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ईरान ने अमेरिका से बातचीत के लिए नया प्रस्ताव भेजा

ईरान ने अमेरिका से बातचीत के लिए नया प्रस्ताव भेजा

DW 1 week ago
भारत और दुनिया की बड़ी खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं. इस लाइव ब्लॉग को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं, ताकि ताजा खबरें आप तक पहुंचा सकें.आंग सान सू की जेल से निकल कर नजरबंदी में पश्चिम बंगाल: टीएमसी ने लगाए ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोप, अधिकारियों ने कहा 'स्ट्रॉन्ग रूम पूरी तरह सुरक्षित' जर्मनी में दक्षिणपंथी हिंसा के सबसे ज्यादा मामले, 9 साल में सबसे ज्यादा 2025 में मध्य प्रदेश: जबलपुर के बरगी डैम में क्रूज पलटा, 9 लोगों की मौत वेनेजुएला ने अमेरिकी तेल कंपनियों के साथ समझौता किया जर्मनी में टैक्स छूट लागू होने के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम घटे तुर्की में मई दिवस पर मार्च करने निकले सैकड़ों मजदूर हिरासत में गाजा के लिए सहायता ले जा रहे बेड़े को ग्रीस ले जाया गया भारत: एप्पल ने सीसीआई पर अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने का आरोप लगाया जर्मनी के करीब आधे यहूदियों ने एंटीसेमिटिक घटनाओं कि रिपोर्ट दी भारत के प्रवासी नागरिकों से जुड़े नियमों में बदलाव, नाबालिगों के पास दो पासपोर्ट पर रोक राहुल गांधी बोले, मैंने कहा था चुनाव के बाद महंगाई की गर्मी आएगी 2026 के गोएथे मेडल के विजेता साल 2026 का गोएथे मेडल तीन लोगों को यूरोप की संस्कृति में योगदान के लिए देने की घोषणा हुई है.
अलग अलग क्षेत्रों के ये तीन लोग हैं आर्वो पेर्ट, अनिता राजा और प्रोद्रोमोस सिनिकोरिस. संगीत, साहित्य और थिएटर से जुड़े इन तीनों लोगों की इस बात पर व्यापक सहमति दिखती है कि उनका काम सांस्कृतिक समझ को बढ़ाने में और संस्कृति के जरिए संपर्क जोड़ने में योगदान दे सकता है. 1935 में एस्तोनिया में जन्मे आर्वो पेर्ट समकालीन संगीत के दुनिया भर में सबसे ज्यादा संगीत आयोजनों में हिस्सा लेने वाले कंपोजर हैं. प्रोद्रोमोस सिनिकोरिस के मां बाप आप्रवासी कामगार के रूप में जर्मनी आए और वुपरटाल में उनका जन्म 1981 में हुआ.

थिएटर डायरेक्टर और एक्टर के रूप में उन्होंने समकालीन ग्रीक और यूरोपीय थिएटर में उन्होंने अपनी मजबूत जगह बनाई है. गोएथे मेडल हर सालइसी तरह के योगदान के लिए दिया जाता है. इसी तरह कई सालों तक साहित्यिक अनुवादक के रूप में अनिता राजा ने जर्मन भाषा के साहित्य को इटैलियन भाषी लोगों तक पहुंचाने में अनिता राजा ने अहम भूमिका निभाई है. अनिता राजा ने जिन लेखकों की किताबों का अनुवाद किया है उनमें क्रिष्टा वोल्फ, फ्रांत्स काफ्का, इंगेबोर्ग बाखमान और गेओर्ग बुखनर भी शामिल हैं.

ईरान ने अमेरिका से बातचीत के लिए ताजा प्रस्ताव भेजा ईरान ने अमेरिका से बातचीत के लिए मध्यस्थ पाकिस्तान को एक नया प्रस्ताव भेजा है. ईरान की सरकारी मीडिया ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए का कहना है, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने पाकिस्तान को अमेरिका के साथ बातचीत में मध्यस्थ के रूप में बातचीत के लिए एक नया प्रस्ताव भेजा है." हालांकि इस प्रस्ताव में क्या शामिल किया गया है इसकी जानकारी नहीं दी गई है. ईरान और अमेरिका ने करीब 40 दिन की लड़ाई के बाद संघर्ष विराम किया और फिर एक दौर की बातचीत दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने की.

उसके बाद से यह बातचीत रुकी हुई है. इस बीच अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी कर दी है. दूसरी तरफ ईरान युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने होर्मुज के रास्ते से जहाजों का गुजरना मोटे तौर पर बंद कर दिया है. युद्ध शुरु होने के बाद यहां से इक्के दुक्के जहाज ही गुजर सके हैं.

शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने टेलिफोन पर सऊदी अरब, कतर, तुर्की, इराक और अजरबाइजान के विदेश मंत्रियों से बात की. ईरानी विदेश मंत्रालय से जारी बयान के मुताबिक इस बातचीत में "इस्लामिक रिपब्लिक के युद्ध खत्म करने के लिए ताजा कदमों पर चर्चा हुई." सांसदों का साथ छोड़ने के बाद आप सरकार ने पंजाब में पेश किया विश्वास प्रस्ताव पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा के विशेष सत्र में विश्वास प्रस्ताव पेश किया. यह प्रस्ताव चर्चा के बाद पास हो गया. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब हाल ही में पार्टी के सात राज्यसभा सांसद इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए.

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और सरकार स्थिर रूप से काम कर रही है. केजरीवाल का पत्र और न्यायपालिका की साख का संकट! मुख्यमंत्री ने अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि आप के टूटने और विधायकों के पाला बदलने की बातें केवल भ्रम फैलाने की कोशिश हैं. उन्होंने कहा कि पार्टी देश के कई राज्यों में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही है.

उन्होंने कहा, "जम्मू-कश्मीर से लेकर गोवा तक हमारी उपस्थिति है. डोडा में हमारा विधायक है, पंजाब में सरकार सफलतापूर्वक चल रही है, दिल्ली में हम विपक्ष में हैं, जबकि गुजरात और गोवा में भी हमारे विधायक हैं." 117 सदस्य वाले पंजाब विधानसभा में आप के पास 94 विधायकों का स्पष्ट बहुमत है. 24 अप्रैल को पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों-राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल ने पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने की घोषणा की थी. इन नेताओं ने आरोप लगाया था कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और मूल्यों से भटक गई है.

हिमंता सरमा के बयान से बांग्लादेश नाराज, भारतीय उच्चायुक्त को किया तलब बांग्लादेश सरकार ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की कथित टिप्पणियों को लेकर भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त पवन बधे को विदेश मंत्रालय तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है. ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, गुरुवार दोपहर हुई इस बैठक में बांग्लादेशी अधिकारियों ने हालिया सार्वजनिक बयानों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसे बयान द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. 'बांग्लादेशी घुसपैठिया' कहने से भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर पड़ रहा असर यह विवाद 26 अप्रैल को मुख्यमंत्री सरमा के उस बयान के बाद सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि असम में 20 विदेशी नागरिकों को पकड़ा गया और उन्हें "बांग्लादेश वापस भेजा गया." एक्स पर साझा पोस्ट में उन्होंने कथित तौर पर इन व्यक्तियों को अवैध घुसपैठिया बताते हुए सख्त भाषा का इस्तेमाल किया था, जिसे बांग्लादेश ने आपत्तिजनक और असंयमित करार दिया. 'विदेशियों' को उनके देश क्यों नहीं भेज पा रही है असम सरकार?

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के सार्वजनिक बयान “अपमानजनक” हैं और संवेदनशील द्विपक्षीय मुद्दों पर संयम बरतना बेहद जरूरी है. तुर्की में मई दिवस पर मार्च करने निकले सैकड़ों मजदूर हिरासत में तुर्की में मई दिवस के मौके पर प्रदर्शन कर रहे मजदूरों पर पुलिस की कार्रवाई के बाद 300 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है. अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर ये लोग ताकसिम स्क्वेयर पर जाना चाहते थे. अधिकारियों ने इस इलाके में भीड़ जुटाने पर रोक लगा दी थी.

दंगा नियंत्रण पुलिस ने भीड़ को तितर बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले और पानी की तेज बौछार का प्रयोग किया. स्थानीय मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक चौराहे की तरफ जाने वाली सड़क को बंद कर दिया गया था. हल्क टीवी पर दिखाई जा रही खबरों में लोगों को पुलिस की गाड़ियों में जबरन बिठाते देखा जा सकता है. वकीलों के संगठन प्रोग्रेसिव लॉयर्स एसोसिएशन ने हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या 300 से ज्यादा बताई है.

स्वतंत्र रूप से इन आंकड़ों की पुष्टि अभी नहीं हुई है. इस्तांबुल के गवर्नर कार्यालय ने पहले ही घोषणा की थी कि सुरक्षा कारणों से ताकसिम स्क्वेयर और आसपास के इलाकों में प्रदर्शन और मार्च की अनुमति नहीं है. अधिकारियों ने कुछ मेट्रो स्टेशन और शहर की कुछ प्रमुख सड़कों को भी एहतियातन बंद कर दिया था. मई दिवस के मौके पर ताकसिम स्क्वेयर पर रैली का तुर्की के मजूदर आंदोलन के लिए प्रतीकात्मक महत्व है.

हालांकि 2012 से ही यहां रैली करने पर प्रतिबंध लागू है. 1977 में यहां आंदोलन कर रहे मजदूरों पर अज्ञात बंदूकधारी ने गोली चला कर 34 लोगों की जान ले ली थी. मजदूरों के लिए उसके बाद इस जगह की अहमियत और बढ़ गई. हालांकि सरकार यहां प्रदर्शन की अनुमति नहीं देना चाहती है.

गाजा के लिए सहायता ले जा रहे बेड़े को ग्रीस ले जाया गया गाजा के लिए सहायता ले जा रहे नावों के जिस बेड़े को इस्राएली सेना ने रोक लिया था उसे ग्रीस के क्रीट द्वीप ले जाया गया है. ग्रीक तटरक्षकों की सुरक्षा में 175 कार्यकर्ताओं को क्रीट द्वीप पर उतार कर बसों के जरिए एथेरिनोलाकोस बंदरगाह पर ले जाया गया. इनमें ज्यादातर यूरोपीय देशों के नागरिक हैं. जब वे द्वीप पर पहुंचे तो कुछ कार्यकर्ताओं ने फलस्तीन के पक्ष में नारे भी लगाए.

इस्राएल के विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि तकरीबन 20 नावों पर सवार 175 कार्यकर्ता हैं. राहत सामग्री का बेड़ा तैयार करने वाले आयोजकों का कहना है कि कुल 211 कार्यकर्ता नावों में सवार थे. तुर्की के विदेश मंत्रालय का कहना है कि करीब 20 तुर्क नागरिक इस बेड़े में थे. इन्हें इस्राएली सेना पकड़ कर क्रीट द्वीप ले गई है, जहां से उन्हें तुर्की भेजा जाएगा.

विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है, "तीसरे देश के कुछ कार्यकर्ताओं को भी तुर्की भेजा जाएगा." 50 से ज्यादा नावों का एक बेड़ा बीते कुछ हफ्तों में फ्रांस, स्पेन और इटली से गाजा के लिए रवाना हुआ है. इसका मकसद गाजा की नाकेबंदी को तोड़ना और मानवीय सहायता फलस्तीनी इलाके में पहुंचाना है. इस्राएल गाजा के सभी प्रवेश द्वारों को नियंत्रित करता है. संयुक्त राष्ट्र और विदेशी गैर-सरकारी संगठन इलाके में सहायता सामग्री पहुंचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

अक्टूबर, 2023 में इस्राएल पर हमास के हमले के बाद से ही वहां सहायता पहुंचाना मुश्किल हो गया है. मंदिर उत्सव के दौरान हाथी का उत्पात, एक की मौत केरल के एर्नाकुलम के एक मंदिर के पास एक हाथी के बेकाबू हो जाने से अफरा-तफरी मच गई. मंदिर उत्सव के दौरान विश्राम के समय बंधा हुआ हाथी अचानक हिंसक हो गया और आसपास के इलाके में दौड़ने लगा. इस दौरान कई गाड़ियों को नुकसान पहुंचा और घनी आबादी वाले क्षेत्र में दहशत फैल गई. केरल में क्यों बढ़ रहा इंसान और हाथी के बीच का संघर्ष इस घटना में हाथी को लाने वाले ट्रक के चालक कोल्लम निवासी विष्णु की मौत हो गई. अधिकारियों ने बताया, हाथी को काबू में करने की कोशिश के दौरान वह हाथी के पैरों तले कुचल गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई. हाथी के हमले में एक महावत भी घायल हो गया, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है.

कई घंटों की मशक्कत के बाद वन विभाग, पशु चिकित्सकों और हाथी टास्क फोर्स की मदद से ट्रैंक्विलाइजर डार्ट, जंजीरों और रस्सियों के जरिए हाथी को काबू में किया गया. केरल में हाथी और इंसानों के बीच संघर्ष बीते कुछ सालों में बढ़ा है. इसकी वजह हाथियों के के आवास का सिमटना है. भारत: एप्पल ने सीसीआई पर अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने का आरोप लगाया एप्पल ने भारत के प्रतिस्पर्धा नियामक, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई), पर अपनी शक्तियों से आगे बढ़ने का आरोप लगाया है.

कंपनी का कहना है कि आईफोन ऐप्स मार्केट से जुड़े एक एंटीट्रस्ट मामले में सीसीआई उसे अपने वित्तीय विवरण जमा करने के लिए मजबूर कर रहा है, जबकि एप्पल ने पहले ही उस कानून को अदालत में चुनौती दी है जिसके तहत जुर्माना तय किया जाता है. यह जानकारी 24 अप्रैल को दायर एक गैर- सार्वजनिक अदालती दस्तावेज से सामने आई है, जिसकी समीक्षा समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने की. ट्रंप की धमकी: अमेरिका में नहीं बने स्मार्टफोन पर लगेगा 25 फीसदी टैरिफ यूरोप में एप्पल और मेटा पर 70 करोड़ यूरो का जुर्माना सीसीआई ने 2024 से एप्पल से वित्तीय जानकारी मांगी है, जो आम तौर पर जुर्माने की राशि तय करने के लिए जरूरी होती है. आयोग की जांच में यह निष्कर्ष निकाला गया था कि एप्पल ने अपनी प्रभुत्वशाली स्थिति का गलत इस्तेमाल किया.

एप्पल ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि जब तक दिल्ली हाईकोर्ट उसके द्वारा चुनौती दिए गए पेनल्टी कानून पर फैसला नहीं देता, तब तक सीसीआई को आगे की कार्रवाई नहीं करनी चाहिए. इस महीने सीसीआई ने एप्पल को अल्टीमेटम जारी करते हुए कहा था कि वह अपने वित्तीय दस्तावेज जमा करे और 21 मई को अंतिम सुनवाई तय की. इसके बाद एप्पल ने दिल्ली हाईकोर्ट से तत्काल दखल देने की मांग की है और 15 मई को इस मामले पर सुनवाई का अनुरोध किया है. एप्पल ने अपनी याचिका में कहा कि अंतिम सुनवाई तय करना अदालत के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करने जैसा है.

भारत में एप्पल के खिलाफ यह मामला उन कई एंटीट्रस्ट मामलों में से एक है, जिनका सामना कंपनी दुनिया भर में कर रही है. भारत एप्पल के लिए एक अहम बाजार है, जहां उसकी आईफोन की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 9 फीसदी हो गई है, जो दो साल पहले 4 फीसदी थी. हालांकि, एप्पल का कहना है कि वह भारत में गूगल के एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म की तुलना में अभी भी एक छोटा खिलाड़ी है, जो बाजार में दबदबा रखता है. जर्मनी के करीब आधे यहूदियों ने एंटीसेमिटिक घटनाओं कि रिपोर्ट दी जर्मनी में रहने वाले लगभग हर दूसरे यहूदी ने एंटी सेमिटिक घटना दर्ज कराई है.

इनमें अपमान, नफरती भाषण, धमकी या तोड़फोड़ शामिल है. जर्मनी के सेंट्रल काउंसिल ऑफ ज्यूज की रिपोर्य में यह बात सामने आई है. 102 में से 46 ने सर्वे में पिछले 12 महीने में इस तरह की घटनाओं को दर्ज कराने की बात की है. इनमें से आधे से ज्यादा मामले संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या फिर इमारतों पर ग्राफिटी से जुड़े हैं.

7 अक्टूबर, 2023 को इस्राएल पर आतंकवादी हमले के बाद यह तीसरा सर्वे था. यह हमला फलस्तीनी चरमपंथी गुट हमास ने किया था. यहूदी समुदाय के 68 फीसदी लोगों का कहा है कि उसके बाद से उनमें सुरक्षा का अहसास कम हुआ है. हालांकि 2024 में ऐसे लोगों की संख्या 84 फीसदी थी.

अक्टूबर, 2023 के बाद से जर्मनी में युवा यहूदी पहले से सतर्क क्यों रहने लगे हैं? 61 फीसदी समुदायों का कहना है कि अक्टूबर, 2025 में इस्राएल और हमास के बीच संघर्ष विराम के बावजूद जर्मनी में स्थिति नहीं बदली है. 18 फीसदी समुदाय स्थिति में सुधार, जबकि 13 फीसदी ने स्थिति और खराब होने की बात कही है. ईरान के खिलाफ फरवरी में अमेरिका और इस्राएल के हमले शुरू होने के बाद जर्मनी में यहूदी समुदाय के लोगों के लिए स्थिति काफी बिगड़ गई है.

सर्वे में शामिल 62 फीसदी समुदाय यही मानते हैं. सेंट्रल काउंसिल फॉर ज्यूज के प्रमुख जोसे शुस्टर का कहना है कि 2023 के हमलों के बाद जर्मनी में रह रहे यहूदियों के लिए गंभीर सुरक्षा चिंताओं की एक "नई सामान्य स्थिति" विकसित हुई है. भारत के प्रवासी नागरिकों से जुड़े नियमों में बदलाव, नाबालिगों के पास दो पासपोर्ट पर रोक भारतीय गृह मंत्रालय ने नागरिकता (संशोधन) नियम, 2026 की अधिसूचना जारी कर दी है. इसके तहत नागरिकता नियम, 2009 में बदलाव करते हुए ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) से जुड़ी सेवाओं और आवेदन प्रक्रियाओं में बदलाव किया गया है.

नए नियमों के अनुसार, अब सभी ओसीआई आवेदन केवल ऑनलाइन दाखिल किए जाएंगे. हालांकि फिजिकल ओसीआई कार्ड के साथ ई-ओसीआई कार्ड की व्यवस्था भी की गई है. संशोधित नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नाबालिग एक साथ भारतीय और विदेशी पासपोर्ट नहीं रख सकता. मंत्रालय ने दोहराया है कि ओसीआई कार्ड धारकों को मल्टीपल एंट्री, मल्टी-पर्पज लाइफटाइम वीजा तथा कुछ आर्थिक और शैक्षणिक सुविधाएं मिलती रहेंगी, लेकिन वोटिंग, चुनाव लड़ने या संवैधानिक पद रखने जैसे राजनीतिक अधिकार नहीं मिलेंगे.

सरकार ने फिर स्पष्ट किया कि ओसीआई दर्जा अधिकार नहीं, बल्कि एक विशेषाधिकार है, जिसे कानून उल्लंघन की स्थिति में वापस लिया जा सकता है. पिछले साल 11 अगस्त को जारी अधिसूचना का हवाला देते हुए गृह मंत्रालय ने कहा कि यदि किसी ओसीआई धारक को कम से कम दो साल की सजा होती है, या वह सात साल या उससे अधिक सजा वाले अपराध में चार्जशीट होता है, तो उसकी ओसीआई पंजीकरण रद्द की जा सकती है. ओसीआई योजना की शुरुआत 2005 में नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन के माध्यम से हुई थी. यह योजना उन व्यक्तियों के लिए है जो 26 जनवरी 1950 को या उसके बाद भारत के नागरिक रहे हों या उस तिथि को नागरिक बनने के पात्र रहे हों.

हालांकि, पाकिस्तान या बांग्लादेश के नागरिक रहे या उनसे जुड़े वंश वाले व्यक्ति इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं. मंत्रालय के अनुसार, नए नियम ओसीआई प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ अनुपालन और सुरक्षा प्रावधानों को मजबूत करने के उद्देश्य से लाए गए हैं. राहुल गांधी बोले, मैंने कहा था चुनाव के बाद महंगाई की गर्मी आएगी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि चुनाव के बाद महंगाई का असर दिखना शुरू हो गया है. उन्होंने कर्मशियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में भारी बढ़ोतरी का हवाला देते हुए कहा कि एक ही दिन में 993 रुपये की बढ़ोतरी हुई, जो एक दिन में अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि है.

गैस महंगी, मिट्टी का चूल्हा मजबूरी: महानगर से गांव लौट रहे हैं कई प्रवासी मजदूर ईरान युद्ध से भारत-चीन-यूरोप पर तगड़ा असर, रूस को फायदा उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि फरवरी से अब तक सिलेंडर की कीमत 1,380 रुपये बढ़ चुकी है, जो तीन महीनों में 81 प्रतिशत की बढ़ोतरी है. राहुल गांधी ने कहा, "इस कीमत में बढ़ोतरी का सीधा असर छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा. चाय की दुकानों, ढाबों, होटलों, बेकरी और मिठाई की दुकानों पर बढ़ते खर्च का बोझ अंत में आम लोगों की थाली तक पहुंचेगा." उन्होंने चेतावनी दी कि गैस के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी बढ़ सकती हैं. गैस की किल्लत से लकड़ी के चूल्हे पर वापस लौटने की मजबूरी इससे पहले भी राहुल गांधी ने दावा किया था कि विधानसभा चुनाव खत्म होते ही सरकार पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें बढ़ाएगी.

उन्होंने कहा कि जब वैश्विक स्तर पर कच्चा तेल सस्ता था, तब सरकार ने मुनाफा कमाया और अब महंगा होने पर उसका बोझ जनता पर डाल रही है. गांधी ने कहा कि आने वाले समय में लोगों को बढ़ती महंगाई का सामना करना पड़ सकता है. वेनेजुएला ने अमेरिकी तेल कंपनियों के साथ समझौता किया वेनेजुएला की सरकार ने तेल और गैस का उत्पादन बढ़ाने के लिए अमेरिकी कंपनियों से समझौते किए हैं. अमेरिका और वेनेजुएला के बीच स सात साल बाद विमान सेवा भी शुक्रवार को शुरू हो गई. अमेरिका के साथ निकोलस मादुरो के दौर में जो वेनेजुएला का तनाव बढ़ा था उसके खत्म होने का संकेत इन समझौतों को माना जा रहा है.

दक्षिण अमेरिकी देश का नेतृत्व फिलहाल अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगुएज के हाथ में है जो अमेरिका के दबाव में राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की मांगों को पूरा करने में सहयोग कर रही हैं. डॉनल्ड ट्रंप वेनेजुएला के तेल संसाधनों तक अमेरिकी कंपनियों की पहुंच हासिल करना चाहते हैं. रोड्रिगुएज मादुरो की शासन में उप राष्ट्रपति थीं. अमेरिकी सैनिकों ने इसी साल जनवरी में मादुरो का अपहरण कर अमेरिका ले गए थे.

रोड्रिगुएज के सामने अब दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देश की खराब अर्थव्यवस्था को संभालने की चुनौती है. वेनेजुएला में तेल का उत्पादन बढ़ाने की संभावना ऐसे वक्त में आई है जब ईरान युद्ध की वजह से दुनिया मध्यपू्र्व के देशों से तेल की सप्लाई घटने का संकट झेल रही है. नए समझौतों के मुताबिक अमेरिकी कंपनी हंट ओवरसीज ऑयल और क्रॉसओवर एनर्जी ओरिनोको बेल्ट में काम करेंगी. यहां पर वेनेजुएला के तेल भंडार मौजूद हैं.

रोड्रिगुएज का कहना है कि ये समझौते वहां किए गए हैं "जहां अमेरिका और वेनेजुएला के हित साथ आते हैं." वेनेजुएला ने ऊर्जी क्षेत्र में उदारीकरण की शुरुआत करने के बाद कई बहुराष्ट्रीय तेल कंपनियों के साथ समझौतों पर दस्तखत किए हैं इनमें शेवरॉन, एनी और रेप्सोल शामिल हैं. गुरुवार को काराकस आए अमेरिकी दूत जेरॉड ऑएगेन ने समझौतों पर दस्तखत के बाद कहा कि दोनों देशों के बीच सात सालों के बाद विमान सेवा शुरू कर दी गई है. शुक्रवार को एनवॉय एयरलाइंस ने अमेरिका से वेनेजुएला के लिए उड़ान भरी. जर्मनी में टैक्स छूट लागू होने के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम घटे जर्मनी में ईंधन पर टैक्स में कटौती के बाद नई दरें पेट्रोल पंपों पर शुक्रवार से लागू हो गई हैं.

जर्मन सांसदों ने पिछले महीने टैक्स में कटौती को मंजूरी दी थी. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से यहां पेट्रोल और डीजल के दाम काफी ज्यादा बढ़ गए हैं. टैक्स कटौती में यह छूट जून के आखिर तक के लिए दी गई है. जर्मन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन एडीएसी के पेट्रोल स्टेशन ऐप के मताबिक शुक्रवार सुबह कई जगहों पर पेट्रोल की कीमत 2 यूरो प्रति लीटर से नीचे चली गई. खास तौर से ई10 पेट्रोल की और कुछ जगहों पर डीजल की भी.

होर्मुज का रास्ता बंद होने की वजह से दुनिया भर में ऊर्जा की सप्लाई पर असर पड़ा है. जर्मनी में यह संकट यूक्रेन युद्ध के समय से ही शुरू हो गया था. ईरान युद्ध के बाद यहां मामला और ज्यादा बिगड़ गया. जर्मन सरकार ने 17 सेंट के टैक्स छूट की घोषणा की है.

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इसका पूरा फायदा ग्राहकों को मिलेगा या नहीं. विशेषज्ञों को उम्मीद है कि पेट्रोल पंपों पर इसका असर धीरे-धीरे नजर आएगा. इसकी एक वजह यह है कि टैक्स में छूट आधी रात के बाद टैंक फार्म या रिफाइनरियों से निकलने वाले तेल पर लागू होती हैं, पेट्रोल पंपों के पास पहले से जो स्टॉक मौजूद है उस पर नहीं. पश्चिम बंगाल: टीएमसी ने लगाए ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोप, अधिकारियों ने कहा 'स्ट्रॉन्ग रूम पूरी तरह सुरक्षित' कोलकाता में स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं के धरने और ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोपों के बीच चुनाव अधिकारियों ने गुरुवार शाम एक बयान जारी किया.

बयान में कहा गया कि खुदीराम अनुशीलन केंद्र स्थित सभी ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम में पूरी तरह सुरक्षित, सीलबंद और कड़ी निगरानी में हैं. चुनाव अधिकारियों ने साफ किया कि वहां केवल पोस्टल बैलेट की छंटनी की प्रक्रिया तय नियमों के तहत की जा रही थी, जिसे गलत तरीके से ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम खोलने के रूप में पेश किया गया. जर्मनी में बैलेट पेपर से ही क्यों होता है चुनाव, ईवीएम से क्यों नहीं? बेलियाघाटा विधानसभा क्षेत्र के रिटर्निंग ऑफिसर ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के संदर्भ में बयान जारी कर कहा कि खुदीराम अनुशीलन केंद्र परिसर में कुल 7 विधानसभा क्षेत्रों के ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम हैं और सभी को मतदान समाप्त होने के बाद उम्मीदवारों, उनके चुनाव एजेंटों और जनरल ऑब्जर्वर की मौजूदगी में सील किया गया था.

इससे पहले ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोपों को लेकर टीएमसी के नेता धरने पर बैठ गए थे. टीएमसी ने एक्स पर जारी एक बयान में बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए. पार्टी ने दावा किया कि बीजेपी चुनाव आयोग के साथ मिलकर बैलेट बॉक्स और ईवीएम में छेड़छाड़ कर रही है. टीएमसी ने इस कथित साजिश को "दिनदहाड़े लोकतंत्र की हत्या" करार देते हुए कहा कि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव की प्रक्रिया को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है.

म्यांमार की पूर्व नेता आंग सान सू की जेल से निकल कर नजरबंदी में म्यांमार की पूर्व नेता आंग सान सू की को जेल से निकल कर उनके घर में नजरबंद कर दिया गया है. स्थानीय मीडिया ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी. न्यू डे म्यांमार पोर्टल के मुताबिक इस घोषणा का म्यांमार की सरकारी मीडिया पर प्रसारण किया गया. राष्ट्रपति मिन आंग हाइंग ने सू की की बची हुई सजा को नजरबंदी में बदल दिया है.

राष्ट्रपति कार्यालय से जारी एक बयान का हवाला दे कर चैनल न्यूज एशिया ने यह खबर दी है. सरकारी प्रसारक एमआरटीवी ने एक तस्वीर दिखाई है जिसमें सू की को लकड़ी की एक बेंच पर बैठे देखा जा सकता है, उनके सामने दो और लोग बैठे हैं जिनकी पहचान नहीं बताई गई है. लंबे समय तक बाहरी दुनिया से कटे रहने के बाद जारी हुई यह उनकी पहली तस्वीर है. सू की की सेहत को लेकर हाल के दौर में चिंता तेजी से बढ़ी है.

म्यांमार के कार्यकर्ताओं ने उनके जिंदा होने के सबूत की मांग में अंतरराष्ट्रीय अभियान छेड़ दिया था. संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंटोनियो गुटेरेस ने गुरुवार को लिए गए इस फैसले का स्वागत किया है. 80 साल की सू की को फरवरी, 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद हिरासत में ले लिया गया. उसके बाद से जुंटा ने देश का शासन अपने हाथ में ले लिया.

उसके बाद उन्हें लंबे समय के लिए जेल की सजा हुई. इससे पहले भी वह लगभग 15 साल यंगून के अपने घर में नजरबंदी में बिता चुकी हैं. जुंटा का विरोध करने के लिए दुनिया भर में उन्हें ख्याति और 1991 का नोबेल शांति पुरस्कार भी मिला. बीते कुछ सालों में म्यांमार की जुंटा ने प्रमुख त्यौहारों के मौके पर हजारों कैदियों को माफी दी है. गुरुवार को भी एक बौद्ध पर्व के मौके पर ऐसी माफी दी गई. जिन कैदियों को पूरी तरह से माफ नहीं किया गया उनकी सजा घटाई गई. आंग सान सू की भी इनमें शामिल हैं.
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