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अमेरिका-ईरान जंग का पांचवा हफ्ता. लेकिन बार-बार बदले ट्रंप के दावे, आखिर क्या कहते हैं असली हालात?

अमेरिका-ईरान जंग का पांचवा हफ्ता. लेकिन बार-बार बदले ट्रंप के दावे, आखिर क्या कहते हैं असली हालात?

Washington: अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग अब पांचवें हफ्ते में प्रवेश कर चुकी है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि जंग जल्द खत्म हो जाएगी या अमेरिका पहले ही जीत चुका है।

पिछले 30 दिनों में उनके बयानों में लगातार बदलाव देखा गया है, जिससे जंग की वास्तविक स्थिति और अमेरिकी रणनीति को लेकर उलझन बढ़ रही है।

जीत की पुष्टि या चेतावनी?

ट्रंप ने मार्च में कई मौकों पर यह दावा किया कि अमेरिका जंग जीत चुका है, लेकिन तुरंत बाद उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो हमले और तेज होंगे। उदाहरण के लिए, 24 मार्च को उन्होंने कहा कि "हम यह जंग जीत चुके हैं", लेकिन अगले दिन चेतावनी दी कि ईरान के ऊर्जा और पानी के ढांचे को तबाह किया जा सकता है।

क्या कहते हैं जमीनी हालात?

हालांकि ट्रंप के बयानों में जीत की बात सामने आई, लेकिन वास्तविक जमीनी हालात इस दावे से मेल नहीं खाते। अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में लगभग 50,000 सैनिक तैनात कर दिए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि यह ऑपरेशन उतना आसान नहीं है जितना सार्वजनिक बयान दिखाते हैं।

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व्हाइट हाउस और विदेश विभाग की मिश्रित रणनीति

व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि "ऑपरेशन अपने लक्ष्यों के काफी करीब है और मिशन जारी है।" वहीं विदेश मंत्री मार्को रुबियो का कहना है कि सभी उद्देश्य तय समय के आसपास पूरे हो सकते हैं। ये बयानों संकेत देते हैं कि अमेरिका अभी पीछे हटने के मूड में नहीं है।

बदलते बयान और उनकी रणनीति

ट्रंप के बयान लगातार बदल रहे हैं। 2 मार्च को उन्होंने इसे "पूरी तरह सफल ऑपरेशन" कहा, जबकि 9 मार्च को "कई मायनों में जीत चुके" बताया। 11 मार्च को कहा कि "किसी भी समय खत्म हो सकती है" और कुछ घंटे बाद कहा "काम पूरा करना होगा।" यह लगातार उलझा हुआ संदेश अमेरिकी जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भ्रम पैदा कर रहा है।

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राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक रणनीति

विशेषज्ञों के अनुसार यह रणनीति दोनों स्तरों पर काम कर रही है। घरेलू समर्थन बनाए रखने के लिए ट्रंप जनता को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही, ईरान पर दबाव बनाने के लिए मनोवैज्ञानिक रणनीति भी अपनाई जा रही है। लेकिन इसका साइड इफेक्ट यह भी है कि जंग के बारे में अनिश्चितता और बढ़ रही है।

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