भारत और दुनिया की बड़ी खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं. इस लाइव ब्लॉग को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं, ताकि ताजा खबरें आप तक पहुंचा सकें.'कॉकरोच जनता पार्टी' करेगी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग साल 2025 में जर्मनी आने वाले प्रवासियों की संख्या 13 फीसदी गिरी एनवीडिया ने लॉन्च किया एआई पावर वाला 'सुपरचिप' भारत में जी ग्रुप करेगा 2026 फीफा वर्ल्ड कप का प्रसारण अमेरिका ने कहा, ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए राहुल गांधी ने सीबीएसई पर हमले तेज किए, फीस पर उठाए सवाल कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन हमले, एयर डिफेंस ने संभाला मोर्चा म्यांमार में बारूद डिपो में विस्फोट, कम से कम 55 लोगों की मौत आरसीबी कप्तान रजत पाटीदार ने कोच को दिया लगातार दूसरे खिताब का श्रेय बांग्लादेश ने छह हफ्ते बाद फिर बढ़ाए तेल के दाम बांग्लादेश सरकार ने सोमवार, 1 जून को पेट्रोल और केरोसिन के दाम बढ़ा दिए.
केरोसिन की कीमत 130 टका से बढ़कर 135 टका प्रति लीटर हो गई है, जबकि पेट्रोल 135 टका से बढ़कर 140 टका प्रति लीटर हो गया है. वहीं, डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. करीब छह हफ्ते पहले भी बांग्लादेश ने ईंधन की कीमतें बढ़ाई थीं. इसके अलावा, सरकार बिजली की दरों में भी दोबारा बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही है.
लगातार महंगाई से जूझ रहे बांग्लादेश में यह कदम आम जनता पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है. अप्रैल में देश की महंगाई दर 9.04 प्रतिशत दर्ज की गई थी. इस बीच देश में गर्मी के मौसम में बिजली आपूर्ति की समस्या भी बढ़ी है. राजधानी ढाका और अन्य बड़े शहरों में बिजली कटौती अपेक्षाकृत कम रही है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में व्यवधान देखने को मिले हैं.
बांग्लादेश अपनी जरूरत का 95 फीसदी तेल आयात करता है, जिसमें से ज्यादातर मध्य पूर्व से आता है. वहां युद्ध छिड़ने के चलते बांग्लादेश का आयात खर्च बढ़ा है, जिससे उसके सरकारी खजाने पर दबाव बढ़ा है. ढाका ने मार्च में कहा था कि उसने ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं से निपटने के लिए बहुपक्षीय कर्जदाताओं से करीब दो अरब डॉलर के कर्ज की मांग की है. म्यांमार का भरोसेमंद पड़ोसी और विश्वसनीय साझेदार है भारत: पीएम मोदी म्यांमार के पूर्व सेना प्रमुख और मौजूदा राष्ट्रपति मिन आंग ह्लांग ने सोमवार, 1 जून को नई दिल्ली में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की.
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, पीएम मोदी ने म्यांमार के राष्ट्रपति से कहा, "भारत म्यांमार का भरोसेमंद पड़ोसी, विश्वसनीय साझेदार और संकट के समय में सबसे पहले सहायता देने वाला बना हुआ है." जायसवाल के मुताबिक, पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत म्यांमार में शांति और संवाद का समर्थन करने के लिए तैयार है. भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने रिपोर्टरों से कहा कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत में सीमा सुरक्षा और म्यांमार में गृहयुद्ध के प्रभाव के बारे में भी चर्चा हुई. मिसरी ने कहा, "म्यांमार में स्थिरता और शांति स्पष्ट रूप से भारत के लिए एक प्रमुख हित का विषय है." न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, दोनों देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ से संबंधित मुद्दों पर करीबी संपर्क बनाए रखने पर भी सहमति जताई है. दोनों देशों ने इन रणनीतिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने का भी लक्ष्य रखा है.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने पर भी सहमति जताई है. एनवीडिया ने लॉन्च किया एआई पावर वाला 'सुपरचिप' एनवीडिया ने सोमवार को ताइपे में आयोजित 'एनवीडिया जीटीसी' इवेंट में नए और शक्तिशाली चिप्स का अनावरण किया. यह तकनीक अब एडवांस एआई फीचर्स को सीधे लैपटॉप और डेस्कटॉप कंप्यूटरों के भीतर लेकर आएगी. एनवीडिया के संस्थापक और सीईओ जेन्सेन हुआंग ने माइक्रोसॉफ्ट के साथ साझेदारी की घोषणा करते हुए कहा कि दोनों कंपनियां मिलकर पर्सनल कंप्यूटर (पीसी) की परिभाषा को पूरी तरह बदलने जा रही हैं.
यह भी पढ़ें: कैसी है भारत की पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप 'विक्रम' कंपनी ने इस नए प्रोसेसर को 'आरटीएक्स स्पार्क' सुपरचिप का नाम दिया है, जो सीपीयू और जीपीयू दोनों की बेजोड़ क्षमताओं को एक साथ जोड़ता है. इस सुपरचिप की मदद से चलने वाले नए विंडोज लैपटॉप और डेस्कटॉप को कंपनी ने एआई पर्सनल कंप्यूटर कहा है. माइक्रोसॉफ्ट और डेल जैसी बड़ी टेक कंपनियां इस चिप से लैस अपने नए पीसी मॉडल्स को इसी साल के अंत तक बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं. कैलिफोर्निया स्थित एनवीडिया अब तक केवल बड़े डेटा सेंटर्स के लिए हाई-एंड एआई चिप्स बनाने में बेहद सफल रही थी, लेकिन इस नए कदम के साथ वह आम उपभोक्ताओं के रोजमर्रा के गैजेट्स में अपनी पैठ मजबूत कर रही है.
अपनी इसी अत्याधुनिक चिप तकनीक के दम पर एनवीडिया आज एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल की परेंट कंपनी अल्फाबेट को पछाड़कर दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी बन चुकी है. स्वीडन सरकार ने कहा, बच्चों के सामने फोन का इस्तेमाल कम करें माता-पिता स्वीडन की पब्लिक हेल्थ एजेंसी ने सोमवार को माता-पिता के लिए एक नई एडवाइजरी जारी की है, जिसमें उनसे बच्चों के साथ समय बिताते समय स्मार्टफोन से दूर रहने की अपील की गई है. स्वास्थ्य एजेंसी ने स्क्रीन के बढ़ते दुष्प्रभावों पर हुए नए शोध का हवाला देते हुए कहा, "जब आप अपने बच्चे के साथ हों, तो अपना फोन दूर रख दें. इसका उपयोग केवल तभी करें जब बेहद जरूरी हो." एजेंसी ने माता-पिता को खुद के लिए भी स्वस्थ स्क्रीन आदतें अपनाने की सलाह दी है, क्योंकि बड़े जो करते हैं, बच्चे वही सीखते हैं.
यह भी पढ़ें:कौन हैं ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के फाउंडर, जिनके एक्स अकाउंट को भारत में बैन कर दिया गया? शोध के नतीजों से यह साफ हुआ है कि माता-पिता द्वारा अत्यधिक फोन इस्तेमाल करने से बच्चों के साथ उनके रिश्ते और आपसी संवाद पर बहुत बुरा असर पड़ता है. इसके अलावा, जो माता-पिता स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताते हैं, उनके बच्चों में भी मोबाइल की लत लगने की संभावना काफी बढ़ जाती है. इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए स्वीडन सरकार ने घरों में "स्क्रीन-फ्री जोन" (जैसे बेडरूम और डिनर टेबल) बनाने की सिफारिश की है, जहां फोन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित हो.
एजेंसी की मनोचिकित्सक हेलेना फ्रिलिंग्सडॉर्फ का कहना है कि रोजमर्रा की जिंदगी में किए गए ये छोटे-छोटे बदलाव बच्चों की आदतों में बड़ा और सकारात्मक सुधार ला सकते हैं. डिजिटल लत के खिलाफ स्वीडन पिछले कुछ वर्षों से लगातार कड़े कदम उठा रहा है. इसी अभियान के तहत, सरकार ने स्कूलों में नौवीं कक्षा तक यानी 15-16 वर्ष की आयु तक के बच्चों के लिए स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर पहले ही पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है. ईंधन महंगा होने के चलते भारत में बढ़ी कार पूलिंग पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते भारत में ईंधन महंगा हुआ है और इससे देश में कार पूलिंग को बढ़ावा मिला है.
दुनिया के सबसे बड़े कारपूलिंग प्लेटफॉर्म ब्ला-ब्ला कार ने बताया है कि बढ़ती ऊर्जा कीमतों के चलते इस साल छह लाख नए ड्राइवर प्लेटफॉर्म पर आए हैं. यह कंपनी के अनुमान से करीब 20 फीसदी ज्यादा है. ब्ला-ब्ला कार के लिए भारत सबसे बड़े बाजारों में से एक है. साल 2025 में भारत में करीब दो करोड़ लोगों ने इसका इस्तेमाल किया था.
कंपनी ने बताया है कि इस साल 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इस्राएल के हवाई हमलों के बाद से उनके प्लेटफॉर्म को इस्तेमाल करने वाले यात्रियों की संख्या में 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. यह प्लेटफॉर्म ऐसे ड्राइवरों और यात्रियों को जोड़ता है जो एक ही ठिकाने की ओर जाना चाहते हैं. उदाहरण के तौर पर अगर कोई व्यक्ति अपनी कार से अकेला दिल्ली से लखनऊ जाता है तो वह इसकी जानकारी ब्ला-ब्ला कार के प्लेटफॉर्म पर डाल सकता है और लखनऊ जाने के इच्छुक अन्य यात्री तय किराया देकर उनके साथ सफर कर सकते हैं. हाल ही में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नागरिकों से ईंधन की बचत करने की अपील की है.
उन्होंने नागरिकों से सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने और कारपूलिंग करने की अपील की है. पिछले महीने करीब तीन किस्तों में भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें करीब पांच रुपये बढ़ गई हैं. दिल्ली में "शांतिपूर्ण प्रदर्शन" करेगी 'कॉकरोच जनता पार्टी', शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भारत में सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हुई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) अब सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रही है. इसके संस्थापक अभिजीत दीपके ने घोषणा की है कि वे शनिवार को दिल्ली में "शांतिपूर्ण प्रदर्शन" का नेतृत्व करेंगे.
उन्होंने एक्स पर एक वीडियो मैसेज में कहा कि वे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करेंगे. हाल ही में कई प्रमुख परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के आरोप लगे हैं, जिसके चलते धर्मेंद्र प्रधान आलोचना के केंद्र में आ गए हैं. ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ एक सोशल मीडिया कैंपेन है, जो भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के उस कथित बयान के विरोध में शुरू हुआ था, जिसमें उन्होंने सरकार की आलोचना करने वाले युवाओं को “कॉकरोच” और “पैरासाइट” कहा था. हालांकि, बाद में उन्होंने कहा कि उनकी बात का गलत मतलब निकाला गया.
इस बयान के विरोध में 30 वर्षीय अभिजीत दीपके ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की शुरुआत की. अभिजीत बॉस्टन यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएट हैं और फिलहाल अमेरिका में रह रहे हैं. अब उन्होंने प्रदर्शन करने के लिए भारत आने की घोषणा की है. उन्होंने अपने फॉलोअर्स से नई दिल्ली एयरपोर्ट पर आने की अपील की है.
उन्होंने कहा है कि वे प्रदर्शन के लिए पुलिस की अनुमित लेने के लिए जाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि उनके दोस्तों और परिजनों को डर है कि उन्हें एयरपोर्ट पर ही हिरासत में लेकर जेल भेजा जा सकता है लेकिन उन्हें उम्मीद है कि भारत आज भी एक लोकतांत्रिक देश है और उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अनुमति मिल जाएगी. संघर्ष विराम पर ईरान के शीर्ष वार्ताकार बोले- अमेरिकी नाकेबंदी समझौते के खिलाफ ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी और लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इस्राएल के तेज होते हमले यह साबित करते हैं कि वॉशिंगटन संघर्ष विराम समझौते का पालन नहीं कर रहा है. गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह नाकेबंदी और लेबनान में बढ़ते युद्ध अपराध इस बात के स्पष्ट प्रमाण हैं कि अमेरिका नियमों को ताक पर रख रहा है.
उन्होंने कड़ी चेतावनी देते हुए आगे लिखा, "हर विकल्प की एक कीमत होती है और उसका बिल चुकाना ही पड़ता है." गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल से एक नाजुक संघर्ष विराम लागू है, जिसे आगे भी बढ़ाया गया था, लेकिन दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर उल्लंघन के आरोप लगाते रहे हैं. अमेरिका ने 16 अप्रैल को ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी शुरू कर दी थी. यह सख्त कदम तब उठाया गया जब पाकिस्तान में दोनों देशों के बीच हुई उच्च-स्तरीय शांति वार्ता किसी ठोस नतीजे पर पहुंचे बिना ही विफल हो गई थी. इस अमेरिकी नाकेबंदी के जवाब में ईरान ने भी वैश्विक तेल और गैस परिवहन के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर रखा है.
ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका के साथ किसी भी भविष्य के शांति समझौते के लिए लेबनान में युद्धविराम होना अनिवार्य शर्त है, जहां इस्राएल लगातार ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य अभियान चला रहा है. दोनों देशों के इस अड़ियल रुख के कारण क्षेत्र में एक बार फिर बड़े युद्ध का खतरा मंडराने लगा है. भारत में जी ग्रुप करेगा 2026 फीफा वर्ल्ड कप का प्रसारण भारत के जी एंटरटेनमेंट ने सोमवार को कहा कि उसने 2026 फीफा वर्ल्ड कप को भारत में प्रसारित करने के अधिकार हासिल कर लिए हैं. समूह ने बताया कि उसने 2034 तक फीफा के 38 अन्य आयोजनों को प्रसारित करने के अधिकार भी हासिल किए हैं.
इस डील के आर्थिक विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं. यह समझौता फुटबॉल विश्वकप की शुरुआत से सिर्फ 10 दिन पहले हुआ है. इससे पहले तक भारत में फीफा विश्वकप के प्रसारण को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई थी क्योंकि रिलायंस समूह के साथ फीफा की डील नहीं हो सकी थी. रिलायंस ने ही 2022 फीफा विश्वकप का भारत में प्रसारण किया था.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, फीफा ने शुरुआत में भारत के प्रसारण अधिकारों के लिए 10 करोड़ डॉलर की मांग की थी. इसमें 2026 और 2030 विश्वकप के प्रसारण अधिकार शामिल थे. बाद में फीफा ने यह राशि घटाकर छह करोड़ डॉलर कर दी थी. रिलायंस के जियोस्टार ने प्रसारण अधिकारों के लिए दो करोड़ डॉलर का प्रस्ताव रखा था, जिसे फीफा ने खारिज कर दिया था.
सोनी समूह ने 2014 और 2018 में भारत में फीफा विश्वकप का प्रसारण किया था. उसने भी इस बार प्रसारण अधिकारों के लिए फीफा से बातचीत की थी लेकिन बोली नहीं लगाई थी. इस बार अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको फुटबॉल विश्वकप की मेजबानी कर रहे है. 11 जून को दो मैचों के साथ इसकी शुरुआत होगी.
साल 2025 में जर्मनी आने वाले प्रवासियों की संख्या 13 फीसदी गिरी जर्मनी के संघीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल (2025) देश में आने वाले प्रवासियों की संख्या में साल 2024 के मुकाबले 13 फिसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल करीब 14.8 लाख लोग जर्मनी आए, जबकि देश छोड़कर जाने वालों की संख्या 12.5 लाख रही. इस तरह आने और जाने वाले लोगों के बीच का अंतर यानी नेट माइग्रेशन गिरकर केवल 2,35,000 रह गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 45 प्रतिशत की भारी गिरावट को दर्शाता है. सांख्यिकी अधिकारियों ने बताया कि इस कमी की मुख्य वजह प्रमुख शरणार्थी देशों से आने वाले लोगों की संख्या का घटना है.
आंकड़ों के अनुसार, सीरिया से होने वाले शुद्ध प्रवासन में 67 प्रतिशत और अफगानिस्तान से होने वाले प्रवासन में 41 प्रतिशत की बड़ी कमी आई है, जबकि यूक्रेन से आने वाले प्रवासियों की संख्या भी 21 प्रतिशत तक कम हुई है. इसके अलावा, यूरोपीय संघ (ईयू) के अन्य देशों से भी जर्मनी आकर बसने वाले लोगों के रुझान में कमी देखी गई है. देश से बाहर जाने वाले जर्मन नागरिकों की बात करें, तो उन्होंने प्रवासन के लिए सबसे ज्यादा स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया और स्पेन को चुना. वहीं, खुद जर्मनी के भीतर भी विभिन्न राज्यों के बीच लगभग 9,96,000 लोगों ने अपने ठिकाने बदले.
इस आंतरिक प्रवासन में राजधानी बर्लिन को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा और वहां रहने वाले लोग दूसरे राज्यों में चले गए, जबकि इसके विपरीत ब्रांडेनबुर्ग राज्य को सबसे अधिक फायदा हुआ जहां अन्य राज्यों से आकर बसने वालों की संख्या सबसे ज्यादा रही. 'चूज फ्रांस' समिट में 93 अरब यूरो के निवेश का एलान फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों ने सोमवार को घोषणा की है कि उनके सालाना निवेश सम्मेलन 'चूज फ्रांस' में देश को 93 अरब यूरो (करीब 108 अरब डॉलर) का रिकॉर्ड विदेशी निवेश मिलने की उम्मीद है. इस ऐतिहासिक निवेश का एक बड़ा हिस्सा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डेटा सेंटर्स के विकास पर खर्च किया जाएगा. राष्ट्रपति माक्रों के मुताबिक, इस वार्षिक निवेश बैठक के तहत अब तक जितने पैसे देने का वादा किया गया है, वह पिछले आठ सालों में संयुक्त रूप से जुटाए गए 87 अरब यूरो से भी कहीं अधिक है.
माक्रों ने इस बड़ी कामयाबी पर खुशी जताते हुए कहा, "चूज फ्रांस का यह अकेला संस्करण 93 अरब यूरो के पुख्ता निवेश के एक रिकॉर्ड आंकड़े को धरातल पर उतारने में सक्षम बनाएगा, जिससे देश में 15,000 से अधिक नौकरियों के अवसर पैदा होंगे. यह स्पष्ट रूप से अब तक का सबसे बड़ा और एक ऐतिहासिक संस्करण है." यह भी पढ़ें:फुटबॉल क्लब की जीत के बाद पेरिस में हंगामा, 400 लोग हिरासत में इस साल मिले कुल निवेश प्रस्तावों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी जापानी टेक निवेशक सॉफ्टबैंक की है. माक्रों ने बताया कि इसमें सॉफ्टबैंक की ओर से अकेले 45 अरब यूरो का निवेश शामिल है. सॉफ्टबैंक के संस्थापक मासायोशी सोन ने जानकारी दी थी कि इस धनराशि को साल 2031 तक उत्तरी फ्रांस में आधुनिक डेटा सेंटर्स बनाने पर खर्च किया जाएगा.
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक निवेश का उपयोग न केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर्स के लिए किया जाएगा, बल्कि सेमीकंडक्टर्स (चिप निर्माण), महत्वपूर्ण खनिजों, ट्रैक्टर और ट्रकों के निर्माण, स्टील उद्योग और स्वास्थ्य सेवा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भी किया जाएगा. ईरान ने अमेरिका के साथ समझौते के लिए लेबनान में युद्धविराम की रखी शर्त ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ किसी भी समझौते में लेबनान में युद्धविराम का होना सबसे जरूरी शर्त है. इस बीच, इस्राएल द्वारा लेबनान में हमले तेज करने के बाद क्षेत्र में तनाव एक बार फिर गहरा गया है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने सोमवार को एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान देश का रुख स्पष्ट किया.
उन्होंने कहा, "हम इस बात पर जोर देते हैं कि युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से किए जाने वाले किसी भी समझौते के लिए लेबनान में युद्धविराम एक अनिवार्य शर्त है." इस्राएली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने लेबनान के भीतर और आगे तक बढ़ने की बात कही है. वहीं, इस्राएली सेना द्वारा मध्यकालीन ब्युफोर्ट किले पर नियंत्रण करने के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सोमवार को एक आपातकालीन बैठक करने जा रही है. इस स्थिति पर बकाई ने कहा कि ईरान जायोनी शासन (इस्राएल) के अवैध आक्रमण के खिलाफ लेबनान और प्रतिरोध (रेसिस्टेंस) का समर्थन करने के लिए हर संभव कदम उठाएगा." सोमवार को बकाई ने अमेरिका पर युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप भी लगाया. दरअसल, रविवार रात को दोनों देशों के बीच ताजा झड़प हुई थी, जिसमें अमेरिका ने दक्षिणी ईरान के एक बंदरगाह शहर में एक दूरसंचार टावर पर हमला किया था.
इसके जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उन्होंने उस अमेरिकी बेस को निशाना बनाया जहां से यह हमला शुरू हुआ था, हालांकि उन्होंने उस बेस के स्थान की जानकारी नहीं दी. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि वॉशिंगटन के साथ चल रही इस बातचीत में ईरान कोई विशेष रियायतें नहीं मांग रहा है, बल्कि वह अपने अधिकारों की पूर्ति चाहता है. इन मांगों में अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत विदेशों में फ्रीज (जब्त) की गई ईरानी संपत्तियों को मुक्त करना भी शामिल है. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम, जो वॉशिंगटन के लिए हमेशा से एक बड़ा विवादित मुद्दा रहा है, वह अभी इस बातचीत का हिस्सा नहीं है.
बकाई ने कहा, "परमाणु फाइल के विवरण पर अभी तक कोई बातचीत नहीं हुई है. इस चरण में, हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता केवल युद्ध को समाप्त करना है." फ्रांस ने अटलांटिक महासागर में रूस से जुड़ा तेल टैंकर जब्त किया फ्रांस की नौसेना ने अटलांटिक महासागर में प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाले एक रूसी संबंध वाले तेल टैंकर को रोककर उसे अपनी कस्टडी में ले लिया है. यूक्रेन युद्ध के बीच पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को कड़ाई से लागू करने के अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई है. फ्रांस ने सोमवार को घोषणा की कि उसकी नौसेना ने अटलांटिक महासागर में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र के बीच एक प्रतिबंधित तेल टैंकर पर धावा बोलकर उसका रास्ता बदल दिया.
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों ने बताया कि टैगोर नाम के इस जहाज को रविवार को रोका गया था. यह भी पढ़ें:भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद किया तो क्या नुकसान होगा? राष्ट्रपति माक्रों ने इस सफल सैन्य अभियान की जानकारी देते हुए कहा, "यह ऑपरेशन अटलांटिक महासागर में, खुले समुद्र पर, यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) सहित कई सहयोगियों के समर्थन से और समुद्र के कानून के सख्त अनुपालन के साथ चलाया गया था." माक्रों ने रूस को मिलने वाली आर्थिक मदद पर कड़ा रुख अपनाते हुए आगे कहा, "जहाजों के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचना, समुद्र के कानून का उल्लंघन करना और उस युद्ध को फाइनेंस (वित्तपोषित) करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है, जिसे रूस चार से अधिक वर्षों से यूक्रेन के खिलाफ लड़ रहा है." यह कोई पहला मामला नहीं है जब फ्रांस ने इस तरह की कार्रवाई की हो. हाल के महीनों में फ्रांसीसी नौसेना ने ऐसे कई संदिग्ध जहाजों को पकड़ा है.
हालांकि, अतीत में पकड़े गए कुछ जहाजों को भारी जुर्माना वसूलने के बाद छोड़ दिया गया था, लेकिन यूक्रेन में लंबे समय से खींच रहे युद्ध को देखते हुए अब पश्चिमी सरकारों ने प्रतिबंधों को और अधिक सख्ती से लागू करने का संकल्प लिया है. आरसीबी कप्तान रजत पाटीदार ने कोच को दिया लगातार दूसरे खिताब का श्रेय रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के कप्तान रजत पाटीदार ने कोच एंडी फ्लॉवर को लगातार दूसरी खिताबी जीत का श्रेय दिया है. उन्होंने कहा कि कोच फ्लॉवर ने टीम की संस्कृति को बदलने के लिए प्रयास किए, जिससे उन्हें आईपीएल का खिताब अपने पास बरकरार रखने में मदद मिली. रविवार रात विराट कोहली की 75 रन की नाबाद पारी की बदौलत आरसीबी ने लगातार दूसरी बार आईपीएल का खिताब जीता.
सोमवार सुबह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाटीदार ने कहा कि अब बेंगलुरु की नजरें लगातार तीन बार आईपीएल का खिताब जीतने वाली पहली टीम बनने पर है. टीम ने अपने दोनों खिताब पाटीदार की कप्तानी में ही जीते हैं. उन्होंने सोमवार, 1 जून को 32 साल के हो गए हैं. उन्होंने कहा कि आज मेरा जन्मदिन है और इससे बेहतर और कोई गिफ्ट नहीं हो सकता.
यह भी पढ़ें: क्या अब बिहार से निकलते रहेंगे धोनी-सूर्यवंशी जैसे क्रिकेटर उन्होंने कोच एंडी फ्लॉवर की तारीफ करते हुए कहा, “मैंने आईपीएल के पांच सीजन खेले हैं और वे सबसे अच्छे कोचों में से एक हैं.” उन्होंने बताया कि कोच उन खिलाड़ियों के साथ भी काफी वक्त बिताते हैं, जो अपना पहला सीजन खेल रहे होते हैं या जिन्हें प्लेइंग-11 में जगह नहीं मिल पाती. उन्होंने कहा, “वे सबसे बेहतरीन कोच हैं, जिनके मार्गदर्शन में मैं खेला हूं.” म्यांमार में बारूद डिपो में विस्फोट, कम से कम 55 लोगों की मौत म्यांमार के एक विद्रोही गुट के हथियार डिपो में हुए एक भीषण विस्फोट में कम से कम 55 लोगों की मौत हो गई है. धमाका इतना जोरदार था कि आसपास का पूरा इलाका पूरी तरह तबाह हो गया है और मलबे में बचे हुए लोगों की तलाश अब भी जारी है. यह हादसा म्यांमार के कौंग टाट गांव में रविवार दोपहर करीब 12 बजे हुआ.
इस इलाके पर म्यांमार की सेना के खिलाफ लड़ने वाले विद्रोही गुट 'ताअंग नेशनल लिबरेशन आर्मी' का नियंत्रण है. यह गांव चीन की सीमा के बिल्कुल नजदीक स्थित है. टीएनएलए ने सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में इस बात की पुष्टि की है कि धमाके में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है, हालांकि संगठन ने अभी तक मृतकों का कोई सटीक आंकड़ा जारी नहीं किया है. स्थानीय निवासियों और क्षेत्रीय मीडिया के अनुसार, इस मलबे से अब तक कम से कम 55 शवों को निकाला जा चुका है और मरने वालों की संख्या अभी और बढ़ सकती है क्योंकि खोजी अभियान लगातार जारी है.
विद्रोही संगठन टीएनएलए ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि जिस विस्फोटक सामग्री में यह ब्लास्ट हुआ है, उसे उन्होंने खुद ही वहां जमा करके रखा हुआ था. संगठन का दावा है कि इन विस्फोटकों को खनन कार्यों में इस्तेमाल करने के लिए इकट्ठा किया गया था. कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन हमले, एयर डिफेंस ने संभाला मोर्चा मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच 1 जून की सुबह कुवैत पर मिसाइलों और आत्मघाती ड्रोनों से बड़ा हमला किया गया. कुवैती सशस्त्र बलों ने इस आपातकालीन स्थिति में तुरंत कार्रवाई करते हुए अपनी वायु रक्षा प्रणाली को सक्रिय कर दिया.
सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दिए बयान में कहा कि क्षेत्र में सुनाई दे रहे धमाके दरअसल कुवैती एयर डिफेंस द्वारा दुश्मन के ड्रोनों को हवा में ही मार गिराने के कारण हो रहे हैं. कुवैती सैन्य प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से फिलहाल यह नहीं बताया है कि ये मिसाइलें और ड्रोन किस देश से दागे गए थे और हमलावरों का मुख्य निशाना क्या था. सेना ने स्थानीय नागरिकों से सतर्क रहने और सुरक्षा अधिकारियों द्वारा जारी सभी निर्देशों का पालन करने की अपील की है. हालांकि, माना जा रहा है कि इस क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की वजह से ही कुवैत एक बार फिर इस युद्ध की चपेट में आया है. दरअसल, फरवरी के अंत में ईरान पर हुए अमेरिका और इस्राएल के हमलों के बाद से ही ईरानी सशस्त्र बल लगातार कुवैत और अन्य खाड़ी देशों को निशाना बना रहे हैं. अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने कई प्रमुख सैन्य ठिकाने स्थापित कर रखे हैं. यही वजह है कि अप्रैल की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच हुए संघर्ष विराम के बावजूद, खाड़ी देशों पर इस तरह के छिटपुट हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं.
लगातार महंगाई से जूझ रहे बांग्लादेश में यह कदम आम जनता पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है. अप्रैल में देश की महंगाई दर 9.04 प्रतिशत दर्ज की गई थी. इस बीच देश में गर्मी के मौसम में बिजली आपूर्ति की समस्या भी बढ़ी है. राजधानी ढाका और अन्य बड़े शहरों में बिजली कटौती अपेक्षाकृत कम रही है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में व्यवधान देखने को मिले हैं.
बांग्लादेश अपनी जरूरत का 95 फीसदी तेल आयात करता है, जिसमें से ज्यादातर मध्य पूर्व से आता है. वहां युद्ध छिड़ने के चलते बांग्लादेश का आयात खर्च बढ़ा है, जिससे उसके सरकारी खजाने पर दबाव बढ़ा है. ढाका ने मार्च में कहा था कि उसने ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं से निपटने के लिए बहुपक्षीय कर्जदाताओं से करीब दो अरब डॉलर के कर्ज की मांग की है. म्यांमार का भरोसेमंद पड़ोसी और विश्वसनीय साझेदार है भारत: पीएम मोदी म्यांमार के पूर्व सेना प्रमुख और मौजूदा राष्ट्रपति मिन आंग ह्लांग ने सोमवार, 1 जून को नई दिल्ली में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की.
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, पीएम मोदी ने म्यांमार के राष्ट्रपति से कहा, "भारत म्यांमार का भरोसेमंद पड़ोसी, विश्वसनीय साझेदार और संकट के समय में सबसे पहले सहायता देने वाला बना हुआ है." जायसवाल के मुताबिक, पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत म्यांमार में शांति और संवाद का समर्थन करने के लिए तैयार है. भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने रिपोर्टरों से कहा कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत में सीमा सुरक्षा और म्यांमार में गृहयुद्ध के प्रभाव के बारे में भी चर्चा हुई. मिसरी ने कहा, "म्यांमार में स्थिरता और शांति स्पष्ट रूप से भारत के लिए एक प्रमुख हित का विषय है." न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, दोनों देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ से संबंधित मुद्दों पर करीबी संपर्क बनाए रखने पर भी सहमति जताई है. दोनों देशों ने इन रणनीतिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने का भी लक्ष्य रखा है.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने पर भी सहमति जताई है. एनवीडिया ने लॉन्च किया एआई पावर वाला 'सुपरचिप' एनवीडिया ने सोमवार को ताइपे में आयोजित 'एनवीडिया जीटीसी' इवेंट में नए और शक्तिशाली चिप्स का अनावरण किया. यह तकनीक अब एडवांस एआई फीचर्स को सीधे लैपटॉप और डेस्कटॉप कंप्यूटरों के भीतर लेकर आएगी. एनवीडिया के संस्थापक और सीईओ जेन्सेन हुआंग ने माइक्रोसॉफ्ट के साथ साझेदारी की घोषणा करते हुए कहा कि दोनों कंपनियां मिलकर पर्सनल कंप्यूटर (पीसी) की परिभाषा को पूरी तरह बदलने जा रही हैं.
यह भी पढ़ें: कैसी है भारत की पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप 'विक्रम' कंपनी ने इस नए प्रोसेसर को 'आरटीएक्स स्पार्क' सुपरचिप का नाम दिया है, जो सीपीयू और जीपीयू दोनों की बेजोड़ क्षमताओं को एक साथ जोड़ता है. इस सुपरचिप की मदद से चलने वाले नए विंडोज लैपटॉप और डेस्कटॉप को कंपनी ने एआई पर्सनल कंप्यूटर कहा है. माइक्रोसॉफ्ट और डेल जैसी बड़ी टेक कंपनियां इस चिप से लैस अपने नए पीसी मॉडल्स को इसी साल के अंत तक बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं. कैलिफोर्निया स्थित एनवीडिया अब तक केवल बड़े डेटा सेंटर्स के लिए हाई-एंड एआई चिप्स बनाने में बेहद सफल रही थी, लेकिन इस नए कदम के साथ वह आम उपभोक्ताओं के रोजमर्रा के गैजेट्स में अपनी पैठ मजबूत कर रही है.
अपनी इसी अत्याधुनिक चिप तकनीक के दम पर एनवीडिया आज एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल की परेंट कंपनी अल्फाबेट को पछाड़कर दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी बन चुकी है. स्वीडन सरकार ने कहा, बच्चों के सामने फोन का इस्तेमाल कम करें माता-पिता स्वीडन की पब्लिक हेल्थ एजेंसी ने सोमवार को माता-पिता के लिए एक नई एडवाइजरी जारी की है, जिसमें उनसे बच्चों के साथ समय बिताते समय स्मार्टफोन से दूर रहने की अपील की गई है. स्वास्थ्य एजेंसी ने स्क्रीन के बढ़ते दुष्प्रभावों पर हुए नए शोध का हवाला देते हुए कहा, "जब आप अपने बच्चे के साथ हों, तो अपना फोन दूर रख दें. इसका उपयोग केवल तभी करें जब बेहद जरूरी हो." एजेंसी ने माता-पिता को खुद के लिए भी स्वस्थ स्क्रीन आदतें अपनाने की सलाह दी है, क्योंकि बड़े जो करते हैं, बच्चे वही सीखते हैं.
यह भी पढ़ें:कौन हैं ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के फाउंडर, जिनके एक्स अकाउंट को भारत में बैन कर दिया गया? शोध के नतीजों से यह साफ हुआ है कि माता-पिता द्वारा अत्यधिक फोन इस्तेमाल करने से बच्चों के साथ उनके रिश्ते और आपसी संवाद पर बहुत बुरा असर पड़ता है. इसके अलावा, जो माता-पिता स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताते हैं, उनके बच्चों में भी मोबाइल की लत लगने की संभावना काफी बढ़ जाती है. इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए स्वीडन सरकार ने घरों में "स्क्रीन-फ्री जोन" (जैसे बेडरूम और डिनर टेबल) बनाने की सिफारिश की है, जहां फोन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित हो.
एजेंसी की मनोचिकित्सक हेलेना फ्रिलिंग्सडॉर्फ का कहना है कि रोजमर्रा की जिंदगी में किए गए ये छोटे-छोटे बदलाव बच्चों की आदतों में बड़ा और सकारात्मक सुधार ला सकते हैं. डिजिटल लत के खिलाफ स्वीडन पिछले कुछ वर्षों से लगातार कड़े कदम उठा रहा है. इसी अभियान के तहत, सरकार ने स्कूलों में नौवीं कक्षा तक यानी 15-16 वर्ष की आयु तक के बच्चों के लिए स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर पहले ही पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है. ईंधन महंगा होने के चलते भारत में बढ़ी कार पूलिंग पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते भारत में ईंधन महंगा हुआ है और इससे देश में कार पूलिंग को बढ़ावा मिला है.
दुनिया के सबसे बड़े कारपूलिंग प्लेटफॉर्म ब्ला-ब्ला कार ने बताया है कि बढ़ती ऊर्जा कीमतों के चलते इस साल छह लाख नए ड्राइवर प्लेटफॉर्म पर आए हैं. यह कंपनी के अनुमान से करीब 20 फीसदी ज्यादा है. ब्ला-ब्ला कार के लिए भारत सबसे बड़े बाजारों में से एक है. साल 2025 में भारत में करीब दो करोड़ लोगों ने इसका इस्तेमाल किया था.
कंपनी ने बताया है कि इस साल 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इस्राएल के हवाई हमलों के बाद से उनके प्लेटफॉर्म को इस्तेमाल करने वाले यात्रियों की संख्या में 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. यह प्लेटफॉर्म ऐसे ड्राइवरों और यात्रियों को जोड़ता है जो एक ही ठिकाने की ओर जाना चाहते हैं. उदाहरण के तौर पर अगर कोई व्यक्ति अपनी कार से अकेला दिल्ली से लखनऊ जाता है तो वह इसकी जानकारी ब्ला-ब्ला कार के प्लेटफॉर्म पर डाल सकता है और लखनऊ जाने के इच्छुक अन्य यात्री तय किराया देकर उनके साथ सफर कर सकते हैं. हाल ही में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नागरिकों से ईंधन की बचत करने की अपील की है.
उन्होंने नागरिकों से सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने और कारपूलिंग करने की अपील की है. पिछले महीने करीब तीन किस्तों में भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें करीब पांच रुपये बढ़ गई हैं. दिल्ली में "शांतिपूर्ण प्रदर्शन" करेगी 'कॉकरोच जनता पार्टी', शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भारत में सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हुई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) अब सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रही है. इसके संस्थापक अभिजीत दीपके ने घोषणा की है कि वे शनिवार को दिल्ली में "शांतिपूर्ण प्रदर्शन" का नेतृत्व करेंगे.
उन्होंने एक्स पर एक वीडियो मैसेज में कहा कि वे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करेंगे. हाल ही में कई प्रमुख परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के आरोप लगे हैं, जिसके चलते धर्मेंद्र प्रधान आलोचना के केंद्र में आ गए हैं. ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ एक सोशल मीडिया कैंपेन है, जो भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के उस कथित बयान के विरोध में शुरू हुआ था, जिसमें उन्होंने सरकार की आलोचना करने वाले युवाओं को “कॉकरोच” और “पैरासाइट” कहा था. हालांकि, बाद में उन्होंने कहा कि उनकी बात का गलत मतलब निकाला गया.
इस बयान के विरोध में 30 वर्षीय अभिजीत दीपके ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की शुरुआत की. अभिजीत बॉस्टन यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएट हैं और फिलहाल अमेरिका में रह रहे हैं. अब उन्होंने प्रदर्शन करने के लिए भारत आने की घोषणा की है. उन्होंने अपने फॉलोअर्स से नई दिल्ली एयरपोर्ट पर आने की अपील की है.
उन्होंने कहा है कि वे प्रदर्शन के लिए पुलिस की अनुमित लेने के लिए जाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि उनके दोस्तों और परिजनों को डर है कि उन्हें एयरपोर्ट पर ही हिरासत में लेकर जेल भेजा जा सकता है लेकिन उन्हें उम्मीद है कि भारत आज भी एक लोकतांत्रिक देश है और उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अनुमति मिल जाएगी. संघर्ष विराम पर ईरान के शीर्ष वार्ताकार बोले- अमेरिकी नाकेबंदी समझौते के खिलाफ ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी और लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इस्राएल के तेज होते हमले यह साबित करते हैं कि वॉशिंगटन संघर्ष विराम समझौते का पालन नहीं कर रहा है. गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह नाकेबंदी और लेबनान में बढ़ते युद्ध अपराध इस बात के स्पष्ट प्रमाण हैं कि अमेरिका नियमों को ताक पर रख रहा है.
उन्होंने कड़ी चेतावनी देते हुए आगे लिखा, "हर विकल्प की एक कीमत होती है और उसका बिल चुकाना ही पड़ता है." गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल से एक नाजुक संघर्ष विराम लागू है, जिसे आगे भी बढ़ाया गया था, लेकिन दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर उल्लंघन के आरोप लगाते रहे हैं. अमेरिका ने 16 अप्रैल को ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी शुरू कर दी थी. यह सख्त कदम तब उठाया गया जब पाकिस्तान में दोनों देशों के बीच हुई उच्च-स्तरीय शांति वार्ता किसी ठोस नतीजे पर पहुंचे बिना ही विफल हो गई थी. इस अमेरिकी नाकेबंदी के जवाब में ईरान ने भी वैश्विक तेल और गैस परिवहन के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर रखा है.
ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका के साथ किसी भी भविष्य के शांति समझौते के लिए लेबनान में युद्धविराम होना अनिवार्य शर्त है, जहां इस्राएल लगातार ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य अभियान चला रहा है. दोनों देशों के इस अड़ियल रुख के कारण क्षेत्र में एक बार फिर बड़े युद्ध का खतरा मंडराने लगा है. भारत में जी ग्रुप करेगा 2026 फीफा वर्ल्ड कप का प्रसारण भारत के जी एंटरटेनमेंट ने सोमवार को कहा कि उसने 2026 फीफा वर्ल्ड कप को भारत में प्रसारित करने के अधिकार हासिल कर लिए हैं. समूह ने बताया कि उसने 2034 तक फीफा के 38 अन्य आयोजनों को प्रसारित करने के अधिकार भी हासिल किए हैं.
इस डील के आर्थिक विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं. यह समझौता फुटबॉल विश्वकप की शुरुआत से सिर्फ 10 दिन पहले हुआ है. इससे पहले तक भारत में फीफा विश्वकप के प्रसारण को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई थी क्योंकि रिलायंस समूह के साथ फीफा की डील नहीं हो सकी थी. रिलायंस ने ही 2022 फीफा विश्वकप का भारत में प्रसारण किया था.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, फीफा ने शुरुआत में भारत के प्रसारण अधिकारों के लिए 10 करोड़ डॉलर की मांग की थी. इसमें 2026 और 2030 विश्वकप के प्रसारण अधिकार शामिल थे. बाद में फीफा ने यह राशि घटाकर छह करोड़ डॉलर कर दी थी. रिलायंस के जियोस्टार ने प्रसारण अधिकारों के लिए दो करोड़ डॉलर का प्रस्ताव रखा था, जिसे फीफा ने खारिज कर दिया था.
सोनी समूह ने 2014 और 2018 में भारत में फीफा विश्वकप का प्रसारण किया था. उसने भी इस बार प्रसारण अधिकारों के लिए फीफा से बातचीत की थी लेकिन बोली नहीं लगाई थी. इस बार अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको फुटबॉल विश्वकप की मेजबानी कर रहे है. 11 जून को दो मैचों के साथ इसकी शुरुआत होगी.
साल 2025 में जर्मनी आने वाले प्रवासियों की संख्या 13 फीसदी गिरी जर्मनी के संघीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल (2025) देश में आने वाले प्रवासियों की संख्या में साल 2024 के मुकाबले 13 फिसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल करीब 14.8 लाख लोग जर्मनी आए, जबकि देश छोड़कर जाने वालों की संख्या 12.5 लाख रही. इस तरह आने और जाने वाले लोगों के बीच का अंतर यानी नेट माइग्रेशन गिरकर केवल 2,35,000 रह गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 45 प्रतिशत की भारी गिरावट को दर्शाता है. सांख्यिकी अधिकारियों ने बताया कि इस कमी की मुख्य वजह प्रमुख शरणार्थी देशों से आने वाले लोगों की संख्या का घटना है.
आंकड़ों के अनुसार, सीरिया से होने वाले शुद्ध प्रवासन में 67 प्रतिशत और अफगानिस्तान से होने वाले प्रवासन में 41 प्रतिशत की बड़ी कमी आई है, जबकि यूक्रेन से आने वाले प्रवासियों की संख्या भी 21 प्रतिशत तक कम हुई है. इसके अलावा, यूरोपीय संघ (ईयू) के अन्य देशों से भी जर्मनी आकर बसने वाले लोगों के रुझान में कमी देखी गई है. देश से बाहर जाने वाले जर्मन नागरिकों की बात करें, तो उन्होंने प्रवासन के लिए सबसे ज्यादा स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया और स्पेन को चुना. वहीं, खुद जर्मनी के भीतर भी विभिन्न राज्यों के बीच लगभग 9,96,000 लोगों ने अपने ठिकाने बदले.
इस आंतरिक प्रवासन में राजधानी बर्लिन को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा और वहां रहने वाले लोग दूसरे राज्यों में चले गए, जबकि इसके विपरीत ब्रांडेनबुर्ग राज्य को सबसे अधिक फायदा हुआ जहां अन्य राज्यों से आकर बसने वालों की संख्या सबसे ज्यादा रही. 'चूज फ्रांस' समिट में 93 अरब यूरो के निवेश का एलान फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों ने सोमवार को घोषणा की है कि उनके सालाना निवेश सम्मेलन 'चूज फ्रांस' में देश को 93 अरब यूरो (करीब 108 अरब डॉलर) का रिकॉर्ड विदेशी निवेश मिलने की उम्मीद है. इस ऐतिहासिक निवेश का एक बड़ा हिस्सा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डेटा सेंटर्स के विकास पर खर्च किया जाएगा. राष्ट्रपति माक्रों के मुताबिक, इस वार्षिक निवेश बैठक के तहत अब तक जितने पैसे देने का वादा किया गया है, वह पिछले आठ सालों में संयुक्त रूप से जुटाए गए 87 अरब यूरो से भी कहीं अधिक है.
माक्रों ने इस बड़ी कामयाबी पर खुशी जताते हुए कहा, "चूज फ्रांस का यह अकेला संस्करण 93 अरब यूरो के पुख्ता निवेश के एक रिकॉर्ड आंकड़े को धरातल पर उतारने में सक्षम बनाएगा, जिससे देश में 15,000 से अधिक नौकरियों के अवसर पैदा होंगे. यह स्पष्ट रूप से अब तक का सबसे बड़ा और एक ऐतिहासिक संस्करण है." यह भी पढ़ें:फुटबॉल क्लब की जीत के बाद पेरिस में हंगामा, 400 लोग हिरासत में इस साल मिले कुल निवेश प्रस्तावों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी जापानी टेक निवेशक सॉफ्टबैंक की है. माक्रों ने बताया कि इसमें सॉफ्टबैंक की ओर से अकेले 45 अरब यूरो का निवेश शामिल है. सॉफ्टबैंक के संस्थापक मासायोशी सोन ने जानकारी दी थी कि इस धनराशि को साल 2031 तक उत्तरी फ्रांस में आधुनिक डेटा सेंटर्स बनाने पर खर्च किया जाएगा.
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक निवेश का उपयोग न केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर्स के लिए किया जाएगा, बल्कि सेमीकंडक्टर्स (चिप निर्माण), महत्वपूर्ण खनिजों, ट्रैक्टर और ट्रकों के निर्माण, स्टील उद्योग और स्वास्थ्य सेवा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भी किया जाएगा. ईरान ने अमेरिका के साथ समझौते के लिए लेबनान में युद्धविराम की रखी शर्त ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ किसी भी समझौते में लेबनान में युद्धविराम का होना सबसे जरूरी शर्त है. इस बीच, इस्राएल द्वारा लेबनान में हमले तेज करने के बाद क्षेत्र में तनाव एक बार फिर गहरा गया है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने सोमवार को एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान देश का रुख स्पष्ट किया.
उन्होंने कहा, "हम इस बात पर जोर देते हैं कि युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से किए जाने वाले किसी भी समझौते के लिए लेबनान में युद्धविराम एक अनिवार्य शर्त है." इस्राएली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने लेबनान के भीतर और आगे तक बढ़ने की बात कही है. वहीं, इस्राएली सेना द्वारा मध्यकालीन ब्युफोर्ट किले पर नियंत्रण करने के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सोमवार को एक आपातकालीन बैठक करने जा रही है. इस स्थिति पर बकाई ने कहा कि ईरान जायोनी शासन (इस्राएल) के अवैध आक्रमण के खिलाफ लेबनान और प्रतिरोध (रेसिस्टेंस) का समर्थन करने के लिए हर संभव कदम उठाएगा." सोमवार को बकाई ने अमेरिका पर युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप भी लगाया. दरअसल, रविवार रात को दोनों देशों के बीच ताजा झड़प हुई थी, जिसमें अमेरिका ने दक्षिणी ईरान के एक बंदरगाह शहर में एक दूरसंचार टावर पर हमला किया था.
इसके जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उन्होंने उस अमेरिकी बेस को निशाना बनाया जहां से यह हमला शुरू हुआ था, हालांकि उन्होंने उस बेस के स्थान की जानकारी नहीं दी. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि वॉशिंगटन के साथ चल रही इस बातचीत में ईरान कोई विशेष रियायतें नहीं मांग रहा है, बल्कि वह अपने अधिकारों की पूर्ति चाहता है. इन मांगों में अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत विदेशों में फ्रीज (जब्त) की गई ईरानी संपत्तियों को मुक्त करना भी शामिल है. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम, जो वॉशिंगटन के लिए हमेशा से एक बड़ा विवादित मुद्दा रहा है, वह अभी इस बातचीत का हिस्सा नहीं है.
बकाई ने कहा, "परमाणु फाइल के विवरण पर अभी तक कोई बातचीत नहीं हुई है. इस चरण में, हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता केवल युद्ध को समाप्त करना है." फ्रांस ने अटलांटिक महासागर में रूस से जुड़ा तेल टैंकर जब्त किया फ्रांस की नौसेना ने अटलांटिक महासागर में प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाले एक रूसी संबंध वाले तेल टैंकर को रोककर उसे अपनी कस्टडी में ले लिया है. यूक्रेन युद्ध के बीच पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को कड़ाई से लागू करने के अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई है. फ्रांस ने सोमवार को घोषणा की कि उसकी नौसेना ने अटलांटिक महासागर में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र के बीच एक प्रतिबंधित तेल टैंकर पर धावा बोलकर उसका रास्ता बदल दिया.
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों ने बताया कि टैगोर नाम के इस जहाज को रविवार को रोका गया था. यह भी पढ़ें:भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद किया तो क्या नुकसान होगा? राष्ट्रपति माक्रों ने इस सफल सैन्य अभियान की जानकारी देते हुए कहा, "यह ऑपरेशन अटलांटिक महासागर में, खुले समुद्र पर, यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) सहित कई सहयोगियों के समर्थन से और समुद्र के कानून के सख्त अनुपालन के साथ चलाया गया था." माक्रों ने रूस को मिलने वाली आर्थिक मदद पर कड़ा रुख अपनाते हुए आगे कहा, "जहाजों के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचना, समुद्र के कानून का उल्लंघन करना और उस युद्ध को फाइनेंस (वित्तपोषित) करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है, जिसे रूस चार से अधिक वर्षों से यूक्रेन के खिलाफ लड़ रहा है." यह कोई पहला मामला नहीं है जब फ्रांस ने इस तरह की कार्रवाई की हो. हाल के महीनों में फ्रांसीसी नौसेना ने ऐसे कई संदिग्ध जहाजों को पकड़ा है.
हालांकि, अतीत में पकड़े गए कुछ जहाजों को भारी जुर्माना वसूलने के बाद छोड़ दिया गया था, लेकिन यूक्रेन में लंबे समय से खींच रहे युद्ध को देखते हुए अब पश्चिमी सरकारों ने प्रतिबंधों को और अधिक सख्ती से लागू करने का संकल्प लिया है. आरसीबी कप्तान रजत पाटीदार ने कोच को दिया लगातार दूसरे खिताब का श्रेय रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के कप्तान रजत पाटीदार ने कोच एंडी फ्लॉवर को लगातार दूसरी खिताबी जीत का श्रेय दिया है. उन्होंने कहा कि कोच फ्लॉवर ने टीम की संस्कृति को बदलने के लिए प्रयास किए, जिससे उन्हें आईपीएल का खिताब अपने पास बरकरार रखने में मदद मिली. रविवार रात विराट कोहली की 75 रन की नाबाद पारी की बदौलत आरसीबी ने लगातार दूसरी बार आईपीएल का खिताब जीता.
सोमवार सुबह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाटीदार ने कहा कि अब बेंगलुरु की नजरें लगातार तीन बार आईपीएल का खिताब जीतने वाली पहली टीम बनने पर है. टीम ने अपने दोनों खिताब पाटीदार की कप्तानी में ही जीते हैं. उन्होंने सोमवार, 1 जून को 32 साल के हो गए हैं. उन्होंने कहा कि आज मेरा जन्मदिन है और इससे बेहतर और कोई गिफ्ट नहीं हो सकता.
यह भी पढ़ें: क्या अब बिहार से निकलते रहेंगे धोनी-सूर्यवंशी जैसे क्रिकेटर उन्होंने कोच एंडी फ्लॉवर की तारीफ करते हुए कहा, “मैंने आईपीएल के पांच सीजन खेले हैं और वे सबसे अच्छे कोचों में से एक हैं.” उन्होंने बताया कि कोच उन खिलाड़ियों के साथ भी काफी वक्त बिताते हैं, जो अपना पहला सीजन खेल रहे होते हैं या जिन्हें प्लेइंग-11 में जगह नहीं मिल पाती. उन्होंने कहा, “वे सबसे बेहतरीन कोच हैं, जिनके मार्गदर्शन में मैं खेला हूं.” म्यांमार में बारूद डिपो में विस्फोट, कम से कम 55 लोगों की मौत म्यांमार के एक विद्रोही गुट के हथियार डिपो में हुए एक भीषण विस्फोट में कम से कम 55 लोगों की मौत हो गई है. धमाका इतना जोरदार था कि आसपास का पूरा इलाका पूरी तरह तबाह हो गया है और मलबे में बचे हुए लोगों की तलाश अब भी जारी है. यह हादसा म्यांमार के कौंग टाट गांव में रविवार दोपहर करीब 12 बजे हुआ.
इस इलाके पर म्यांमार की सेना के खिलाफ लड़ने वाले विद्रोही गुट 'ताअंग नेशनल लिबरेशन आर्मी' का नियंत्रण है. यह गांव चीन की सीमा के बिल्कुल नजदीक स्थित है. टीएनएलए ने सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में इस बात की पुष्टि की है कि धमाके में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है, हालांकि संगठन ने अभी तक मृतकों का कोई सटीक आंकड़ा जारी नहीं किया है. स्थानीय निवासियों और क्षेत्रीय मीडिया के अनुसार, इस मलबे से अब तक कम से कम 55 शवों को निकाला जा चुका है और मरने वालों की संख्या अभी और बढ़ सकती है क्योंकि खोजी अभियान लगातार जारी है.
विद्रोही संगठन टीएनएलए ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि जिस विस्फोटक सामग्री में यह ब्लास्ट हुआ है, उसे उन्होंने खुद ही वहां जमा करके रखा हुआ था. संगठन का दावा है कि इन विस्फोटकों को खनन कार्यों में इस्तेमाल करने के लिए इकट्ठा किया गया था. कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन हमले, एयर डिफेंस ने संभाला मोर्चा मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच 1 जून की सुबह कुवैत पर मिसाइलों और आत्मघाती ड्रोनों से बड़ा हमला किया गया. कुवैती सशस्त्र बलों ने इस आपातकालीन स्थिति में तुरंत कार्रवाई करते हुए अपनी वायु रक्षा प्रणाली को सक्रिय कर दिया.
सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दिए बयान में कहा कि क्षेत्र में सुनाई दे रहे धमाके दरअसल कुवैती एयर डिफेंस द्वारा दुश्मन के ड्रोनों को हवा में ही मार गिराने के कारण हो रहे हैं. कुवैती सैन्य प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से फिलहाल यह नहीं बताया है कि ये मिसाइलें और ड्रोन किस देश से दागे गए थे और हमलावरों का मुख्य निशाना क्या था. सेना ने स्थानीय नागरिकों से सतर्क रहने और सुरक्षा अधिकारियों द्वारा जारी सभी निर्देशों का पालन करने की अपील की है. हालांकि, माना जा रहा है कि इस क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की वजह से ही कुवैत एक बार फिर इस युद्ध की चपेट में आया है. दरअसल, फरवरी के अंत में ईरान पर हुए अमेरिका और इस्राएल के हमलों के बाद से ही ईरानी सशस्त्र बल लगातार कुवैत और अन्य खाड़ी देशों को निशाना बना रहे हैं. अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने कई प्रमुख सैन्य ठिकाने स्थापित कर रखे हैं. यही वजह है कि अप्रैल की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच हुए संघर्ष विराम के बावजूद, खाड़ी देशों पर इस तरह के छिटपुट हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं.

