है कि अगले दो महीनों के कच्चे तेल की खरीद भी सुनिश्चित कर ली गई है. मंत्रालय ने बयान में बताया है कि घरेलू एलपीजी उत्पादन में 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इससे अब देश में हर दिन 50 टीएमटी एलपीजी का उत्पादन हो रहा है, जो देश की जरूरत का करीब 60 फीसदी है. मंत्रालय ने यह भी कहा है कि अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों से कई एलपीजी टैंकर कुल 800 टीएमटी एलपीजी लेकर भारत आ रहे हैं.
मंत्रालय ने दावा किया है कि महीने भर की एलपीजी आपूर्ति की व्यवस्था कर ली गई है. बयान में बताया गया है कि तेल कंपनियां हर दिन 50 लाख सिलेंडर डिलीवर कर रही हैं. इसके अलावा, जमाखोरी और कालाबाजारी से बचने के लिए कमर्शियल सिलेंडरों का आवंटन बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया गया है. मंत्रालय ने पीएनजी कनेक्शनों की जानकारी देते हुए बताया है कि अब तक देश में कुल 1.5 करोड़ पीएनजी कनेक्शन दिए जा चुके हैं. दुनियाभर में मौजूद हैं करीब 10,000 परमाणु हथियार एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में फिलहाल करीब 10,000 परमाणु हथियार हैं और इन सभी की कुल विस्फोटक क्षमता हिरोशिमा में गिराए गए परमाणु बम से करीब 1.35 लाख गुना ज्यादा है. ‘इंटरनेशनल कैंपेन टू अबॉलिश न्यूक्लियर वैपन्स’ (आईसीएएन) द्वारा 26 मार्च को रिलीज की गई रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है.
हिरोशिमा पर किए गए परमाणु हमले में करीब 1.40 लाख लोगों की मौत हुई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2017 से लगातार परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ रही है और पिछले साल 141 नए परमाणु हथियार जोड़े गए. कुल परमाणु हथियारों में से करीब 40 फीसदी बैलिस्टिक मिसाइलों, मोबाइल लॉन्चरों, पनडुब्बियों और बमवर्षक अड्डों पर लगे हुए हैं. बाकी रिजर्व में हैं.
दुनियाभर में करीब 2,500 परमाणु हथियार ऐसे भी हैं, जिन्हें रिटायर कर दिया गया है और अब नष्ट किया जाना है. आईसीएएन के मुताबिक, दुनिया में नौ देशों के पास परमाणु हथियार हैं. इनमें अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन, भारत, पाकिस्तान और उत्तर कोरिया शामिल हैं. उसने इस सूची में इस्राएल को भी रखा है.
हालांकि, इस्राएल ने इस मुद्दे पर चुप्पी बनाए रखी है. आईसीएएन ने बताया कि कुल हथियारों का 90 फीसदी हिस्सा अकेले अमेरिका और रूस के पास है. अमेरिकी परमाणु हथियार पांच अन्य देशों- तुर्की, इटली, बेल्जियम, जर्मनी और नीदरलैंड्स में भी तैनात हैं. यूरोप के जलवायु लक्ष्यों को भी चपेट में ले सकता है ईरान युद्ध से उपजा ऊर्जा संकट ईरान युद्ध शुरू हुए चार हफ्ते हो चुके हैं.
आयातित तेल और गैस पर भारी निर्भरता के कारण ऊर्जा संकट से यूरोप परेशान है. ऊर्जा कीमतों में जिस कदर उछाल आया है, उसे देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि यूरोपीय संघ (ईयू) को अपनी जलवायु नीतियों और भू-राजनीतिक लक्ष्यों को कुछ सिकोड़ना पड़ सकता है. इसके कारण ईयू की ऊर्जा रणनीति लंबे समय तक प्रभावित हो सकती है. जर्मनी में उत्सर्जन घटा लेकिन यूरोपीय संघ के लक्ष्य तक नहीं पहुंचा ईयू की करीब आठ फीसदी एलएनजी पश्चिम एशिया से आती है और होरमुज स्ट्रेट के ब्लॉक होने की वजह से यह आपूर्ति बाधित है.
युद्ध शुरू होने से अब तक, गैस कीमतों के यूरोपीय बेंचमार्क में 60 प्रतिशत से अधिक का उछाल आया है. 2022 में यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद ऊर्जा संकट की गंभीरता को देखते हुए ईयू ने अक्षय ऊर्जा उत्पादन में काफी इजाफा किया है. पिछले साल पहली बार जीवाश्म ईंधनों की तुलना में पवन और सौर ऊर्जा से ज्यादा बिजली पैदा हुई. हालांकि, गैस की जरूरत अब भी काफी ज्यादा है.
ब्लॉक की कुल ऊर्जा खपत में 20 प्रतिशत हिस्सा गैस का है. ईयू-मर्कोसुर व्यापार समझौते का पर्यावरण पर क्या असर होगा यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप ने रूस पर निर्भरता काफी कम की है, मगर अब वह अमेरिकी सप्लाई पर काफी निर्भर हो गया है. रॉयटर्स के मुताबिक, 2025 में ईयू की तकरीबन 60 प्रतिशत एलएनजी अमेरिका से आई. 13 प्रतिशत के साथ रूस दूसरा बड़ा स्रोत है.
यानी, भले ही यूरोप का गैस बाजार 2022 से काफी अलग दिखता हो मगर दूसरे देशों पर निर्भरता के कारण बाहरी झटकों से यह सुरक्षित नहीं है. ऐसे में आगामी महीनों में यूरोप को कुछ मुश्किल फैसले लेने पड़ सकते हैं. इनमें जलवायु लक्ष्यों से कुछ समझौता करना भी शामिल हो सकता है. इन्वेस्टमेंट ऐप्स को वेरिफाइड बैज देगा गूगल, उसे देखकर ही लगाएं पैसा भारत में बीते सालों में मोबाइल ऐप्स के जरिए शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड आदि में निवेश करने का चलन बढ़ा है.
जीरोधा, ग्रो और एंजल वन जैसी ऐप्स के पास इस बाजार की बड़ी हिस्सेदारी है. इसी बात का फायदा उठाते हुए कई बार इन ऐप्स से मिलती-जुलती फर्जी ऐप्स बनाई जाती हैं और जब लोग उन ऐप्स के जरिए निवेश करते हैं, तो उनका पैसा साइबर ठगों के पास चला जाता है. लोगों को इस तरह की धोखाधड़ी से बचाने के लिए गूगल ने अपने प्ले स्टोर पर इन्वेस्टमेंट ऐप्स को लेबल करने का फैसला लिया है. सेबी (सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड) के पास पंजीकृत ब्रोकरेज ऐप्स को गूगल की ओर से वेरिफाइड बैज दिया जाएगा.
इसे देखकर लोग वैध ऐप्स की पहचान कर सकेंगे. गूगल के मुताबिक, अब तक आर्थिक सेवाओं से जुड़ी करीब 600 ऐप्स को वेरिफाइड बैज दिया चुका है. अब लोग वे प्ले स्टोर से कोई भी इन्वेस्टमेंट ऐप डाउनलोड करने से पहले उसका लेबल देख सकते हैं. वेरिफाइड बैज मौजूद होने पर ही कोई ऐप डाउनलोड करने के लिए सुरक्षित मानी जा सकती है.
सेबी ने कहा है कि फर्जी ऐप्स के विज्ञापनों पर लगाम लगाने के लिए भी गूगल और मेटा से बातचीत हो रही है. सेबी ने आगाह किया है कि फर्जी ऐप्स आमतौर पर जल्दी और ऊंचे रिटर्न का लालच देकर लुभाती हैं. ट्रंप का दावा, डील की "भीख" मांग रहा है ईरान; नाटो पर भी निशाना साधा अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान को वार्ता के लिए "जल्द गंभीर हो जाने" की चेतावनी दी है. साथ ही, ट्रंप ने एक बार फिर युद्ध में शामिल ना होने के लिए नाटो सहयोगियों की आलोचना की.
ईरानी अधिकारियों के खुलकर इनकार करने के बाद भी ट्रंप बार-बार कह रहे हैं कि ईरान, युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका से बातचीत कर रहा है. ईरान डील के लिए बेताब है, यह दावा करते हुए 26 मार्च को एक सोशल पोस्ट में उन्होंने लिखा, "ईरानी वार्ताकार बहुत अलग और अजीब हैं. वो हमसे डील करने की भीख मांग रहे हैं, जो कि उन्हें करना भी चाहिए क्योंकि सैन्य रूप से उनको मिटा दिया गया है. वापसी की शून्य संभावना है और फिर भी सार्वजनिक तौर पर वे कह रहे हैं कि हम बस प्रस्ताव को देख रहे हैं.
गलत!!!" ईरानी तेल की खरीद पर ट्रंप प्रशासन ने दी 30 दिनों की ढील इससे आगे ट्रंप ने नसीहत दी कि "बेहतर है कि ईरान जल्द गंभीर हो जाए, इससे पहले कि बहुत देर हो. क्योंकि अगर ऐसा होगा, तो वापस मुड़ने की राह नहीं होगी और ना ही वो आकर्षक होगा!" बीते हफ्ते नाटो सहयोगियों को "कायर" कहने के बाद अब फिर ट्रंप ने कैपिटल अक्षरों से भरे सोशल पोस्ट में उनपर लक्ष्य साधा, "उस उन्मादी देश (ईरान) के मामले में मदद के लिए नाटो देशों ने कुछ भी नहीं किया है. संयुक्त राज्य अमेरिका को नाटो से कुछ भी नहीं चाहिए, लेकिन 'कभी मत भूलना' इस अहम वक्त को!" विपक्ष ने कहा- जनता एलपीजी के लिए परेशान, सरकार बोली- कोई कमी नहीं भारत की विपक्षी पार्टियों का कहना है कि जनता एलपीजी और पेट्रोल-डीजल के लिए परेशान हो रही है और लाइन में लगी है. मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, “न्यू इंडिया' कतार में है.” इस वीडियो में गैस सिलेंडर लेकर लाइन में लगे लोग और एक पेट्रोल पंप के बाहर लगी वाहनों की भीड़ दिखाई दे रही है.
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी ऐसी ही एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि जनता गैस और डीजल-पेट्रोल के लिए परेशान हो रही है. अखिलेश ने भारत समाचार चैनल की एक न्यूज रिपोर्ट भी साझा की है. इसमें कानपुर की एक दुकान में डीजल की भट्टी का इस्तेमाल होता दिख रहा है और दुकान मालिक बता रहे हैं कि उन्होंने दुकान में बनने वाली चीजों की संख्या घटा दी है. दुकानदार ने बताया कि उनकी दुकान में खस्ता, कचौरी और रसगुल्ले बनने बंद हो गए हैं और सिर्फ समोसे बनाए जा रहे हैं.
उधर, पेट्रोलियम मंत्रालय ने गुरुवार, 26 मार्च को दोहराया कि देश की ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह से सुरक्षित और स्थिर है. मंत्रालय ने कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है, सभी आउटलेट के पास पर्याप्त सप्लाई मौजूद है और वे सामान्य रूप से काम कर रहे हैं. मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे सिर्फ आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें और अफवाहें फैलाने से बचें. कोर्ट में दोबारा पेश किए जाएंगे निकोलस मादुरो, अमेरिका ले जाने के बाद से दूसरी पेशी वेनेजुएला से अगवा करके अमेरिका लाए गए अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को 26 मार्च को अदालत में पेश किया जा सकता है.
इसे संभावित मुकदमा शुरू किए जाने से पहले की शुरुआती कार्यवाही का हिस्सा बताया जा रहा है. मादुरो की कोर्ट में यह दूसरी पेशी होगी. जनवरी में जब पहली बार उन्हें न्यूयॉर्क कोर्ट ले जाया गया था, तब उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए खुद को निर्दोष बताया था. मादुरो ने अमेरिका पर अपने अपहरण का आरोप लगाया था.
दुनिया भर में अमेरिकी तख्ता पलट की कोशिशों का दागदार इतिहास महीनों से जारी तनाव के बाद 3 जनवरी की रात यूएस स्पेशल फोर्सेज ने एक स्पेशल ऑपरेशन किया. वो मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को राजधानी काराकस से बाहर निकालकर अमेरिका ले गए. तब से दोनों अमेरिका की जेल में हैं. उनपर लगाए गए आरोपों में "ड्रग आतंकवाद" शामिल है.
अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि मादुरो ने अपने पद का इस्तेमाल करके, ड्रग तस्करों के साथ मिलकर अमेरिका में कोकेन की तस्करी को संभव बनाया. ग्वाटेमाला से पनामा तक: अमेरिका ने कब-कब किया लैटिन अमेरिका में हस्तक्षेप वेनेजुएला में अमेरिका ने जो किया, उसे बहुत से आलोचक अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन मानते हैं. इस मसले में एक अहम सवाल यह है कि क्या राष्ट्राध्यक्ष के तौर पर मादुरो के पास इम्युनिटी थी और इसीलिए उन्हें किसी और देश ले जाकर मुकदमा नहीं चलाना चाहिए था. वेनेजुएला से पहले भी लैटिन अमेरिका में अमेरिकी हस्तक्षेप का लंबा इतिहास रहा है.
जी7 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक, एस जयशंकर भी ले रहे हैं हिस्सा जी7 देशों के विदेश मंत्रियों की फ्रांस में बैठक हो रही है. पश्चिम एशिया में जारी युद्ध पर अमेरिका और यूरोपीय देशों की असहमतियां कम करना इस बैठक के प्रमुख विषयों में शामिल है. ईरान युद्ध और इसके कारण पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट के अलावा यूक्रेन और गाजा भी एजेंडा में हैं. अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो 27 मार्च को बैठक के दूसरे दिन आएंगे.
ईरान युद्ध शुरू होने के बाद रुबियो की यह पहली विदेश यात्रा होगी. ट्रंप के करीबी ने कहा, इस्राएल के दवाब में किया ईरान पर हमला इस साल जी7 की अध्यक्षता फ्रांस के पास है. अपनी अध्यक्षता में वह किन विषयों को तरजीह दे रहा है, इस बारे में बताते हुए विदेश मंत्री जॉं नोएल बाओ ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा कि फ्रांस वैश्विक असंतुलन का मुद्दा उठाना चाहता है. विदेश मंत्री ने कहा कि यह असंतुलन दरअसल "तनाव और प्रतिद्वंदिता के उस स्तर को स्पष्ट करता है जिसे हम आज देख रहे हैं और जिनका हमारे नागरिकों पर बहुत ठोस असर पड़ता है." जी7 समूह में फ्रांस, जर्मनी, कनाडा, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं.
बतौर अध्यक्ष फ्रांस ने भारत, ब्राजील, यूक्रेन, सऊदी अरब और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रियों को भी आमंत्रित किया है. भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर बैठक में हिस्सा लेने फ्रांस पहुंच चुके हैं. वह जी7 बैठक के अलावा द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे.
उधर, ईरान में युद्ध खत्म करने की सुगबुगाहट वाकई शुरू हुई भी है कि नहीं, इसपर काफी उलझन है. दोनों पक्षों के सार्वजनिक रुख में विरोधाभास है. राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप दावा कर रहे हैं कि ईरान के साथ संघर्षविराम समझौते पर बातचीत हो रही है, जबकि ईरान इससे इनकार कर रहा है. अमेरिका की शर्तों के जवाब में ईरान ने भी अपनी शर्तें रखी हैं.
ट्रंप एक तरफ कह रहे हैं कि बात हो रही है, तो वहीं अमेरिकी सैनिकों को मध्यपूर्व भेजने की बात भी सामने आ रही है. होटल और रेस्तरां ने एलपीजी चार्ज लगाया, तो हो सकती है कार्रवाई भारत के केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने एडवायजरी जारी करते हुए कहा है कि होटल और रेस्तरां एलपीजी चार्ज जैसा कोई भी अतिरिक्त शुल्त बिल में नहीं जोड़ सकते हैं. प्राधिकरण का कहना है कि ऐसा करने वाले होटल या रेस्तरां के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है. सीसीपीए ने 25 मार्च को जारी की गई एडवायजरी में कहा कि ईंधन, गैस और बिजली आदि पर होने वाला खर्च, व्यवसाय चलाने की लागत का हिस्सा है.
खाद्य पदार्थों का मूल्य तय करते वक्त इन कीमतों का ध्यान रखा जा सकता है. यानी, होटल और रेस्तरां मैन्यू में खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ा सकते हैं लेकिन अलग से इसके लिए कोई मूल्य नहीं ले सकते. पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होरमुज स्ट्रेट के बंद होने के चलते भारत के एलपीजी आयात में कमी आई है. इसका असर उद्योग-धंधों के अलावा, होटल-रेस्तरां जैसे व्यवसायों पर भी पड़ा है.
उन्हें एलपीजी गैस की व्यवस्था करने के लिए ज्यादा जद्दोजहद करनी पड़ रही है और कई बार अधिक दाम भी चुकाना पड़ रहा है. ऐसे में कई होटल-रेस्तरां ने उपभोक्ताओं से एलपीजी चार्ज लेना शुरू कर दिया था, जिसकी जानकारी मिलने के बाद सीसीपीए ने ऐसा न करने की एडवायजरी जारी की है. चीनी विदेश मंत्री बोले, भारत और चीन एक दूसरे के लिए खतरा नहीं चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि भारत और चीन एक दूसरे के लिए खतरा नहीं हैं और “दोनों देश प्रतिस्पर्धियों की बजाय साझेदार हैं.” न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, वांग यी ने चीन में भारत के राजदूत प्रदीप कुमार रावत से कहा कि दोनों देशों के संबंध सही रास्ते पर हैं. और, बीजिंग पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग को बढ़ाने के लिए नई दिल्ली के साथ काम करने को तैयार है.
वांग यी ने भारत-चीन संबंधों के विकास में प्रदीप कुमार रावत के प्रयासों और योगदान की भी सराहना की. चीन में भारतीय राजदूत के तौर पर प्रदीप कुमार रावत का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. चीनी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान चीन के मजबूत समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों का स्थिर विकास, दोनों पक्षों के हित में है और वैश्विक महत्व भी रखता है.
उन्होंने आगे कहा कि भारत भी चीन के साथ सहयोग और समन्वय बढ़ाने का इच्छुक है. भारत ने वरिष्ठ राजनयिक विक्रम दुरईस्वामी को चीन में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया है. दुरईस्वामी 1992 बैच के भारतीय विदेश सेवा अधिकारी हैं. वे वर्तमान में ब्रिटेन में भारतीय उच्चायुक्त के पद पर कार्यरत हैं.
विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रेस रिलीज में बताया है कि वे जल्द ही अपना नया पद संभालेंगे. हालांकि, इसकी कोई तारीख नहीं बताई गई है. उत्तर कोरिया पहुंचे बेलारूस के राष्ट्रपति, किम जोंग के साथ की दोस्ती की संधि उत्तर कोरिया और बेलारूस में "दोस्ती और सहयोग" नाम की एक संधि हुई है. 25 मार्च को दोनों देशों के नेताओं, उत्तर कोरिया के किम जोंग उन और बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जांडर लुकाशेंको ने इस संधि पर दस्तखत किए.
24 मार्च को लुकाशेंको पहली बार उत्तर कोरिया पहुंचे, जहां किम जोंग उन ने उनका भव्य स्वागत किया. उत्तर कोरिया ने दागीं 10 बैलिस्टिक मिसाइलें इन दोनों देशों में कई समानताएं हैं. दोनों रूस के छेड़े गए यूक्रेन युद्ध में मॉस्को का समर्थन करते हैं. माना जाता है कि जंग में उत्तर कोरिया के करीब 2,000 सैनिक मारे जा चुके हैं.
यूक्रेन युद्ध में समान स्टैंड के अलावा दोनों ही देशों पर पश्चिमी देशों ने आर्थिक प्रतिबंध लगाए हुए हैं और दोनों पर ही मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का आरोप है. संधि के मौके पर दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के लिए समर्थन जताया. राष्ट्रपति लुकाशेंको ने कहा, "वैश्विक बदलाव की इस आधुनिक सच्चाई के बीच, ऐसे समय में जब दुनिया की मुख्य शक्तियां अंतरराष्ट्रीय कानून के मानकों की खुलेआम अनदेखी करती हैं और उनका उल्लंघन करती हैं, स्वतंत्र देशों को अपनी संप्रभुता की रक्षा और अपने नागरिकों की बेहतरी के प्रयासों को मजबूती देने के लिए ज्यादा करीबी सहयोग करना चाहिए." वहीं, किम ने कहा, "हम बेलारूस पर पश्चिमी देशों के अवैध दबाव का विरोध करते हैं और बेलारूस के नेतृत्व द्वारा अपनी सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता व आर्थिक विकास के लिए उठाए जा रहे कदमों का समर्थन करते हैं." दूसरे विश्व युद्ध के बाद से विदेशी धरती पर जर्मनी की पहली स्थायी सैन्य तैनाती इस पर बेलारूस के विदेश मंत्री माक्सिम रायशेंकोव ने बताया कि "दोस्ती और सहयोग" संधि के अलावा दोनों पक्ष खेती और सूचना समेत कई क्षेत्रों में परस्पर सहयोग करने पर सहमत हुए हैं. बेलारूस की सरकारी समाचार एजेंसी बेल्टा से बातचीत में उन्होंने कहा, "हमारी सबसे ज्यादा दिलचस्पी मित्रवत और सहयोगपूर्ण रिश्ते मजबूत करने में है.
यहां हमारे दोस्त हैं और वे हमारा इंतजार कर रहे हैं. उसी तरह, जैसे हम बेलारूस में उनकी प्रतीक्षा कर रहे हैं." नेपाल के पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश नेपाल में पिछले साल सितंबर में हुए भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए गठित एक पैनल ने अनुशंसा की है कि पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के खिलाफ “लापरवाही” का मुकदमा चलाया जाए, क्योंकि वे दर्जनों मौतों को रोकने में नाकाम रहे. पैनल ने माना है कि ओली ने प्रदर्शनों के पहले दिन कई घंटे तक हुई गोलीबारी को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया. इस गोलीबारी में कम-से-कम 19 युवा प्रदर्शनकारियों की मौत हुई थी.
नेपाल में हुए इन भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों को जेन-जी आंदोलन भी कहा गया था, क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में युवा शामिल थे. इन प्रदर्शनों के दौरान, दो दिन तक हिंसा हुई थी. पैनल के मुताबिक, हिंसा में कुल 76 लोग मारे गए थे और 2,500 से ज्यादा लोग घायल हुए. पैनल ने 25 मार्च की रात को जारी की गई 970 पन्नों की रिपोर्ट में कहा, "कार्यकारी प्रमुख होने के नाते...ओली को किसी भी अच्छी या बुरी बात के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए." पैनल ने नेपाल के तत्कालीन गृह मंत्री रमेश लेखक और पुलिस प्रमुख चंद्र कुबेर खपुंग को भी जिम्मेदार ठहराया है और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश की है.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अगर पैनल की अनुशंसा को मानते हुए इनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाता है और कोर्ट इन्हें दोषी मान लेता है तो इन तीनों को 10 साल कैद तक की सजा हो सकती है. हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि मुकदमा चलाने से पहले सरकार को इसकी आपराधिक जांच करवानी होगी. यूक्रेनी ड्रोन हमलों में रूस की तेल निर्यात क्षमता को बड़ा नुकसान यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण रूस की तेल निर्यात क्षमता पर बड़ा असर पड़ा है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, ड्रोन हमलों की चपेट में आकर रूसी निर्यात का कम-से-कम 40 फीसदी हिस्सा प्रभावित हुआ है.
अलेक्सांदर ड्रोजदेंको, लेनिनग्राद ओब्लास्ट के गवर्नर हैं. उन्होंने टेलिग्राम चैनल पर बताया कि उत्तरी लेनिनग्राद क्षेत्र के ऊपर 20 से ज्यादा ड्रोन गिराए गए. गवर्नर ड्रोजदेंको ने कहा, "कीरिशी जिले पर हमले को नाकाम किया जा रहा है. औद्योगिक क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है." ईरान युद्ध से भारत-चीन-यूरोप पर तगड़ा असर, रूस को फायदा गवर्नर ने यह साफ नहीं किया कि इंडस्ट्रियल एरिया का कौन सा हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है.
मगर लेनिनग्राद ओब्लास्ट के कीरिशी शहर में केआईएनईएफ नाम का प्लांट है. यह रूस की सबसे विशाल और सबसे अहम तेल रिफाइनरियों में है. रॉयटर्स ने उद्योग से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया कि साल 2024 में इस रिफाइनरी ने प्रति दिन 350,000 बैरल तेल प्रॉसेस किया. इसमें करीब 20 लाख टन पेट्रोल, लगभग 70 लाख टन डीजल, 60 लाख टन से ज्यादा फ्यूल ऑयल और 6 लाख टन तारकोल का उत्पादन शामिल था.
रूस की कुल तेल रिफाइनिंग मात्रा में इसकी हिस्सेदारी 6.6 प्रतिशत थी. पिछले साल भी यूक्रेन ने इस प्लांट को कई बार निशाना बनाया था. इससे पहले 25 मार्च को रूसी अधिकारियों ने बताया था कि यूक्रेनी ड्रोन हमले के कारण रूस के ऊस्ट-लूगा में आग लगी. खबरों के मुताबिक, बाल्टिक सागर के बंदरगाह ऊस्ट-लूगा और प्रिमोर्स्क से भी तेल और तेल उत्पादों की लोडिंग बंद करनी पड़ी है.
ये दोनों भी लेनिनग्राद ओब्लास्ट में हैं और रूस के पेट्रोलियम निर्यात का बड़ा केंद्र हैं. मॉस्को टाइम्स ने गवर्नर ड्रोजदेंको के हवाले से बताया कि अकेले प्रिमोर्स्क बंदरगाह ही प्रति दिन 10 लाख बैरल से ज्यादा तेल का निर्यात कर सकता है. वहीं, ऊस्ट-लूगा पोर्ट की निर्यात क्षमता करीब 7 लाख बैरल तेल प्रति दिन है. ईरान युद्ध के कारण पहले ही वैश्विक ऊर्जा बाजार बेहद दबाव में है.
