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5 दिन तक फ्लैट में पड़ा रहा भाई का शव, बहन उसी घर में थी मौजूद. दरवाजा खुला तो उड़ गए होश

5 दिन तक फ्लैट में पड़ा रहा भाई का शव, बहन उसी घर में थी मौजूद. दरवाजा खुला तो उड़ गए होश

Kanpur: कानपुर के पॉश इलाके लाजपत नगर स्थित एक अपार्टमेंट में रविवार को ऐसा दृश्य सामने आया जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी का शव पांच दिनों तक फ्लैट के अंदर पड़ा रहा, जबकि उनकी बहन उसी घर में मौजूद थीं।

मामले का खुलासा तब हुआ जब फ्लैट से तेज दुर्गंध आने लगी और पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया तो कमरे में पड़ा शव और सदमे में मिली बहन को देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए।

कई दिनों से बंद था फ्लैट

जानकारी के अनुसार लाजपत नगर स्थित केसी अपार्टमेंट की चौथी मंजिल पर रिटायर्ड पीडब्ल्यूडी कर्मचारी अरुण कुमार मलिक (69) अपनी बहन हेमलता के साथ रहते थे। पड़ोसियों के मुताबिक पिछले कई दिनों से फ्लैट का दरवाजा नहीं खुल रहा था और दोनों भाई-बहन भी दिखाई नहीं दे रहे थे।

शनिवार देर रात लोगों को फ्लैट से तेज बदबू आने लगी। पड़ोसियों ने कई बार दरवाजा खटखटाया और फोन से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। स्थिति संदिग्ध लगने पर तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।

पुलिस ने तोड़ा दरवाजा

सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। एडीसीपी सेंट्रल डॉ. अर्चना सिंह, एसीपी स्वरूपनगर शिखर कुमार और नजीराबाद थाना पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया। पुलिस ने फ्लैट का दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया। अंदर का दृश्य बेहद चौंकाने वाला था। ड्राइंग रूम के फर्श पर अरुण कुमार मलिक का शव औंधे मुंह पड़ा हुआ मिला। वहीं उनकी बहन हेमलता घर के दूसरे कमरे में दरवाजे के पीछे बैठी मिलीं।

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पांच दिन पुराना बताया जा रहा शव

फॉरेंसिक विशेषज्ञों की शुरुआती जांच में शव करीब पांच दिन पुराना होने की आशंका जताई गई है। शव की स्थिति को देखते हुए माना जा रहा है कि अरुण कुमार मलिक की मौत कई दिन पहले हो चुकी थी। हालांकि मौत के कारणों का स्पष्ट पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। पुलिस फिलहाल हर पहलू से मामले की जांच कर रही है।

बहन गहरे सदमे में

घटना के बाद पुलिस ने मृतक की बहन हेमलता से पूछताछ करने की कोशिश की, लेकिन वह कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं थीं। अधिकारियों के अनुसार वह गहरे मानसिक सदमे में थीं और किसी भी सवाल का जवाब नहीं दे पा रही थीं। उनकी हालत को देखते हुए पुलिस ने उन्हें तत्काल कानपुर के हैलट अस्पताल भेजा। मेडिकल जांच के बाद उन्हें वन स्टॉप सेंटर में सुरक्षित रखा गया है, जहां विशेषज्ञ उनकी काउंसलिंग और देखभाल कर रहे हैं।

बिहार के रहने वाले थे अरुण

पुलिस जांच में सामने आया है कि अरुण कुमार मलिक मूल रूप से बिहार के दरभंगा जिले के निवासी थे। फ्लैट की तलाशी के दौरान उनके पुराने दस्तावेज और पहचान पत्र भी मिले हैं। घर से पीडब्ल्यूडी विभाग और भारतीय वायुसेना (एयरफोर्स) से जुड़े पुराने पहचान पत्र भी बरामद हुए हैं। इससे पता चलता है कि अरुण कुमार का लंबा सरकारी सेवा का इतिहास रहा है।

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पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि अरुण कुमार की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या इसके पीछे कोई अन्य वजह है। फॉरेंसिक टीम द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।

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