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Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी से हड़कंप, सीक्रेट रिपोर्ट के 20 बड़े खुलासे उड़ा देंगे आपके होश

Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी से हड़कंप, सीक्रेट रिपोर्ट के 20 बड़े खुलासे उड़ा देंगे आपके होश

Ayodhya: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था और उनके चढ़ावे के साथ खिलवाड़ का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में मंदिर परिसर के भीतर हुई महाचोरी को लेकर 20 सबसे बड़े और सनसनीखेज खुलासे किए गए हैं।

लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय SIT की इस 'टॉप सीक्रेट' रिपोर्ट ने न केवल मंदिर के सुरक्षा तंत्र, बल्कि राम जन्मभूमि ट्रस्ट और बैंक प्रबंधन की कार्यप्रणाली को भी पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है।

SIT के 20 बड़े खुलासे: 40 दिनों में 70 बार हुई लूट

SIT की रिपोर्ट का सबसे बड़ा और मुख्य फोकस मंदिर के भीतर हुई सुनियोजित चोरी के तौर-तरीके हैं। उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की जांच के अनुसार, 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच महज 40 दिनों के भीतर कुल 70 बार चढ़ावे की नकदी चोरी की गई। हालांकि, 24 अप्रैल 2026 से पहले का सीसीटीवी बैकअप उपलब्ध न होने के कारण गबन की गई वास्तविक राशि का सटीक आकलन होना अभी बाकी है।

रिपोर्ट के अनुसार, नोटों की गिनती के दौरान कर्मचारी बेहद शातिराना ढंग से नोटों की गड्डियां और खुले पैसे अपने कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपाते हुए पकड़े गए हैं। इस पूरे खेल में छह मुख्य गणना कर्मियों अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय और रमाशंकर मिश्रा की सीधी संलिप्तता पाई गई है।

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लापरवाही का महाजाल: SOP को ताक पर रखकर हुई गिनती

जांच रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि यह चोरी कोई अचानक हुई घटना नहीं, बल्कि ट्रस्ट और बैंक के बीच तय स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के खुले उल्लंघन का नतीजा थी। एसआईटी ने खुलासा किया है कि दान पात्रों (हुंडियों) से निकलने वाली नकदी का हुंडीवार (अलग-अलग) रिकॉर्ड रखने के बजाय, उन्हें पहले ही आपस में मिला दिया जाता था।

सबसे गंभीर बात यह रही कि गणना कक्ष में प्रवेश और निकास के समय कर्मचारियों की कोई 'फ्रिस्किंग' (शारीरिक तलाशी) नहीं होती थी। नियमों के विपरीत, बिना जेब वाली वर्दी लागू नहीं की गई, कर्मचारियों को अपना निजी सामान अंदर ले जाने की छूट थी और बायोमीट्रिक उपस्थिति व्यवस्था भी ठप पड़ी थी।

अफसरों और रसूखदारों की भूमिका पर गंभीर सवाल

SIT की रिपोर्ट में केवल छोटे कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि ट्रस्ट और बैंक के बड़े चेहरों पर भी गाज गिरी है। ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ. अनिल मिश्रा पर निगरानी और निर्देशों को लागू कराने में पूरी तरह विफल रहने का आरोप लगाया गया है। वहीं, गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव को सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही के लिए प्रमुख रूप से उत्तरदायी ठहराया गया है।

एक और बड़ा खुलासा यह हुआ कि रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू नामक व्यक्ति बिना किसी औपचारिक आदेश के हुंडियों की चाबियां संभाल रहा था और उसी के प्रभाव के कारण उसके रिश्तेदार मनीष यादव को नोटों की गिनती के काम में लगाया गया, जिसने इस गबन का पूरा फायदा उठाया। इसके अलावा, बैंक अधिकारियों ने भी नियमों के तहत कर्मचारियों के मासिक रोटेशन का पालन नहीं किया।

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करोड़ों की बेनामी संपत्ति और अब तक की बरामदगी

एसआईटी के गठन से पहले ही ट्रस्ट ने संदिग्धों के पास से लगभग 78.94 लाख रुपये, भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा और कुछ बहुमूल्य वस्तुएं बरामद कर ली थीं। इसके अलावा, गणना कक्ष से सटे शौचालय से भी 2.25 लाख रुपये नकद मिले थे। जांच में सामने आया है कि इन दागी कर्मचारियों ने चोरी की रकम अपने रिश्तेदारों के बैंक खातों में जमा की, बड़ी मात्रा में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराए और बेनामी संपत्तियां अर्जित कीं।

राहत की बात सिर्फ यह रही कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहीं चांदी की ईंटें और अन्य कीमती सामान गायब होने की अफवाहें झूठी निकलीं; वे सभी रिकॉर्ड में सुरक्षित पाई गई हैं। एसआईटी ने इन सभी छह आरोपियों और संबंधित पर्यवेक्षकों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर विस्तृत आर्थिक जांच की सिफारिश की है।

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