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Assembly Elections: क्या वक्त से पहले हो जाएंगे यूपी समेत कई राज्यों में चुनाव? इस एक वजह ने बढ़ा दी नेताओं की धड़कनें!

Assembly Elections: क्या वक्त से पहले हो जाएंगे यूपी समेत कई राज्यों में चुनाव? इस एक वजह ने बढ़ा दी नेताओं की धड़कनें!

New Delhi: उत्तर प्रदेश समेत देश के कई अहम राज्यों में तय समय से पहले विधानसभा चुनाव कराए जाने की आहट ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा बेहद आम हो गई है कि यूपी, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर जैसे राज्यों में चुनावी बिगुल उम्मीद से पहले बज सकता है।

दरअसल, इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह आगामी जनगणना और चुनाव का एक ही समय के आसपास होना माना जा रहा है। इस दोहरी जिम्मेदारी के टकराव से बचने के लिए चुनाव आयोग और सरकार के स्तर पर गंभीर मंथन शुरू होने की खबरें हैं।

प्रशासनिक तंत्र पर बढ़ेगा दोहरा दबाव

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि जनगणना और विधानसभा चुनाव की प्रक्रियाएं एक ही समयावधि में संचालित होती हैं, तो सरकारी मशीनरी पर अत्यधिक दबाव पड़ सकता है। जिलाधिकारी (DM) स्तर से लेकर निचले स्तर के कर्मचारियों तक, बड़ी संख्या में सरकारी अमला इन दोनों ही राष्ट्रीय महत्व के कार्यों में रीढ़ की हड्डी होता है। जनगणना के लिए जिला प्रशासन को बड़े पैमाने पर संसाधन और मानवबल की आवश्यकता होती है, और ठीक इसी तरह चुनाव कराने की जिम्मेदारी भी इसी तंत्र पर होती है। इसी संभावित टकराव को टालने के लिए समय से पहले चुनाव कराने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस पर अभी कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी है।

परिसीमन की संभावनाओं ने बढ़ाई चिंता

जानकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे मामले का एक सिरा भविष्य में होने वाले लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन (Delimitation) से भी जुड़ा हुआ है। जनगणना के पूरे होने के बाद परिसीमन की एक लंबी और जटिल प्रक्रिया शुरू होनी है। यही कारण है कि चुनावी और जनगणना संबंधी कार्यक्रमों के बेहतर समन्वय को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच आने वाले दिनों में व्यापक विचार-विमर्श देखने को मिल सकता है।

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राजनीतिक दलों में मची खलबली

भले ही समय से पहले चुनाव को लेकर अभी तक चुनाव आयोग या गृह मंत्रालय की ओर से कोई औपचारिक घोषणा या टिप्पणी सामने नहीं आई है, लेकिन इन चर्चाओं ने ही राजनीतिक दलों की रातों की नींद उड़ा दी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जहां संगठनात्मक स्तर पर पहले से ही खुद को एक्टिव मोड में रखे हुए है, वहीं विपक्षी दल भी इस संभावित परिस्थिति को भांपते हुए अपनी रणनीतियों को धार देने में जुट गए हैं। सूत्रों की मानें तो चुनाव आयोग फिलहाल विभिन्न राज्यों की प्रशासनिक आवश्यकताओं और जमीनी परिस्थितियों का बारीकी से अध्ययन कर रहा है।

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